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‘अन्ना’ से ‘उदय शेट्टी’ तक कितने किरदार, कितने पुरस्कार? नाना पाटेकर के 5 दशक के फिल्मी सफर की पूरी कहानी

नाना पाटेकर का निधन
नाना पाटेकर का निधन

Nana Patekar Death: गुरुवार सुबह दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह गोवा के डोना पाउला स्थित अपने घर पर थे, जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया। मेडिकल टीम ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की और सीपीआर दिया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह करीब 5:20 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनकी मौत गंभीर हार्ट अटैक के कारण हुई। मौत की पूरी मेडिकल वजह पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट होने की बात कही गई है।

Nana Patekar Death: करीब पांच दशक का रहा फिल्मी सफर

नाना पाटेकर केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वह ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपने हर किरदार को अलग अंदाज दिया। उन्होंने पर्दे पर पुलिस अधिकारी, गैंगस्टर, नेता, आम आदमी और खलनायक जैसे कई तरह के किरदार निभाए। ‘परिंदा’ के अन्ना से लेकर ‘क्रांतिवीर’ के प्रताप नारायण तिलक और ‘वेलकम’ के उदय शेट्टी तक उनके कई किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए।मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ में भी उन्होंने अपने अभिनय का एक अलग रूप दिखाया। करीब पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा की करीब 55 से 60 फिल्मों में काम किया। अभिनय के अलावा वह सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। किसानों की मदद के लिए वह नाम फाउंडेशन से जुड़े और ग्रामीण इलाकों की परेशानियों को लेकर भी अपनी आवाज उठाते रहे।

नाना पाटेकर: ‘अन्ना’ से ‘नटसम्राट’ तक
नाना पाटेकर: ‘अन्ना’ से ‘नटसम्राट’ तक

 

गोवा में अचानक बिगड़ी तबीयत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाना पाटेकर पिछले कुछ समय से गोवा में रह रहे थे। गुरुवार सुबह उनके डोना पाउला स्थित घर पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें घर में बेहोशी की हालत में पाया गया। मेडिकल टीम ने तुरंत उन्हें बचाने की कोशिश शुरू की। करीब 45 मिनट तक सीपीआर और दूसरी मेडिकल प्रक्रियाओं के जरिए उन्हें बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें होश में नहीं लाया जा सका।इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की ओर से भी बताया गया कि उन्हें बचाने के लिए करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया गया था।नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आते ही हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर फैल गई। फिल्म जगत से जुड़े लोगों और कई बड़े नेताओं की ओर से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

Nana Patekar Death: ‘गमन’ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर

नाना पाटेकर का फिल्मी सफर 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से शुरू हुआ था। इससे पहले वह थिएटर से जुड़े हुए थे, जिसने उनके अभिनय को मजबूत आधार दिया। फिल्मों में आने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।1990 के दशक में वह लगातार फिल्मों में नजर आए और अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने लगे। उनकी खासियत यह थी कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा। कभी वह पुलिस अधिकारी बने, कभी गैंगस्टर और कभी आम इंसान के संघर्ष को पर्दे पर उतारा।उनके संवाद बोलने का तरीका भी उनकी पहचान बन गया। उनकी आवाज, चेहरे के भाव और संवाद अदायगी ने कई सामान्य संवादों को भी यादगार बना दिया।

Nana Patekar Death
Nana Patekar Death
‘परिंदा’ के अन्ना ने बदली पहचान

1989 में रिलीज हुई ‘परिंदा’ नाना पाटेकर के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। इसमें उन्होंने अन्ना का किरदार निभाया था। इस भूमिका में डर, क्रूरता और भावनाओं का अलग मेल देखने को मिला।नाना के अभिनय को फिल्म में काफी सराहना मिली और इस भूमिका ने उन्हें हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेताओं में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। ‘परिंदा’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर सम्मान मिला।

Nana Patekar Death: ‘क्रांतिवीर’ ने बनाया यादगार नाम

1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ नाना पाटेकर की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक रही। इसमें उन्होंने प्रताप नारायण तिलक की भूमिका निभाई। उनका किरदार अन्याय और व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होने वाले व्यक्ति का था।फिल्म में नाना ने गुस्से, दर्द और देश के लिए कुछ करने की बेचैनी को प्रभावी तरीके से पर्दे पर दिखाया। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसी के बाद ‘क्रांतिवीर’ और नाना पाटेकर का नाम एक-दूसरे से गहराई से जुड़ गया।

‘अग्निसाक्षी’ से ‘अब तक छप्पन’ तक

1996 में रिलीज हुई ‘अग्निसाक्षी’ में भी नाना पाटेकर के अभिनय की काफी तारीफ हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।इसके बाद 2004 में आई ‘अब तक छप्पन’ में उन्होंने पुलिस अधिकारी साधु आगाशे का किरदार निभाया। साधु आगाशे एक ऐसे पुलिस अफसर थे जो अपराध की दुनिया से निपटने के लिए सख्त तरीका अपनाते हैं। इस भूमिका ने नाना की गंभीर और प्रभावशाली अभिनेता वाली छवि को और मजबूत किया।

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर, ‘अन्ना’ से ‘नटसम्राट’ तक
नाना पाटेकर: ‘अन्ना’ से ‘नटसम्राट’ तक
Nana Patekar Death: ‘वेलकम’ में दिखा कॉमेडी वाला अंदाज

नाना पाटेकर को सिर्फ गंभीर और गुस्सैल किरदारों के लिए याद करना उनके अभिनय के एक बड़े हिस्से को नजरअंदाज करना होगा। 2007 में आई ‘वेलकम’ में उन्होंने उदय शेट्टी का किरदार निभाकर अपने कॉमेडी अंदाज से भी दर्शकों को खूब हंसाया।फिल्म में अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी और संवाद काफी लोकप्रिय हुए। उदय शेट्टी के कई संवाद आज भी सोशल मीडिया पर इस्तेमाल किए जाते हैं। 2015 में आई ‘वेलकम बैक’ में भी नाना ने इसी किरदार को दोबारा निभाया।

‘नटसम्राट’ में दिखा अभिनय का भावुक रूप

2016 में आई मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ नाना पाटेकर के करियर की सबसे खास फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें उन्होंने गणपतराव रामचंद्र बेलवलकर यानी अप्पा का किरदार निभाया।अप्पा एक रिटायर्ड रंगमंच कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी थिएटर को समर्पित कर दी। उम्र बढ़ने के साथ उनके परिवार और समाज के साथ रिश्ते बदलने लगते हैं। फिल्म एक कलाकार के अकेलेपन, टूटते रिश्तों और पुराने गौरव को पीछे छूटते देखने की कहानी बताती है।नाना ने इस भूमिका में गुस्सा, बेबसी, दर्द और पुराने दिनों की याद जैसे कई भावों को बेहद प्रभावी तरीके से पेश किया। उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और ‘नटसम्राट’ को उनके यादगार प्रदर्शनों में शामिल किया गया।

Nana Patekar Death: तीन राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म श्री

नाना पाटेकर को उनके अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। इनमें ‘परिंदा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और ‘अग्निसाक्षी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का सम्मान शामिल है।फिल्मफेयर पुरस्कारों में भी उन्होंने कई उपलब्धियां हासिल कीं। उन्हें ‘परिंदा’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, ‘अंगार’ के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक, ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और ‘अपहरण’ के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का पुरस्कार मिला।2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर मराठी पुरस्कारों से भी सम्मान मिला। इस तरह नाना उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने अलग-अलग अभिनय श्रेणियों में बड़े पुरस्कार अपने नाम किए।

‘क्रांतिवीर’ से ‘वेलकम’ तक नाना का सफर
‘क्रांतिवीर’ से ‘वेलकम’ तक नाना का सफर
राजनीति से क्यों बनाए रखी दूरी?

नाना पाटेकर का नाम कई बार राजनीति से भी जोड़ा गया, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति में जाने से दूरी बनाए रखी। उनका मानना था कि राजनीति उनका क्षेत्र नहीं है।वह अपनी बात खुलकर रखने के लिए जाने जाते थे। राजनीति को लेकर उनका एक चर्चित बयान था कि अगर वह किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हुए तो शायद कुछ ही दिनों में उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाएगा, क्योंकि वह वही बोलते हैं जो सोचते हैं।शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के साथ उनकी नजदीकी जरूर रही, लेकिन उन्होंने किसी राजनीतिक दल की औपचारिक सदस्यता नहीं ली। उनका मानना था कि राजनीति में जाने के बाद व्यक्ति की अपनी बात कहने की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

Nana Patekar Death: किसानों के लिए भी किया काम

अभिनय के अलावा नाना पाटेकर सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने किसानों की मदद के लिए काम किया। नाम फाउंडेशन से जुड़कर उन्होंने किसानों और उनके परिवारों के लिए मदद जुटाने की कोशिश की।किसानों की आत्महत्या और ग्रामीण क्षेत्रों की परेशानियों को लेकर भी वह कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे। इसी वजह से फिल्म इंडस्ट्री से बाहर भी उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई।

थिएटर से मिली अभिनय की पहली सीख

नाना पाटेकर का पूरा नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से पढ़ाई की और अभिनय की शुरुआत थिएटर से की।रंगमंच के अनुभव ने फिल्मों में आने से पहले उनके अभिनय को मजबूत आधार दिया। 1978 में ‘गमन’ के साथ उन्होंने फिल्मों में कदम रखा। बाद में उन्होंने निर्देशन में भी काम किया और ‘प्रहार’ जैसी फिल्म का निर्देशन किया।उनकी जिंदगी में सेना से जुड़ा एक अध्याय भी रहा। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सेना के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दीं और उन्हें मानद कैप्टन की उपाधि भी मिली।

Nana Patekar Death: आखिरी दौर तक फिल्मों से जुड़े रहे

उम्र बढ़ने के बावजूद नाना पाटेकर ने फिल्मों से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई। हाल के वर्षों में वह ‘वनवास’ और ‘हाउसफुल 5’ जैसी फिल्मों में नजर आए। ‘सुबेदार’ को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा। वह पहले की तरह लगातार फिल्मों में नजर नहीं आते थे, लेकिन अभिनय से उनका जुड़ाव बना रहा।गोवा में रहकर वह अपेक्षाकृत शांत और सादगी भरी जिंदगी जी रहे थे। निधन से कुछ दिन पहले भी वह गोवा में एक कार्यक्रम में नजर आए थे।नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि उन्होंने खुद को किसी एक छवि तक सीमित नहीं रखा। ‘परिंदा’ का अन्ना हो, ‘क्रांतिवीर’ का प्रताप नारायण तिलक, ‘अब तक छप्पन’ का साधु आगाशे या फिर ‘वेलकम’ का उदय शेट्टी, उन्होंने हर किरदार को अपनी अलग पहचान दी।वहीं ‘नटसम्राट’ ने यह भी दिखाया कि एक कलाकार उम्र के किसी भी पड़ाव पर अपने अभिनय की नई ऊंचाई हासिल कर सकता है। करीब पांच दशक तक चले उनके विविधतापूर्ण फिल्मी सफर ने उन्हें भारतीय सिनेमा के यादगार कलाकारों में शामिल किया।