Bypolls Election 2026: पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और असम की छह सीटों पर उपचुनाव के लिए 6 अक्टूबर को मतदान हो रहा है। इनमें पांच विधानसभा सीटें और असम की नगांव लोकसभा सीट शामिल है। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी।
इन छह सीटों का चुनावी गणित एक जैसा नहीं है। नंदीग्राम में BJP के सामने कांग्रेस और TMC के अलग-अलग गुटों की चुनौती है, रेजीनगर में कई दल और गुट मैदान में हैं, तमिलनाडु में TVK पहली बड़ी चुनावी परीक्षा में है, पुडुचेरी में NDA सरकार के लिए उपचुनाव अहम है और नगांव में BJP, कांग्रेस तथा AIUDF के बीच मुकाबला है। आइए सीट-दर-सीट समझते हैं पूरा समीकरण।
नंदीग्राम: BJP के सामने कांग्रेस और TMC के अलग-अलग गुट
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम सीट इस उपचुनाव की सबसे चर्चित सीटों में है। इसका राजनीतिक महत्व 2011 के उस जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़ा है, जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने में भूमिका निभाई थी। 2021 में इसी सीट से सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। 2026 के विधानसभा चुनाव में अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की। उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव की नौबत आई।
BJP ने यहां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह दिवंगत BJP नेता चंद्रनाथ रथ की मां हैं। कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है। वहीं TMC से जुड़े अलग-अलग गुट भी चुनावी मैदान में हैं। एक ओर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने मिलन प्रधान को समर्थन दिया है, जबकि दूसरे गुट ने मोहम्मद एतेशमुल हक को अलग पहचान और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतारा है। CPI ने शांतिगोपाल गिरी को उम्मीदवार बनाया है। यानी नंदीग्राम का मुकाबला सिर्फ BJP बनाम विपक्ष नहीं है। यहां विपक्षी खेमे के भीतर भी अलग-अलग राजनीतिक समीकरण दिखाई दे रहे हैं।
Bypolls Election 2026: रेजीनगर: BJP, TMC के दो गुट और कई दल आमने-सामने
मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट का समीकरण नंदीग्राम से अलग है। 2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नौदा दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। उन्होंने नौदा सीट अपने पास रखी, जिसके कारण रेजीनगर खाली हुई। उनकी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। यहां BJP ने सखराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC ने रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है। TMC से अलग गुट के उम्मीदवार सफीउज्जमान शेख भी चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफ़ी और CPI(M) के सैयद असद अली भी मुकाबले में हैं। इस तरह रेजीनगर में मुकाबला बहुकोणीय है। यहां स्थानीय राजनीतिक प्रभाव, TMC के भीतर का विभाजन और BJP की चुनौती चुनावी समीकरण के प्रमुख हिस्से हैं।
मदुरंतकम: TVK के लिए पहली बड़ी चुनावी परीक्षा
तमिलनाडु की मदुरंतकम सीट पर उपचुनाव की वजह राजनीतिक दल-बदल से जुड़ी है। यहां से चुनी गई AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल ने इस्तीफा दिया और बाद में TVK में शामिल हो गईं। अब TVK ने उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाया है। यह मुकाबला TVK, DMK, AIADMK और अन्य दलों के बीच है। DMK ने पूर्व विधायक आई. पारंथामेन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि AIADMK ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। इस सीट का एक बड़ा पहलू यह है कि यह TVK प्रमुख सी. जोसेफ विजय की पार्टी के लिए शुरुआती चुनावी परीक्षा है। विधानसभा चुनाव के बाद यह उपचुनाव TVK को जमीनी स्तर पर मिले समर्थन का एक चुनावी संकेत देगा। मदुरंतकम में 2,12,639 मतदाता 268 मतदान केंद्रों पर वोट डाल रहे हैं।
Bypolls Election 2026: धारापुरम: TVK की वापसी की कोशिश, DMK-AIADMK की चुनौती
धारापुरम में भी उपचुनाव की वजह AIADMK विधायक पी. सत्यभामा का इस्तीफा है। बाद में वह TVK में शामिल हुईं और अब TVK उम्मीदवार के तौर पर दोबारा चुनाव मैदान में हैं। यहां TVK के सामने DMK और AIADMK समेत दूसरे दलों की चुनौती है। DMK ने एस. सुगन्या को उम्मीदवार बनाया है। AIADMK ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। यानी दोनों तमिलनाडु सीटों पर एक समान राजनीतिक कहानी दिखाई देती है- AIADMK से इस्तीफा देने वाले पूर्व विधायक अब TVK के टिकट पर अपनी पुरानी सीट वापस हासिल करने मैदान में हैं। धारापुरम में 2,22,406 मतदाता 282 मतदान केंद्रों पर वोट डाल रहे हैं।
थट्टनचावडी: पुडुचेरी की NDA सरकार की परीक्षा
पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट का समीकरण भी दिलचस्प है। यह सीट मुख्यमंत्री एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई। रंगासामी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को सत्ता में आए अभी कुछ ही महीने हुए हैं, इसलिए उपचुनाव को सरकार के लिए एक अहम राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। NDA की ओर से AINRC के अशोक आनंद उम्मीदवार हैं। उन्हें BJP, AIADMK और अन्य सहयोगियों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस ने ई. विनायगम को मैदान में उतारा है और उन्हें TVK का समर्थन प्राप्त है। DMK ने के. सेधु सेल्वम को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा CPI और नाम तमिलर काची समेत अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इस सीट पर मुख्य मुकाबला NDA, कांग्रेस-समर्थित उम्मीदवार और DMK के बीच दिखाई दे रहा है।

Bypolls Election 2026: नगांव: BJP, कांग्रेस और AIUDF के बीच त्रिकोणीय मुकाबला
असम की नगांव लोकसभा सीट बाकी पांच विधानसभा सीटों से अलग है, क्योंकि यहां लोकसभा उपचुनाव हो रहा है। यह सीट कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर BJP में जाने और विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद खाली हुई। अब यहां कांग्रेस, BJP और AIUDF के बीच प्रमुख मुकाबला है। कांग्रेस ने सिबामोनी बोरा, BJP ने पूर्व IAS अधिकारी देबाशीष शर्मा और AIUDF ने बदरुद्दीन अजमल को मैदान में उतारा है।नगांव में BJP मुस्लिम बहुल सीट पर अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस के सामने अपनी पारंपरिक समर्थन वाली हिस्सेदारी को बनाए रखने की चुनौती है। AIUDF भी अपने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश में है।
नगांव लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली आठ विधानसभा सीटों में हालिया विधानसभा चुनाव में BJP ने चार, कांग्रेस ने तीन और रायजोर दल ने एक सीट जीती थी। ऐसे में लोकसभा उपचुनाव में विधानसभा स्तर के इन आंकड़ों का भी अपना महत्व है।
क्यों अहम हैं ये छह उपचुनाव?
इन छह सीटों के नतीजे किसी एक राज्य की सत्ता बदलने वाले नहीं हैं, लेकिन अलग-अलग दलों के लिए इनका राजनीतिक महत्व अलग है। पश्चिम बंगाल में ये उपचुनाव नई सरकार के शुरुआती दौर में BJP की चुनावी स्थिति और विपक्षी दलों के समीकरण को परखेंगे। तमिलनाडु में TVK के लिए ये उसके चुनावी विस्तार की शुरुआती परीक्षा हैं। पुडुचेरी में NDA सरकार के लिए अपनी स्थिति का आकलन करने का मौका है, जबकि नगांव में BJP और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ AIUDF की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

इसलिए इन छह सीटों का चुनावी गणित सिर्फ उम्मीदवारों की जीत-हार तक सीमित नहीं है। नंदीग्राम से नगांव तक हर सीट पर अलग राजनीतिक कहानी है-कहीं पार्टी बदलने से सीट खाली हुई, कहीं दो सीट जीतने के बाद एक छोड़नी पड़ी और कहीं नई राजनीतिक ताकत पहली बार अपनी जमीन परखी रही है। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। इसके बाद ही साफ होगा कि इन अलग-अलग चुनावी समीकरणों का वास्तविक नतीजा क्या रहेगा।
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