Nana Patekar Death: बॉलीवुड के दिग्गज और मशहूर अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया है। पाटेकर को गोवा स्थित उनके घर पर गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। मेडिकल टीम उनकी चिकित्सा के लिए उनके घर पहुंची, लेकिन वह अचेत अवस्था में थे। इसके बाद उन्हें मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां सुबह 5:20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नाना पाटेकर ने 75 साल की उम्र में अपनी आखिरी सांस ली।
क्रिकेट ने अपना एक रोमांचक फैन खो दिया
नाना पाटेकर का भारतीय सिनेमा में बड़ा प्रभाव रहा है। उन्होंने अपने विविधतापूर्ण और उत्कृष्ट अभिनय से हिंदी सिनेमा को समृद्ध किया। इसके लिए उन्हें जनता और आलोचकों दोनों का प्यार मिला, लेकिन नाना पाटेकर का पहला प्यार सिनेमा नहीं, बल्कि क्रिकेट था। इस बात का जिक्र उन्होंने करीब 11 साल पहले दिए एक इंटरव्यू में किया था। नाना ने कहा था कि वह बचपन में अच्छे क्रिकेटर थे और ऑफ स्पिन गेंदबाजी करते थे। शिवाजी पार्क में अभ्यास करने वाले बल्लेबाजों के लिए वह गेंदबाजी करते थे। गरीबी की वजह से वह क्रिकेट में आगे नहीं बढ़ पाए। पाटेकर ने कहा था कि भारत-पाकिस्तान मैच के दौरान मैं टीवी से हटता नहीं था। उन्होंने कहा था कि क्रिकेट के प्रति रोमांच उनमें आज भी उसी स्तर का है। आज भी 10 दिन के अभ्यास के बाद मैं अच्छी गेंदबाजी कर सकता हूं। पाटेकर ने कहा था कि विराट कोहली मेरे फेवरेट क्रिकेटर हैं, और उनके जल्दी आउट होने पर मेरा खाना खाने का मन नहीं करता। नाना पाटेकर का यह इंटरव्यू इस बात का सबूत है कि उनके निधन से सिर्फ बॉलीवुड गरीब नहीं हुआ है। बल्कि, क्रिकेट ने भी अपना एक रोमांचक फैन खो दिया है।
Nana Patekar Death: फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के मुरुद में हुआ था। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता रंगमंच के रास्ते सिनेमा में आए थे। 1978 से 2026 तक एक सशक्त अभिनेता के रूप में सक्रिय रहे नाना पाटेकर के करियर की प्रमुख फिल्मों में सलाम बॉम्बे, परिंदा, तिंरगा, क्रांतिवीर, वजूद, अंकुश, खामोशी, शक्ति, राजनीति, वेलकम का नाम लिया जाता है। वह मराठी फिल्मों में भी सक्रिय रहे। नटसम्राट उनकी बेहद प्रशंसित और सफल मराठी फिल्म रही है। नाना पाटेकर को तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और चार बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
भारतीय सेना से भी रिश्ता रहा ख़ास
नाना पाटेकर का भारतीय सेना से रिश्ता काफी खास रहा है। फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में एक आर्मी मेजर का किरदार निभाने के लिए उन्होंने मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ सैन्य प्रशिक्षण लिया था। बताया जाता है कि इस किरदार को वास्तविक रूप देने के लिए उन्होंने करीब तीन साल तक ट्रेनिंग की। सैन्य प्रशिक्षण के बाद नाना पाटेकर टेरिटोरियल आर्मी का हिस्सा बने। उन्हें मानद कैप्टन के तौर पर कमीशन दिया गया था। बाद में उन्होंने मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक अपनी सेवाएं दीं और वर्ष 2013 में सेना से सेवानिवृत्त हुए।
साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान भी नाना पाटेकर का सेना के प्रति समर्पण देखने को मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस से अनुमति लेकर करीब 15 से 20 दिनों तक सेना के साथ अग्रिम इलाकों में समय बिताया था। इस दौरान वह द्रास, लेह, कुपवाड़ा और सोपोर जैसे इलाकों में पहुंचे। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि उन्होंने सेना की क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के साथ वक्त बिताया और जवानों के काम करने के तरीके को करीब से समझा। यहीं नहीं नाना पाटेकर कई मौकों पर देश और सेना के जवानों के प्रति अपने सम्मान की बात कर चुके हैं। उनका मानना रहा है कि देश के लिए हर नागरिक को अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ योगदान जरूर देना चाहिए। वर्ष 2016 में भी उन्होंने कहा था कि उनके लिए देश सबसे ऊपर है और सैनिक देश के असली हीरो हैं।
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