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योगी के यूपी का बदला कद! जेवर पहुंच रहे हैं स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति, दुनिया की नजर में आया नया यूपी

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन (Guy Parmelin)
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन (Guy Parmelin)

नोएडा: उत्तर प्रदेश के जेवर में आज स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन पहुंच रहे हैं। भारत दौरे पर आए स्विस राष्ट्रपति ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दौरा करेंगे और यहां यात्री टर्मिनल, कार्गो तथा दूसरी सुविधाओं का जायजा लिया जायगा। उनके साथ स्विट्जरलैंड का कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी है। जेवर में विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह वही एयरपोर्ट है, जो कुछ साल पहले तक एक प्रस्तावित परियोजना था और अब जमीन पर उतरकर व्यावसायिक उड़ानों का संचालन शुरू कर चुका है। 15 जून 2026 से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नियमित व्यावसायिक उड़ानें शुरू हो गई हैं। इस एक तस्वीर में उत्तर प्रदेश की बदलती कनेक्टिविटी की कहानी भी दिखाई देती है। 2017 में राज्य में सिर्फ चार कार्यशील एयरपोर्ट थे और वे करीब 25 गंतव्यों से जुड़े थे। अब योगी सरकार के मुताबिक 15 एयरपोर्ट कार्यशील हैं और 80 से ज्यादा जगहों के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। जेवर के पूरी तरह नेटवर्क में शामिल होने के बाद यह तस्वीर और बड़ी हो रही है।

जेवर एयरपोर्ट की कहानी कैसे बदली?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की योजना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं थी। जेवर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया 2017 के बाद तेज हुई। इसके विकास और संचालन के लिए ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की भारतीय सहायक कंपनी को चुना गया। परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी के मॉडल पर आगे बढ़ी। 2021 में रियायत समझौते के बाद निर्माण का रास्ता साफ हुआ और इसके बाद जेवर की जमीन पर एयरपोर्ट का निर्माण शुरू हुआ। 28 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया। इसके करीब ढाई महीने बाद 15 जून को यहां व्यावसायिक उड़ानें शुरू हो गईं। पहली निर्धारित व्यावसायिक उड़ान लखनऊ से जेवर पहुंची और इंडिगो ने यहां से परिचालन शुरू किया। यानी जेवर की कहानी अब योजना और निर्माण से आगे निकल चुकी है। यहां यात्री आ रहे हैं, विमान उड़ रहे हैं और एयरपोर्ट को आगे अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिए तैयार किया जा रहा है।
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का जेवर आना क्यों खास है?
जेवर और स्विट्जरलैंड का रिश्ता इस दौरे को और महत्वपूर्ण बनाता है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विकास ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल की भारतीय सहायक कंपनी कर रही है। इसलिए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का उसी एयरपोर्ट का दौरा दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे और कारोबारी सहयोग की एक सीधी कड़ी भी दिखाता है। गाइ पार्मेलिन की भारत यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, तकनीक, विज्ञान और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर बातचीत हुई है। ऐसे समय में जेवर एयरपोर्ट का दौरा उत्तर प्रदेश में बन रहे इस नए बुनियादी ढांचे को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में भी सामने लाता है। यहां एक और बात महत्वपूर्ण है। किसी विदेशी राष्ट्रपति का दौरा अपने आप में योगी सरकार के  लिए गर्व की बात है लेकिन जिस परियोजना में विदेशी कंपनी की भागीदारी हो, जहां व्यावसायिक उड़ानें शुरू हो चुकी हों और जिसे एक बड़े औद्योगिक क्षेत्र के साथ विकसित किया जा रहा हो, वहां ऐसे दौरे की अपनी अहमियत और बड़ी  हो जाती है।
2017 में यूपी की हवाई कनेक्टिविटी कितनी थी?
यूपी की मौजूदा तस्वीर को समझने के लिए 2017 का आंकड़ा काफी कुछ बताता है। उत्तर प्रदेश सरकार के Invest UP के अनुसार, 2017 में प्रदेश में सिर्फ चार कार्यशील एयरपोर्ट थे जिनमें शामिल थे लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और आगरा। इनसे करीब 25 गंतव्यों तक हवाई संपर्क था। इसके बाद राज्य में नए एयरपोर्ट विकसित करने और छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।योगी सरकार के अनुसार पिछले सात वर्षों में 11 एयरपोर्ट विकसित किए गए, जिनमें प्रयागराज, हिंडन, बरेली, कुशीनगर, कानपुर, अयोध्या, अलीगढ़, आजमगढ़, श्रावस्ती, चित्रकूट और मुरादाबाद शामिल हैं। अब इन्हीं सरकारी आंकड़ों में प्रदेश के 15 कार्यशील एयरपोर्ट 80 से ज्यादा गंतव्यों से जुड़े बताए गए हैं। यानी 2017 की तुलना में आज यूपी की हवाई पहुंच कई गुना बड़े नेटवर्क में बदल चुकी है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर का दिखता शानदार नजारा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर का दिखता शानदार नजारा।
योगी सरकार के दौर में नागरिक उड्डयन को मिला नया फोकस
योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में नागरिक उड्डयन को केवल लखनऊ, वाराणसी या दूसरे बड़े शहरों की सुविधा तक सीमित रखने के बजाय क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और निवेश के ढांचे से जोड़ने की नीति अपनाई गई। 2017 की उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन प्रमोशन पॉलिसी में मजबूत नागरिक उड्डयन बुनियादी ढांचा तैयार करने, नए हवाई संपर्क को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने जैसे लक्ष्य रखे गए थे। इसी दौर में केंद्र की उड़ान योजना के साथ मिलकर कई ऐसे एयरपोर्ट संचालन में आए, जहां पहले नियमित हवाई सेवा नहीं थी। प्रयागराज, कानपुर, बरेली, कुशीनगर और हिंडन जैसे एयरपोर्ट इसके उदाहरण हैं। सरकार के अपने आंकड़े बताते हैं कि इस विस्तार के साथ हवाई संपर्क 25 से बढ़कर 80 से ज्यादा गंतव्यों तक पहुंचा। इस बदलाव का महत्व इसलिए भी है क्योंकि एयरपोर्ट किसी शहर को सिर्फ हवाई यात्रा की सुविधा नहीं देता। उसके साथ पर्यटन, कारोबारी यात्रा, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी नए रास्ते खुलते हैं।
जेवर सिर्फ एयरपोर्ट नहीं, पूरा आर्थिक केंद्र बन रहा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को केवल यात्रियों के लिए एयरपोर्ट बनाने की योजना नहीं है। इसे एविएशन, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और उद्योग से जोड़कर विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एयरपोर्ट की यात्री क्षमता करीब 1.2 करोड़ यात्रियों सालाना है। आगे इसका विस्तार कई चरणों में करने की योजना है। एयरपोर्ट की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक शुरुआत घरेलू उड़ानों से हुई है और आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय परिचालन भी शुरू करने की योजना है। उत्तर प्रदेश सरकार जेवर को एक बड़े एविएशन और लॉजिस्टिक्स गेटवे के रूप में विकसित करने की योजना बता रही है। इसके आसपास कार्गो, एमआरओ, विनिर्माण, वेयरहाउसिंग और दूसरे औद्योगिक क्षेत्रों के विकास की योजना भी जुड़ी है। यानी एयरपोर्ट का असर सिर्फ रनवे के अंदर तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके आसपास का पूरा क्षेत्र आर्थिक गतिविधियों का नया केंद्र बन सकता है।
एयरपोर्ट के साथ एक्सप्रेसवे और सड़क नेटवर्क भी
बड़े एयरपोर्ट की असली उपयोगिता उसके संपर्क नेटवर्क से तय होती है। जेवर को दिल्ली-एनसीआर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के लिए सड़क कनेक्टिविटी पर भी काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में अब 22 एक्सप्रेसवे का नेटवर्क है, जिनमें 7 संचालन में और 15 निर्माणाधीन बताए गए हैं। सरकार जेवर को इसी बड़े सड़क नेटवर्क और औद्योगिक ढांचे से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका सीधा मतलब है कि जेवर को अलग-थलग एयरपोर्ट के रूप में नहीं देखा जा रहा। एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक क्षेत्र और लॉजिस्टिक्स, इन सभी को एक साथ विकसित करने की कोशिश है।
बाहर से आने वाले लोगों के लिए यूपी में क्या बदला?
यूपी में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ने का असर अब सिर्फ प्रदेश के लोगों की यात्रा तक सीमित नहीं है। अयोध्या जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्रों से लेकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक, अलग-अलग कारणों से देश-विदेश से आने वाले लोगों के लिए पहुंच के विकल्प बढ़े हैं। जेवर इस बदलाव को एक अलग स्तर पर ले जाता है। यहां विदेशी कंपनी की भागीदारी है, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का ढांचा है और आसपास बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के निवेश पोर्टल पर जेवर को ऐसे ही बड़े आर्थिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में पेश किया गया है, जहां एयर कार्गो, विनिर्माण और दूसरे उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है। इसी वजह से आज जब स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति जेवर पहुंचते हैं तो तस्वीर सिर्फ एक वीआईपी दौरे की नहीं रह जाती। यह उस बदलाव को भी सामने लाती है जिसमें यूपी का बुनियादी ढांचा अब विदेशी कारोबारी और सरकारी प्रतिनिधियों की यात्राओं से भी जुड़ रहा है।
2017 के बाद बदले यूपी की तस्वीर में जेवर क्यों खास?
2017 के आसपास यूपी में चार कार्यशील एयरपोर्ट और करीब 25 हवाई गंतव्यों की तस्वीर थी। आज सरकारी आंकड़े 15 कार्यशील एयरपोर्ट और 80 से ज्यादा गंतव्यों की बात करते हैं। इस बीच जेवर जैसी बड़ी परियोजना योजना से निकलकर निर्माण और फिर व्यावसायिक परिचालन तक पहुंच गई हैं। योगी सरकार के कार्यकाल में नागरिक उड्डयन के लिए बनाई गई नीति, नए एयरपोर्ट का विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर जोर इस विस्तार का हिस्सा रहे हैं। वहीं जेवर परियोजना में केंद्र सरकार और निजी भागीदार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि जेवर को केवल एक एयरपोर्ट की उपलब्धि के रूप में देखना पूरी कहानी नहीं होगी। यह कनेक्टिविटी से निवेश और निवेश से अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संपर्क तक पहुंचते यूपी की बड़ी तस्वीर का हिस्सा है। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का जेवर पहुंचना इसी बदली हुई तस्वीर का ताजा उदाहरण है। कुछ साल पहले जहां जेवर में एयरपोर्ट की परियोजना आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही थी, आज वहीं व्यावसायिक उड़ानें संचालित हो रही हैं, विदेशी कंपनी परियोजना से जुड़ी है और दुनिया के दूसरे देशों के शीर्ष प्रतिनिधि इसे देखने पहुंच रहे हैं। यूपी में बदलाव का आकलन किसी एक दौरे से नहीं किया जा सकता, लेकिन 2017 के चार कार्यशील एयरपोर्ट से आज के विस्तृत हवाई नेटवर्क और जेवर जैसे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तक पहुंची यात्रा यह जरूर बताती है कि प्रदेश की कनेक्टिविटी का पैमाना पिछले वर्षों में काफी बदला है। योगी सरकार के दौर में शुरू किए गए और आगे बढ़ाए गए इसी बुनियादी ढांचे का असर अब यूपी की आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान में भी दिखाई देने लगा है।

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