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21 साल बाद MP में फिर दौड़ी ‘सरकारी’ बसें, लेकिन कमान प्राइवेट हाथों में क्यों? समझिए पूरा मॉडल

MP BUS Service: मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सार्वजनिक बस सेवा नए स्वरूप में लौट आई है। 25 सितंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भोपाल के भेल दशहरा मैदान से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ की शुरुआत की। पहले चरण में सात शहरों के लिए 351 बसें सड़क पर उतारी गई हैं।

लेकिन इस बार मॉडल पुराने सरकारी परिवहन निगम जैसा नहीं है। बस सेवा पर सरकार की निगरानी रहेगी, जबकि बसों के संचालन में निजी ऑपरेटरों की भूमिका होगी। यानी इसे सरकारी नियंत्रण और निजी भागीदारी वाले PPP मॉडल पर तैयार किया गया है। सरकार का लक्ष्य आगे चलकर वर्ष 2031 तक प्रदेश में करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करना है। आखिर 21 साल बाद सरकार को बस सेवा शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी? बसें कौन चलाएगा? मौजूदा निजी बसों का क्या होगा? 15 साल पुरानी बसों पर रोक क्यों है? और सबसे बड़ा सवाल- आपके शहर या गांव तक बस कब पहुंचेगी? समझिए पूरा मामला।

सवाल 1: 21 साल पहले सरकारी बस सेवा क्यों बंद हुई थी?

जवाब- मध्य प्रदेश में राज्य परिवहन निगम को बंद करने का सैद्धांतिक निर्णय 28 फरवरी 2005 को लिया गया था। बाद में निगम की बसों और अनुबंधित बसों का संचालन भी चरणबद्ध तरीके से बंद हुआ। विधानसभा में सरकार ने बताया था कि निगम की बस सेवा पूरी तरह बंद होने के बाद निजी बस ऑपरेटरों को परमिट देकर यात्रियों के लिए परिवहन व्यवस्था जारी रखी गई। उस समय निगम की खराब वित्तीय स्थिति भी बड़ी वजहों में रही। विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, निगम पर करीब 756 करोड़ रुपये का कर्ज था और हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था।

इसके बाद प्रदेश की सार्वजनिक बस व्यवस्था काफी हद तक निजी ऑपरेटरों पर निर्भर हो गई। समस्या यह रही कि कम यात्री वाले दूर-दराज के रूट निजी ऑपरेटरों के लिए हमेशा व्यावसायिक रूप से आकर्षक नहीं होते। ऐसे में नई योजना के जरिए सरकार ग्रामीण और कम कनेक्टिविटी वाले इलाकों तक नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने प्रदेश के 55 जिलों में कुल 1,036 रूट चिन्हित किए हैं। इनमें 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट रूट शामिल हैं।

MP BUS Service: सवाल 2: इस बार सरकारी बस और निजी ऑपरेटर का मॉडल कैसे काम करेगा?

जवाब- यही इस पूरी योजना का सबसे अहम हिस्सा है। इस बार सरकार खुद हर बस का संचालन नहीं करेगी। ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर चलाया जा रहा है। सरकार नेटवर्क, रूट, निगरानी और व्यवस्था का ढांचा तैयार करेगी, जबकि निजी ऑपरेटर बसों के संचालन में भागीदारी करेंगे।

इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड (MPYPIL) को प्रमुख संस्था बनाया गया है। योजना में सात क्षेत्रीय सहायक कंपनियों और जिला स्तर की समितियों के जरिए परिवहन व्यवस्था को संचालित और मॉनिटर करने की संरचना तैयार की गई है। यानी आसान भाषा में समझें तो- सरकार: रूट, व्यवस्था और निगरानी, निजी ऑपरेटर: बसों का संचालन , ITMS: बसों की रियल टाइम निगरानी और MPYPIL: पूरी व्यवस्था को जोड़ने वाली राज्य स्तरीय संस्था करेगी। यही वजह है कि इसे ‘सरकारी बस सेवा’ कहा जा रहा है, लेकिन बस का स्टेयरिंग सीधे सरकार के हाथ में नहीं होगा।

सवाल 3: शुरुआत में कितनी बसें और किन शहरों में चलेंगी?

जवाब- पहले चरण में 351 बसें सात शहरों के लिए शुरू की गई हैं। इंदौर: 145 बसें – 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी, भोपाल: 106 – 23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर: 67 – 14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी, रीवा: 18 इंटरसिटी , देवास: 10 इंटरसिटी , कटनी: 3 इंटरसिटी और भिंड: 2 इंटरसिटी बस चलना शुरु होगी है।  इस तरह शुरुआत में शहर के भीतर और शहरों के बीच, दोनों तरह की सेवाएं शुरू की गई हैं। सरकार का लक्ष्य शुरुआत के बाद धीरे-धीरे बसों की संख्या बढ़ाना है। योजना के मुताबिक वर्ष 2031 तक करीब 15 हजार बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है।

MP BUS Service: सवाल 4: आपके शहर या गांव तक बस कब पहुंचेगी?

जवाब- फिलहाल पूरे प्रदेश के हर गांव के लिए अलग-अलग शुरुआत की तारीख घोषित नहीं की गई है। सरकार ने 55 जिलों में 1,036 रूट चिन्हित किए हैं। इसलिए सेवा का विस्तार चरणबद्ध तरीके से होगा। मुख्यमंत्री की ओर से वर्ष 2030 के अंत तक प्रदेश के 75 प्रतिशत गांवों तक बस कनेक्टिविटी पहुंचाने का लक्ष्य भी बताया गया है। यानी अभी 351 बसों से शुरुआत हुई है, लेकिन योजना का दायरा इससे काफी बड़ा है। आने वाले चरणों में नए रूट और नई बसें जोड़ी जाएंगी।

सवाल 5: बस का किराया कितना होगा?

जवाब- मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंटरसिटी बसों के लिए किराया 2 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया गया है। उदाहरण के तौर पर भोपाल से इंदौर की दूरी करीब 190 किलोमीटर मानें तो किराया करीब 380 रुपये बैठता है। वास्तविक टिकट राशि रूट और लागू किराया व्यवस्था के अनुसार होगी। अगस्त 2026 में राज्य सरकार ने सामान्य बसों का किराया भी 2 रुपये प्रति किलोमीटर किया था और न्यूनतम किराया 10 रुपये निर्धारित किया गया था।

MP BUS Service: सवाल 6: इन बसों में यात्रियों को क्या सुविधाएं मिलेंगी?

जवाब- इस बार बस सेवा में तकनीक और सुरक्षा पर खास जोर दिया गया है। हर बस में-  7 CCTV कैमरे,  पैनिक बटन, GPS/VLTD से लाइव लोकेशन ट्रैकिंग ओर पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम को भी दिया गया है ।  जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। बसों के संचालन, रूट और समयबद्धता की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS और कमांड-कंट्रोल सेंटर के जरिए की जाएगी। इसका मतलब यह है कि बस सड़क पर चलने के बाद पूरी तरह सिस्टम से बाहर नहीं होगी। उसकी लोकेशन और संचालन पर रियल टाइम नजर रखने की व्यवस्था की गई है।

सवाल 7: फिर निजी बस ऑपरेटरों को परेशानी क्यों है?

जवाब- विवाद यहीं से शुरू होता है। निजी बस ऑपरेटरों की मुख्य मांग है कि नई सुगम परिवहन सेवा के चिन्हित रूटों पर उन्हें भी संचालन का मौका दिया जाए। सरकार ने उनकी मांगों और समस्याओं पर चर्चा के लिए तीन सदस्यीय मंत्री समूह बनाया है। इसमें परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल शामिल हैं।

ऑपरेटरों का कहना है कि उनके पास पहले से बड़ी संख्या में परमिट हैं और कई रूटों पर यात्री संख्या कम होने से कारोबार पर दबाव है। बस ओनर्स एसोसिएशन की ओर से यह आरोप भी लगाया गया है कि सरकार धीरे-धीरे निजी परमिट अपने नियंत्रण में लेकर उन्हीं रूटों को ऑपरेटरों को अनुबंध पर देने और रॉयल्टी वसूलने की व्यवस्था बना सकती है। यह एसोसिएशन का आरोप है; इसे सरकार की घोषित नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल सरकार की ओर से मंत्री समूह बनाया गया है, जो ऑपरेटरों की मांगों पर चर्चा कर अपनी सिफारिश देगा। इसलिए इस मुद्दे पर अंतिम तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।

MP BUS Service: सवाल 8: 15 साल पुरानी बस फिट है तो भी क्यों नहीं चलेगी?

जवाब- मध्य प्रदेश में 15 साल से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों को लेकर अलग विवाद चल रहा है। 14 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने 15 साल की आयु पूरी कर चुकी व्यावसायिक बसों के संचालन पर रोक से जुड़ा आदेश जारी किया था। बस ऑपरेटरों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और उनका तर्क था कि उनके पास वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र और टैक्स भुगतान की व्यवस्था है। अप्रैल 2026 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑपरेटरों की 10 याचिकाएं खारिज करते हुए सरकार के आदेश को बरकरार रखा।

MP BUS Service
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अदालत के सामने प्रदेश में करीब 899 ऐसी बसों का आंकड़ा भी रखा गया था, जो 15 साल की आयु सीमा पार कर चुकी थीं। ऑपरेटरों की दलील थी कि अगर वाहन फिटनेस टेस्ट में पास है और उसका परमिट वैध है तो सिर्फ उम्र के आधार पर उसे सड़क से हटाना उचित नहीं है। वहीं सरकार का पक्ष परिवहन नीति और सुरक्षा से जुड़े नियमों पर आधारित था। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नीति बनाने की शक्ति को स्वीकार करते हुए आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।

सवाल 9: 351 बसों में कौन-सी बसें हैं? क्या सभी नई हैं?

जवाब- शुरुआती बेड़े में इलेक्ट्रिक और आधुनिक बसें शामिल हैं। 351 बसों में 180 इलेक्ट्रिक और 171 अन्य आधुनिक बसें शामिल हैं। हालांकि, निजी बस ऑपरेटरों की ओर से यह दावा भी किया गया है कि लॉन्च कार्यक्रम में कुछ ऐसी बसें दिखाई गईं जो पहले से किसी सेवा में चल रही थीं और उन्हें नए स्वरूप में प्रस्तुत किया गया।

MP BUS Service: सवाल 10: क्या पुरानी निजी बसें बंद हो जाएंगी?
जवाब- फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगा कि नई सेवा शुरू होने के साथ प्रदेश की सभी निजी बसें बंद हो जाएंगी। सरकार की घोषित व्यवस्था में निजी ऑपरेटरों की भूमिका खुद बनी हुई है। दूसरी तरफ ऑपरेटर नई सेवा के रूटों में अपनी भागीदारी और मौजूदा परमिट से जुड़े मुद्दों पर सरकार से बातचीत कर रहे हैं। इसी वजह से इस मामले में मंत्री समूह बनाया गया है। यानी फिलहाल तस्वीर यह है कि सरकारी निगरानी वाली नई सेवा और मौजूदा निजी बस ऑपरेटर- दोनों के बीच व्यवस्था तय करने की प्रक्रिया चल रही है।
सवाल 11: आखिर इस मॉडल में सरकार की असली भूमिका क्या होगी?

जवाब- सरकार इस बार खुद बस चलाने के बजाय पूरे सिस्टम को नियंत्रित और मॉनिटर करने की भूमिका में है। रूट तय करना, समयबद्धता पर निगरानी, तकनीकी सिस्टम, यात्री सुरक्षा, बसों की लाइव ट्रैकिंग और परिवहन ढांचे को विकसित करना सरकार की व्यवस्था का हिस्सा है। वहीं बस संचालन में निजी ऑपरेटरों की भागीदारी होगी। इस मॉडल की सबसे बड़ी परीक्षा यही होगी कि क्या सरकार कम यात्री वाले रूटों तक सेवा पहुंचा पाती है, बसें समय पर चलती हैं और निजी ऑपरेटरों के व्यावसायिक हितों तथा यात्रियों की जरूरत के बीच संतुलन बन पाता है।

MP BUS Service: 21 साल बाद लौटी बस सेवा की असली परीक्षा अब शुरू

मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सार्वजनिक बस सेवा की वापसी हो गई है, लेकिन यह पुराने राज्य परिवहन निगम की वापसी नहीं है। नई व्यवस्था में सरकार सिस्टम और निगरानी संभाल रही है, जबकि संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी है। 351 बसों से शुरू हुई यह योजना आने वाले वर्षों में 15 हजार बसों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखती है। 1,036 चिन्हित रूट, 55 जिले, GPS, CCTV, पैनिक बटन और ITMS जैसी व्यवस्थाएं इसका आधुनिक पक्ष हैं। दूसरी ओर निजी बस ऑपरेटरों के परमिट, 15 साल पुरानी बसों और रूट शेयरिंग को लेकर सवाल अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

इसलिए इस योजना की असली तस्वीर सिर्फ बसों की संख्या से नहीं, बल्कि कितने गांव जुड़े, बसें कितनी नियमित चलीं, किराया कितना व्यावहारिक रहा और निजी ऑपरेटरों के साथ विवाद कितना सुलझा- इन बातों से तय होगी।

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