MP News : देश की राजनीति में इन दिनों ‘वोट चोरी’ का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है। दिल्ली से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों तक विपक्ष चुनावी प्रक्रिया, वोटर लिस्ट और SIR को लेकर सवाल उठा रहा है। इसी बीच भोपाल में भी हमने आम मतदाताओं के बीच जाकर जानने की कोशिश की कि आखिर ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर जमीन पर लोगों की राय क्या है।भोपाल की मस्जिद और चार बत्ती चौराहे के आसपास नमाज के बाद बाहर निकल रहे मुस्लिम मतदाताओं से इसी मुद्दे पर बातचीत की गई। सवाल सीधा था—अगर चुनाव में वोट की गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो क्या उन्हें इन आरोपों पर भरोसा है? और क्या उन्हें लगता है कि इस मामले में सड़क पर प्रदर्शन से आगे कानूनी लड़ाई भी होनी चाहिए?ग्राउंड पर बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर कीं। उनका कहना था कि अगर किसी पार्टी के पास वोट में गड़बड़ी के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें जनता के सामने रखने के साथ-साथ संवैधानिक संस्थाओं के सामने भी मजबूती से रखना चाहिए।यहीं से एक बड़ा सवाल भी सामने आता है—अगर वोट चोरी का आरोप इतना गंभीर है, तो फिर इसका पूरा डेटा और सबूत देश के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा?राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में कांग्रेस ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन भी किए हैं। वहीं बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक और आधारहीन बताती रही है।
EVM पर भी उठे सवाल
ग्राउंड बातचीत में EVM का मुद्दा भी सामने आया। कुछ लोगों ने सवाल किया कि मतदाता जिस उम्मीदवार के सामने बटन दबाता है, उसे यह भरोसा कैसे हो कि उसका वोट उसी उम्मीदवार को गया है?हालांकि चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक EVM के साथ VVPAT व्यवस्था मौजूद है। वोट डालने के बाद VVPAT में संबंधित उम्मीदवार की पर्ची कुछ सेकंड के लिए दिखाई देती है, जिससे मतदाता अपने वोट को सत्यापित कर सकता है। आयोग यह भी बताता है कि चुनाव से पहले EVM और VVPAT की जांच की जाती है।यानी EVM को लेकर राजनीतिक आरोप अपनी जगह हैं, लेकिन किसी तकनीकी गड़बड़ी को साबित करने के लिए ठोस सबूत और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।

MP News : बैलेट पेपर की मांग कितनी सही?
ग्राउंड पर बातचीत के दौरान बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी सुनने को मिली। कुछ लोगों का तर्क था कि बैलेट पेपर में मतदाता के सामने पूरा चुनावी तरीका ज्यादा दिखाई देता है।लेकिन यहां भी सवाल सिर्फ EVM बनाम बैलेट पेपर का नहीं है। असली सवाल चुनावी प्रक्रिया पर जनता के भरोसे का है। अगर किसी राजनीतिक दल को लगता है कि चुनाव में गड़बड़ी हुई है, तो उसे सिर्फ आरोप लगाने के बजाय यह भी बताना होगा कि कहां, कितने वोटों में और किस तरीके से गड़बड़ी हुई।
‘वोट चोरी’ पर मुस्लिम वोटरों का सवाल
भोपाल में मुस्लिम मतदाताओं से बातचीत का सबसे अहम पहलू यही रहा कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नारे के तौर पर नहीं, बल्कि अपने मतदान के अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि अगर किसी मतदाता का वोट प्रभावित होता है, तो इसका असर सिर्फ किसी एक पार्टी पर नहीं पड़ता, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ एक सवाल यह भी सामने आया कि अगर विपक्ष के पास इतने बड़े पैमाने पर वोट चोरी के सबूत हैं, तो उसे उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करना चाहिए और संबंधित संवैधानिक मंचों पर मजबूती से चुनौती देनी चाहिए।क्योंकि सड़क पर प्रदर्शन राजनीतिक दबाव बना सकता है, लेकिन किसी चुनाव को गलत साबित करने के लिए दस्तावेजी सबूत और कानूनी प्रक्रिया भी उतनी ही जरूरी है।










