UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोशल मीडिया पर राजनीतिक विचार रखने को लेकर एक मामला चर्चा में है। मामला पूजा यादव नाम की एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर से जुड़ा है। पूजा का दावा है कि वह पिछले करीब डेढ़-दो महीने से इंस्टाग्राम पर सनातन धर्म और बीजेपी के समर्थन में वीडियो पोस्ट कर रही हैं। साथ ही वह समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीति की आलोचना करने वाली पोस्ट भी करती हैं। पूजा का आरोप है कि इन वीडियो और पोस्ट के बाद उन्हें अलग-अलग नंबरों और सोशल मीडिया अकाउंट से लगातार धमकियां और अभद्र संदेश मिल रहे हैं। उनका दावा है कि कुछ लोगों ने उन्हें उनकी जाति को लेकर भी निशाना बनाया और सवाल किया कि यादव होकर वह अखिलेश यादव का विरोध क्यों कर रही हैं।
यादव हो, फिर अखिलेश का विरोध क्यों?
पूजा के मुताबिक, उन्हें फोन और मैसेज के जरिए कथित तौर पर कहा गया कि वह यादव समाज से होकर एक यादव नेता का विरोध कैसे कर सकती हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने उन्हें ‘यादव नाम पर कलंक’ तक कहा। पूजा का कहना है कि उनकी सोशल मीडिया पोस्ट का मुख्य मुद्दा सनातन धर्म और बीजेपी का समर्थन करना है। वह अपने वीडियो में सनातन धर्म के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों का विरोध करती हैं और इसी के साथ विपक्षी दलों की राजनीति पर भी अपनी राय रखती हैं। यही राजनीतिक राय अब उनके लिए परेशानी का कारण बनने का दावा किया जा रहा है।

UP News :पूजा का दावा- धमकियों में निजी जानकारी तक शामिल
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पूजा यादव ने दावा किया कि उन्हें मिलने वाली कथित धमकियों में सिर्फ राजनीतिक बहस नहीं होती, बल्कि उनके निजी जीवन से जुड़ी जानकारी तक बताई जाती है। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने उन्हें उनके घर का पता, पढ़ाई की जगह और माता-पिता से जुड़ी जानकारी बताकर डराने की कोशिश की। पूजा का दावा है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उन्होंने अपने कॉलेज से नाम तक हटाने का फैसला कर लिया। अगर किसी व्यक्ति को उसकी निजी जानकारी सार्वजनिक करने या नुकसान पहुंचाने की धमकी दी जाती है, तो यह मामला गंभीर सुरक्षा चिंता का रूप ले सकता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच का सामने आना अभी बाकी है।
रेप और जान से मारने की धमकी का भी आरोप
पूजा ने बातचीत के दौरान दावा किया कि उन्हें बेहद आपत्तिजनक और डराने वाले संदेश भेजे गए। उनके मुताबिक, उन्हें कथित तौर पर रेप, परिवार को नुकसान पहुंचाने और जान से मारने जैसी धमकियां दी गईं। पूजा का कहना है कि लगातार मिल रही ऐसी धमकियों ने उनके मन में अपनी सुरक्षा को लेकर डर पैदा किया है।हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन धमकियों के पीछे कौन लोग हैं, उनकी पहचान क्या है और क्या उनका किसी राजनीतिक दल से वास्तविक संबंध है यह जांच का विषय है।
UP News : सोशल मीडिया डीपी बनी पहचान का आधार
पूजा ने दावा किया कि उन्हें जिन कुछ नंबरों और सोशल मीडिया आईडी से कथित तौर पर धमकियां मिलीं, उनमें कुछ प्रोफाइल पर अखिलेश यादव की तस्वीर लगी हुई थी।इसी आधार पर वह इन लोगों को समाजवादी पार्टी समर्थक मानती हैं। लेकिन सिर्फ किसी नेता की तस्वीर प्रोफाइल पर लगी होने से यह निश्चित तौर पर साबित नहीं होता कि संबंधित व्यक्ति किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक सदस्य या अधिकृत प्रतिनिधि है। ऐसे मामलों में फोन नंबर, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
इंस्टाग्राम पर सनातन और बीजेपी के समर्थन में वीडियो
पूजा यादव अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सनातन धर्म और बीजेपी के समर्थन में वीडियो पोस्ट करती हैं। उनके कुछ वीडियो में वह राम और सनातन धर्म से जुड़े संदेश देती नजर आती हैं। पूजा का कहना है कि वह सनातन धर्म के खिलाफ होने वाली टिप्पणियों का विरोध करती हैं और इसी वजह से उन्होंने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शुरू किया। उनके मुताबिक, वह समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की नीतियों या राजनीति की आलोचना भी अपने वीडियो के जरिए करती हैं।
UP News : 20 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स वाला अकाउंट
पूजा के बताए सोशल मीडिया अकाउंट पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स भी नजर आते हैं। बातचीत के दौरान दिखाए गए अकाउंट पर करीब 20 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स होने की बात सामने आई। ऐसे में सोशल मीडिया पर उनके वीडियो बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रहे हैं। यही वजह है कि उनके मुताबिक, राजनीतिक विरोध भी लगातार बढ़ा है। मामला सिर्फ पूजा का नहीं, सवाल अभिव्यक्ति की आजादी का भी इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पर किसी राजनीतिक दल या नेता का समर्थन अथवा विरोध करने के कारण किसी व्यक्ति को धमकी दी जा सकती है? लोकतंत्र में राजनीतिक विचार अलग-अलग होना स्वाभाविक है। कोई बीजेपी का समर्थन कर सकता है, कोई समाजवादी पार्टी का, तो कोई किसी भी दल का समर्थन न करने का फैसला कर सकता है। इसी तरह जाति किसी व्यक्ति की राजनीतिक पसंद तय करने का आधार नहीं होनी चाहिए। पूजा यादव के मामले में भी यही सवाल सामने आता है कि अगर वह यादव हैं, तो क्या उनकी राजनीतिक पसंद भी किसी खास नेता तक सीमित होनी चाहिए?
धमकियों को लेकर बड़ा सवाल
पूजा यादव ने अपने ऊपर लगाए गए धमकियों के आरोपों को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट, फोन कॉल और कथित धमकी भरे संदेशों को इसकी वजह बताया है। हालांकि, इन धमकियों के पीछे कौन है और उनका किसी राजनीतिक दल से कितना संबंध है, यह स्वतंत्र जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर बढ़ती राजनीतिक कटुता और महिलाओं को ऑनलाइन मिल रही धमकियों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सवाल सीधा है—राजनीतिक असहमति का जवाब तर्क से दिया जाएगा या धमकी से? और क्या किसी की जाति यह तय करेगी कि उसे किस नेता का समर्थन करना है?
वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करे : यादव बेटी को सपाई दे रहें धमकियां, बिटिया ने लगाई योगी जी से गुहार!
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