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लाड़ली बहना बनी सरकार की बड़ी चुनौती: CM बोले- ‘बहुत महंगी पड़ गई’, क्या बढ़ते खर्च के बीच ₹3000 का वादा होगा पूरा?

सीएम मोहन यादव
सीएम मोहन यादव

Ladli Behna Scheme: राजधानी भोपाल के रवींद्र भवन में रविवार को बुंदेली समागम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लाड़ली बहना योजना को लेकर सवाल किया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई। मुझे क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।”

मुख्यमंत्री का यह बयान भले ही मजाकिया अंदाज में आया हो, लेकिन इसके बाद सवाल उठने लगा कि आखिर सरकार के लिए लाड़ली बहना योजना इतनी ‘महंगी’ क्यों पड़ रही है? क्या योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाली राशि अब ₹3,000 नहीं होगी? योजना पर सरकार का कितना खर्च हो रहा है और इसे लेकर आगे की क्या स्थिति है? आइए समझते हैं पूरा मामला।

Ladli Behna Scheme: कितनी महंगी है लाड़ली बहना योजना?

आंकड़ों के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना मध्य प्रदेश सरकार की सबसे ज्यादा खर्च वाली योजनाओं में शामिल है। फिलहाल 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की आर्थिक सहायता दी जा रही है।13 सितंबर 2026 को योजना की 40वीं किस्त जारी की गई। इस दौरान 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 महिलाओं के बैंक खातों में ₹1,835 करोड़ से अधिक की राशि भेजी गई। मौजूदा दर के हिसाब से योजना पर सरकार का सालाना खर्च करीब ₹22,000 करोड़ है।अक्टूबर 2026 में योजना की 41वीं किस्त जारी होनी है और फिलहाल इसमें भी महिलाओं को ₹1,500 ही दिए जाने हैं।

जून 2023 से सितंबर 2026 तक योजना की 40 किस्तों के माध्यम से महिलाओं के खातों में कुल ₹65,396 करोड़ पहुंच चुके हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में लाड़ली बहना योजना के लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह राज्य के कुल ₹4.38 लाख करोड़ के बजट का करीब 5.4% है।हालांकि, योजना की घोषणा के समय इसका अनुमानित खर्च काफी कम था। फरवरी 2023 में शुरुआती गणना के मुताबिक, जब महिलाओं को हर महीने ₹1,000 देने की बात थी, तब योजना का सालाना खर्च करीब ₹12,000 करोड़ आंका गया था।

महिलाओं की जिंदगी में कितना बदलाव आया?

लाड़ली बहना योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को आर्थिक सहायता दिए जाने के बावजूद इससे उनकी जिंदगी में कितना सामाजिक और आर्थिक बदलाव आया, इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल सरकार के पास नहीं है।योजना शुरू होने के करीब साढ़े तीन साल बाद अगस्त 2026 में सरकार ने इसका सामाजिक-आर्थिक अध्ययन कराने की बात कही है। यह अध्ययन अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान यानी एआईजीजीपीए द्वारा किया जाएगा।

दूसरे राज्यों में चल रही इसी तरह की योजनाओं से कुछ संकेत जरूर मिलते हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के जुलाई 2026 के वर्किंग पेपर के मुताबिक, महाराष्ट्र में लाभार्थियों के महीने के अंत के बैंक बैलेंस में करीब 84% की बढ़ोतरी हुई और उनका मासिक खर्च 46% बढ़ा। वहीं, ओडिशा में लाभार्थियों की बचत 45% और खर्च 28% बढ़ा।

Ladli Behna Scheme: इन आदिवासी महिलाओं को नहीं मिलता लाभ

बैगा, भारिया और सहरिया जैसी विशेष पिछड़ी जनजातियों की महिलाएं लाड़ली बहना योजना में शामिल नहीं हैं। इनके लिए अलग आहार अनुदान योजना चलाई जाती है। इस योजना के तहत भी महिलाओं को हर महीने ₹1,500 दिए जाते हैं।हालांकि, संबंधित विभाग के मुताबिक बजट की कमी के कारण इस योजना का भुगतान पिछले दो महीनों से नहीं हुआ है।इसी मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए दैनिक भास्कर का वीडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट किया है।

क्या बंद हो सकती है लाड़ली बहना योजना?

फिलहाल लाड़ली बहना योजना के बंद होने की संभावना को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता देने वाली योजना को अचानक बंद करना राजनीतिक रूप से भी आसान नहीं होगा।मार्च 2025 में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार लाड़ली बहना योजना को बंद करने वाली है। उस समय उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा था कि योजना बंद नहीं होगी।

इसके बाद 27 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के मौके पर भी उन्होंने योजना को लेकर कहा था कि लाड़ली बहना सरकार के लिए भार नहीं, बल्कि उसकी ड्यूटी और जिम्मेदारी है।अगस्त 2026 में कैबिनेट ने योजना को अगले पांच साल यानी 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की राशि भी मंजूर की है।

Ladli Behna Scheme लाड़ली बहना योजना
लाड़ली बहना योजना
Ladli Behna Scheme: लाभार्थी घटे, लेकिन खर्च बढ़ गया

योजना के लाभार्थियों की संख्या में हालांकि थोड़ी कमी देखने को मिली है। सितंबर 2024 में 1.29 करोड़ महिलाओं को ₹1,574 करोड़ दिए गए थे। सितंबर 2026 में लाभार्थियों की संख्या घटकर 1.25 करोड़ रह गई, लेकिन भुगतान बढ़कर ₹1,835 करोड़ हो गया।इसका मतलब है कि करीब 4 लाख लाभार्थी कम हुए, लेकिन इसके बावजूद सरकार का मासिक खर्च करीब 17% बढ़ गया।

राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता के मुताबिक, सरकार के सामने यह योजना ‘गले की हड्डी’ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। उनका कहना है कि एक बार लोगों को हर महीने आर्थिक सहायता मिलने लगे तो किसी योजना को वापस लेना आसान नहीं होता।पॉलिटिकल एनालिस्ट एन.के. सिंह भी मानते हैं कि इस तरह की योजनाओं को बंद करना किसी भी सरकार के लिए मुश्किल होता है। अब लाभार्थी इसे किसी राजनीतिक दल की मेहरबानी नहीं, बल्कि अपना अधिकार मानने लगे हैं।

सिंह इसे ‘लॉ ऑफ डिमिनिशिंग रिटर्न’ से जोड़ते हैं। इसका अर्थ है कि एक सीमा के बाद किसी योजना में पैसा बढ़ाने से उसका फायदा उसी अनुपात में नहीं बढ़ता। ऐसे में ₹1,500 की राशि बढ़ाकर ₹3,000 करने पर राजनीतिक फायदा भी दोगुना हो, यह जरूरी नहीं है।

₹3,000 देने पर कितना बढ़ेगा खर्च?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2025 में कहा था कि संकल्प पत्र में महिलाओं को ₹3,000 देने का वादा किया गया है और सरकार इसे 2028 तक पूरा करेगी। फरवरी 2026 में विधानसभा में भी उन्होंने इस वादे को दोहराया था। मध्य प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव नवंबर 2028 में होना है।

अगर सरकार 2028 तक महिलाओं को ₹3,000 प्रति माह देने का वादा पूरा करती है, तो उसे मौजूदा खर्च के मुकाबले हर साल करीब ₹21,000 करोड़ अतिरिक्त जुटाने होंगे। फिलहाल बजट में इतनी बड़ी अतिरिक्त राशि का कोई स्पष्ट प्रावधान दिखाई नहीं देता।अगस्त 2026 में मंत्रिमंडल ने लाड़ली बहना योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला किया था। इस दौरान ₹1,14,365 करोड़ खर्च होने की बात कही गई है। यह औसतन ₹22,873 करोड़ सालाना बैठता है, जो मौजूदा ₹1,500 की राशि के आसपास है।

Ladli Behna Scheme: सरकार पैसा कहां से जुटाएगी?

योजना के लिए अतिरिक्त राशि की व्यवस्था को लेकर वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि सरकार राजस्व बढ़ाने के नए रास्ते तलाशेगी। पर्यटन जैसे क्षेत्रों से आय बढ़ाने की संभावना भी जताई गई है।वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य की अपनी कर आय में 18% बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, 2025-26 में राज्य की अपनी कर आय बजट अनुमान से 8% कम रही थी।

इसके अलावा केंद्रीय करों में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी भी 7.85% से घटकर 7.35% हो गई है।विशेषज्ञ दिनेश गुप्ता का मानना है कि ऐसी योजनाएं हर बार चुनाव जिताने की गारंटी नहीं देतीं। राशि बढ़ने के बावजूद मतदाता एंटी-इनकंबेंसी यानी सरकार के खिलाफ बने माहौल के आधार पर भी मतदान कर सकता है।उनका सवाल है कि सरकार विकास के मुद्दे पर चुनाव क्यों नहीं लड़ सकती? पांच साल काम करने का मौका मिलने के बाद भी हर चुनाव में मुफ्त योजनाओं की जरूरत क्यों पड़ती है?

क्या दूसरी योजनाओं के बजट में कटौती हुई?

लाड़ली बहना योजना पर सरकार का खर्च काफी बढ़ा है, लेकिन केवल इसी वजह से दूसरे विभागों के बजट में कटौती या बढ़ोतरी हुई है, ऐसा सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता।मध्य प्रदेश का 2026-27 का कुल बजट ₹4,38,317 करोड़ है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 11% अधिक है। ऐसे में किसी विभाग के बजट में बदलाव के पीछे केंद्र की योजनाएं, कर्मचारियों का वेतन, ब्याज और अन्य सरकारी खर्च भी जिम्मेदार होते हैं।

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, मध्य प्रदेश में सीधे खाते में पैसा देने वाली नकद हस्तांतरण योजनाओं पर खर्च 2018-19 में ₹1,735 करोड़ था। यह राशि 2025-26 के बजट में बढ़कर ₹20,821 करोड़ हो गई।लाड़ली बहना योजना ‘सामाजिक कल्याण एवं पोषण’ मद में शामिल है। इस मद पर 2022-23 में ₹11,802 करोड़ खर्च हुए थे, जबकि 2026-27 के बजट में इसके लिए ₹40,400 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यानी इस मद के बजट में करीब 242% की बढ़ोतरी हुई है।इसमें लाड़ली बहना योजना की हिस्सेदारी करीब 59% है। हालांकि, दूसरे बड़े विभागों के बजट में भी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सभी विभागों में यह बढ़ोतरी अलग-अलग स्तर पर हुई है।

Ladli Behna Scheme: सरकार का क्या कहना है?

वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा का कहना है कि सरकार के कर्ज को सिर्फ बोझ के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकार ने कर्ज लेकर उसका इस्तेमाल पूंजीगत कार्यों में किया है।उन्होंने कहा है कि राज्य की उधारी एफआरबीएम यानी सरकार के राजकोषीय घाटे और कर्ज की सीमा तय करने वाले कानून के दायरे में है। उनका कहना है कि सरकार ने कर्ज लिया है, लेकिन उस राशि को पूंजीगत कार्यों में खर्च किया गया है।

क्या दूसरी योजनाएं बंद की गईं?

अभी तक लाड़ली बहना योजना के कारण किसी दूसरी योजना को बंद किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।हालांकि, मार्च 2025 में लाड़ली बहना योजना के बजट में ₹315 करोड़ की कटौती की गई थी। इसका बजट ₹18,984 करोड़ से घटाकर ₹18,669 करोड़ कर दिया गया था।वहीं, अगस्त 2026 में सरकार ने लाड़ली बहना समेत 18 से ज्यादा योजनाओं की समीक्षा के लिए 5 अधिकारियों की कमेटी बनाई है। इस कमेटी की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

Ladli Behna Scheme: मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर की अगली कड़ी

मध्य प्रदेश सरकार का नया बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 कनाडा से भारत आ रहा है। इसका इस्तेमाल मुख्यमंत्री और दूसरे वीआईपी के लिए किया जाएगा। हालांकि, जेट के भारत आने के बाद ही इसका इस्तेमाल तुरंत शुरू नहीं हो सकेगा। न तो यह तुरंत उड़ान भर पाएगा और न ही प्रदेश के हर एयरपोर्ट पर उतर सकेगा।