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पश्चिम बंगाल सरकार में मिथुन चक्रवर्ती को मिली बड़ी जिम्मेदारी, मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा

Mithun Chakraborty:

Mithun Chakraborty: पश्चिम बंगाल की राजनीति और सत्ता के गलियारों से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने दिग्गज अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को एक बड़ी और अहम जिम्मेदारी सौंपी है। सरकार की ओर से जारी आदेश के तहत उन्हें नई भूमिका के साथ कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया है। इस नई नियुक्ति के बाद राज्य सरकार के प्रशासनिक ढांचे में मिथुन चक्रवर्ती की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। उन्हें कैबिनेट रैंक का दर्जा मिलना उनके राजनीतिक कद को देखते हुए अहम माना जा रहा है।

Mithun Chakraborty: मिथुन चक्रवर्ती का सियासी सफर-

बॉलीवुड के ‘डिस्को डांसर’ मिथुन चक्रवर्ती का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। फिल्मों में आने से पहले उनका छात्र राजनीति और वामपंथी विचारधारा से जुड़ाव रहा। 1970 के दशक में फिल्मों में कदम रखने से पहले वह नक्सली आंदोलन के संपर्क में भी आए थे। हालांकि, पारिवारिक त्रासदी के बाद उन्होंने इस रास्ते से दूरी बना ली और पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट (FTII) का रुख किया। इसके बाद अभिनय की दुनिया में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

Mithun Chakraborty: ममता बनर्जी के साथ टीएमसी में एंट्री-

अभिनय की दुनिया में दशकों तक राज करने के बाद मिथुन चक्रवर्ती ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी होने के चलते साल 2014 में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उन्हें राज्यसभा भेजा। हालांकि, शारदा चिटफंड घोटाले से जुड़े विवादों के बाद उन्होंने 2016 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया और राजनीति से दूरी बना ली।

2021 में बीजेपी में शामिल होकर चौंकाया-

साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मिथुन चक्रवर्ती ने एक बार फिर राजनीति में जोरदार वापसी की। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली। इस दौरान अपने मशहूर डायलॉग्स के जरिए उन्होंने समर्थकों में खूब जोश भरा।

बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल मिथुन-

बीजेपी में शामिल होने के बाद से मिथुन चक्रवर्ती पार्टी के स्टार प्रचारकों में शामिल रहे हैं। बंगाल की राजनीति में उनका फिल्मी कद और लोकप्रियता पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

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