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लाओस में चीन ने क्यों बनाया नया एयरबेस? वियतनाम के करीब सैन्य ठिकाना बनाने के पीछे क्या है ड्रैगन का बड़ा प्लान?

चीन ने लाओस में बनाया नया एयरबेस
चीन ने लाओस में बनाया नया एयरबेस

China Laos Airbase: चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए लाओस में एक नया एयरबेस शुरू किया है। चीन ने अपना पहला विदेशी सैन्य बेस 2017 में हॉर्न ऑफ अफ्रीका के जिबूती में बनाया था। अब उसने लाओस में भी अपनी सैन्य गतिविधियों का विस्तार किया है। 29 सितंबर 2026 को चीन के रक्षा मंत्रालय ने लाओस के बान क्यून एयरपोर्ट पर चीन-लाओस जॉइंट सपोर्ट एंड ट्रेनिंग सेंटर और चीन-लाओस फ्रेंडशिप एविएशन एकेडमी के संचालन की घोषणा की। चीन के मुताबिक, यहां पायलटों को ट्रेनिंग दी जाएगी और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ाया जाएगा। हालांकि, रणनीतिक विशेषज्ञ इस केंद्र को इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

China Laos Airbase: लाओस के रक्षा मंत्री भी रहे मौजूद

नए केंद्र के उद्घाटन समारोह में लाओस के रक्षा मंत्री खामलींग औथाकेसन भी शामिल हुए। इस घटनाक्रम को जून में लाओस के राष्ट्रपति थोंगलून सिसोलिथ की चीन यात्रा से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वह जून में बीजिंग पहुंचे थे, जहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। इस दौरान राष्ट्रीय रक्षा सहित कई मुद्दों पर दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक बातचीत हुई थी।

वियनतियाने से 50 किलोमीटर दूर है बेस

बान क्यून एयरबेस लाओस की राजधानी वियनतियाने से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इस एयरबेस पर लगभग 2,000 मीटर लंबा रनवे, टैक्सीवे, पार्किंग एप्रन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और पांच हैंगर मौजूद हैं। यह क्षेत्र पहले अमेरिकी सैन्य और सीआईए के एयरबेस नेटवर्क का हिस्सा था और इसे लिमा साइट 44 के नाम से जाना जाता था। अब इस जगह पर चीन का नियंत्रण है।

China Laos Airbase: चीन ने बताया ट्रेनिंग और सहयोग का केंद्र

चीन का कहना है कि इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य लाओस की एयरफोर्स के पायलटों की ट्रेनिंग को बेहतर बनाना है। दोनों देश मिलकर इस केंद्र का संचालन करेंगे। चीन के अनुसार, इसका मकसद सैन्य सहयोग बढ़ाने के साथ क्षेत्र में शांति और स्थिरता को मजबूत करना है। चीन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बेस किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए नहीं बनाया गया है।

वियतनाम की बढ़ सकती है चिंता

हालांकि, तीसरे देश के खिलाफ न होने के चीन के दावे के बावजूद इस घटनाक्रम को लेकर सबसे ज्यादा चिंता वियतनाम में हो सकती है। चीन ने 1979 में वियतनाम के खिलाफ युद्ध किया था। नया एयरबेस चीन की मौजूदा दक्षिण-पश्चिमी सीमा से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण में इंडोचीन प्रायद्वीप में चीन की सैन्य मौजूदगी बढ़ाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति वियतनाम के ठीक पश्चिम में है। ऐसे में चीन इस ठिकाने के जरिए इंडोचीन क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पहुंच और प्रभाव को और गहरा कर सकता है।

China Laos Airbase: चीन का नया सैन्य एयरबेस
चीन का नया सैन्य एयरबेस
China Laos Airbase: क्या लाओस की चीन पर निर्भरता बढ़ेगी?

इस घटनाक्रम के बाद एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या लाओस की सैन्य निर्भरता चीन पर बढ़ सकती है। लाओस की एयरफोर्स आकार में छोटी है और उसके पास रूस और चीन से मिले विमान और हेलीकॉप्टर हैं। रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि चीन धीरे-धीरे लाओस को रूसी सैन्य उपकरणों से दूर करके अपने विमान और हथियारों की ओर ले जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो लाओस की सैन्य निर्भरता चीन पर बढ़ सकती है।चीन और वियतनाम के बीच पहले से ही ऐतिहासिक और रणनीतिक तनाव रहा है। ऐसे में वियतनाम के ठीक पश्चिम में चीन की नई सैन्य सुविधा की मौजूदगी उसके लिए चिंता का कारण बन सकती है।

बेस पर कौन से विमान होंगे?

चीन ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह लाओस में कितने सैन्य संसाधन, विमान या अन्य एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म तैनात करेगा और वहां कितने चीनी सैन्यकर्मी मौजूद रहेंगे। हालांकि, एक स्रोत के मुताबिक, पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स यानी पीएलएएएफ के जेएल-8 जेट ट्रेनर्स को बान क्यून की नई सुविधा में तैनात किया जा सकता है। इनके साथ उन लाओटियन के-8डब्ल्यू विमानों को भी रखा जा सकता है जिन्हें दूसरी जगह भेजा गया है।इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि बान क्यून एयरबेस तक पीएलए की पहुंच को नियंत्रित करने के लिए किस तरह के कानूनी प्रावधान और शर्तें तय की गई हैं।

China Laos Airbase: कंबोडिया के बाद लाओस क्यों अहम?

दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की सैन्य पहुंच अब केवल लाओस तक सीमित नहीं है। कंबोडिया के रीम नेवल बेस में भी चीन की मौजूदगी है। चीन और कंबोडिया ने अप्रैल 2025 में यहां जॉइंट सपोर्ट ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया था। रीम नेवल बेस के जरिए चीन को गल्फ ऑफ थाईलैंड तक पहुंच मिलती है।रिपोर्ट के अनुसार, लाओस का बान क्यून बेस चीन की सीमा के बाहर पीएलए का पहला एयरफोर्स-स्पेसिफिक बेस है। इससे पहले चीन का विदेशी सैन्य बेस जिबूती में था, जबकि कंबोडिया में चीन की नौसैनिक सुविधा मौजूद है।

अमेरिका को लेकर शी का बड़ा बयान

इस बीच, हाल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका का दौरा भी किया था। वॉशिंगटन पहुंचने के बाद उन्होंने चीन और अमेरिका के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया। शी ने कहा था कि दोनों देशों को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार बनना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि बदलती परिस्थितियों के बीच चीन और अमेरिका अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सही रास्ता खोज सकते हैं।