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पुलिस ने रोका EC मार्च तो आकाशवाणी में बैठे राहुल-प्रियंका: कई विपक्षी नेता हिरासत में, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध तेज

विपक्ष ने चुनाव आयोग तक निकाला मार्च
विपक्ष ने चुनाव आयोग तक निकाला मार्च

Opposition EC March: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 19 विपक्षी दलों ने 6 अक्टूबर को ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च निकाला। यह मार्च नई संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक निकाला जा रहा था, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में रोक दिया। पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में लेकर बस में बैठा दिया। हालांकि, दोनों बस से उतरकर आकाशवाणी भवन के अंदर चले गए। इसके बाद राहुल और प्रियंका आकाशवाणी कैंपस में धरने पर बैठ गए और चुनाव आयोग तक जाने की मांग पर अड़े रहे।

आकाशवाणी भवन से चुनाव आयोग का कार्यालय करीब 270 मीटर की दूरी पर है। दोपहर 1 बजे तक विपक्ष के प्रदर्शन को करीब तीन घंटे हो चुके थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने विपक्षी सांसदों को तीन बार रोकने की कोशिश की। इस दौरान राहुल गांधी हाथ में तिरंगा लेकर बैरिकेड्स पर चढ़ गए। वह ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ लिखा पोस्टर भी लेकर पहुंचे थे।

Opposition EC March: अशोका रोड पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता आकाशवाणी भवन तक पहुंच गए। वहीं पुलिस ने अशोका रोड पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को हिरासत में लिया। कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि ‘वोट चोरी’ को रोकना चाहिए। प्रदर्शन के कारण अशोका रोड पर बैरिकेड्स लगाए गए और वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। पिछले पांच दिनों में दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ यह सातवां प्रदर्शन बताया गया है।

Opposition EC March: राहुल-प्रियंका धरने पर
राहुल-प्रियंका धरने पर
2 अक्टूबर से जारी है विरोध प्रदर्शन

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर से शुरू हुए हैं। पहले दिन यानी 2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में 1,100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद 3 अक्टूबर को दिल्ली में 160 लोगों को हिरासत में लिया गया और 3 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। 4 अक्टूबर को दिल्ली में इंडिया गेट से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला गया, जबकि मुंबई में हजारों लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। 5 अक्टूबर को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन जारी रहा और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ। वहीं 6 अक्टूबर को 19 विपक्षी दलों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला, जिसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल हुए।

Opposition EC March: खड़गे बोले- लोगों के अधिकार छीने जा रहे

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों के अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए लोगों के अधिकार छीन रही है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। खड़गे ने कहा कि जिस तरीके से सत्ता हासिल की गई, वह उचित नहीं था और इसे तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर देश में नौ राज्यों की विधानसभाएं भंग की जा सकती हैं, तो यहां की अवैध व्यवस्था को भी खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे पर चुप नहीं रहेगी।

अखिलेश बोले- निष्पक्ष हैं तो हमारी बात सुनें

अखिलेश यादव ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार निष्पक्ष हैं तो उन्हें विपक्ष की बात सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। अखिलेश ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों और प्रदर्शनकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए। इसी बीच राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी कैंपस में धरने पर बैठे रहे और चुनाव आयोग तक जाने की मांग पर अड़े रहे।

संसद से EC तक मार्च
संसद से EC तक मार्च
Opposition EC March: Gen-Z से जुड़ने की कोशिश में राहुल

राहुल गांधी प्रदर्शन के दौरान ‘ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो’ लिखा पोस्टर लेकर पहुंचे थे। इसे Gen-Z से सीधे जुड़ने के संदेश के तौर पर देखा गया। देश में आज हर चौथा वोटर Gen-Z वर्ग से है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में 18 से 29 साल की उम्र के वोटरों की कुल मतदाताओं में हिस्सेदारी 22.78 प्रतिशत थी।

शिवराज बोले- यह जनादेश का अपमान

शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के प्रदर्शन पर कहा कि यह जनादेश का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की चिंता नहीं, बल्कि हार की खीझ है। शिवराज सिंह के मुताबिक, विपक्ष जनता के जनादेश का अपमान कर रहा है।

Opposition EC March: विपक्ष की पांच प्रमुख मांगें

विपक्षी गठबंधन ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। विपक्ष ने मतदाता सूची में कथित दखल की जांच में सहयोग करने की भी बात कही है। दूसरी मांग मतदाता सूची में पारदर्शिता की है। विपक्ष चाहता है कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने और सुधार से जुड़ी पूरी जानकारी बूथ और विधानसभा स्तर पर सार्वजनिक की जाए। किसी वैध मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस और अपील का अवसर भी दिया जाए।

तीसरी मांग SIR और मतदाताओं के नाम हटाने को लेकर है। विपक्ष का कहना है कि SIR की वजह से बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं। इसलिए भविष्य के चुनावों में SIR से पहले वाली मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। चौथी मांग EVM की जगह बैलट पेपर से चुनाव कराने की है। साथ ही पहली बार वोट देने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आसान बनाने की मांग की गई है। पांचवीं मांग विपक्षी दलों के एकजुट रहने की है। INDIA गठबंधन के दलों से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के मुद्दे पर एकजुट रहने की अपील की गई है। विपक्ष का कहना है कि लोकतंत्र में अंतिम अधिकार जनता का होना चाहिए।

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