SIR Controversy: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच भाजपा ने विपक्ष पर पलटवार किया है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीटों के आंकड़ों का हवाला देते हुए विपक्ष के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को चुनावी नतीजों से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं। पात्रा ने कहा कि जिन 20 विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आई है, उनमें से 13 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा छह सीटों पर जीती। उनके मुताबिक, अगर मतदाता सूची से नाम हटाने का फायदा भाजपा को मिला होता, तो इन सीटों के नतीजे अलग क्यों नहीं रहे?
SIR Controversy: ‘वोटर लिस्ट से नाम कटने से BJP नहीं जीती’
संबित पात्रा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को भाजपा की जीत से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के आंकड़ों का हवाला देते हुए विपक्ष से सवाल किया कि सबसे ज्यादा नाम हटाए जाने वाली 20 सीटों में भाजपा सिर्फ छह सीटें ही क्यों जीत सकी। पात्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग की आंतरिक प्रक्रिया और कथित असहमति पर राजनीतिक बहस तेज है।
SIR Controversy: आयोग की प्रक्रिया पर भी बोले पात्रा
भाजपा प्रवक्ता ने चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच चर्चा को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा और मतभेद हो सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाता है। चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आए स्पष्टीकरण के मुताबिक, SIR समेत आयोग के बड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मंजूरी शामिल थी।
क्या है असहमति रिपोर्ट का मामला
दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ मामलों में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा से जुड़े मुद्दों पर असहमति सामने आई थी। हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग प्रशासनिक और मतदाता सूची संबंधी मामलों में चर्चा या आपत्ति होने का अर्थ यह नहीं है कि SIR को लेकर आयोग के अंतिम निर्णय में मतभेद था। अधिकारियों के मुताबिक, SIR से जुड़े निर्णय सामूहिक सहमति से लिए गए।
‘जनता ने नकारा तो संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल’
पात्रा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव आयोग को निशाना बनाकर राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर रहा है। पात्रा के मुताबिक, विपक्ष को जनता का समर्थन नहीं मिल रहा, इसलिए वह संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। यह भाजपा का राजनीतिक आरोप है। दूसरी ओर, विपक्षी दल SIR और मतदाता सूची में नामों के पुनरीक्षण को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान ऐसे मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जो भाजपा के समर्थन में नहीं हैं। भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है।
SIR पर बहस अब चुनाव आयोग की प्रक्रिया तक पहुंची
SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और कथित असहमति भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। एक तरफ आयोग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए, वहीं विपक्ष इन प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे में संबित पात्रा का पश्चिम बंगाल की 20 सीटों का आंकड़ा सामने रखना भाजपा की ओर से विपक्ष के आरोपों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
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