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क्या फिर प्रोटेस्ट में शामिल हो सकते हैं दीपके, सौरभ और रांका? जानें पीस बॉन्ड के नियम

CJP Leaders Peace Bond:

CJP Leaders Peace Bond: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दीपके और उनके साथी सौरभ दास व आशुतोष रांका एक साल का पीस बॉन्ड भरकर रिहा हो गए हैं। रिहाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तीनों नेता दोबारा किसी धरने या विरोध प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं? क्या पीस बॉन्ड भरने के बाद कानून उन्हें प्रदर्शन करने से रोकता है? आइए, समझते हैं कि पीस बॉन्ड के नियम क्या हैं और इसका उल्लंघन करने पर क्या कार्रवाई हो सकती है।

CJP Leaders Peace Bond: क्या पीस बॉन्ड भरने के बाद प्रोटेस्ट कर सकते हैं CJP नेता-

पीस बॉन्ड भरने का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार खो देता है। अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं, बशर्ते वे अदालत की ओर से लगाई गई शर्तों का पालन करें। हालांकि, उनकी रिहाई की शर्तों और बॉन्ड में दर्ज प्रतिबंधों को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर किसी प्रदर्शन के दौरान वे शांति व्यवस्था बिगाड़ते हैं या अदालत की शर्तों का उल्लंघन करते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

CJP Leaders Peace Bond: फ्लाइट लैंड होते ही पुलिस ने लिया था हिरासत में-

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही संगठन को बड़ा झटका लगा। मुंबई से दिल्ली पहुंचे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को दिल्ली पुलिस ने फ्लाइट लैंड होते ही विमान से हिरासत में ले लिया। शनिवार रात तक हिरासत में लिए गए करीब सात हजार अन्य प्रदर्शनकारियों को छोड़ दिया गया था, लेकिन इन तीनों नेताओं को रातभर हिरासत में रखा गया। इसके बाद रविवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया।

कोर्ट की शर्तें बढ़ा सकती हैं परेशानी-

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, तीनों नेताओं को कानूनी प्रक्रिया के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। रविवार को उन्हें दिल्ली कैंट के स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया गया, जहां से उनकी रिहाई के आदेश जारी हुए। CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह के मुताबिक, अदालत ने तीनों नेताओं से 50-50 हजार रुपये के श्योरिटी बॉन्ड भरवाए और एक साल के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करवाए हैं। उन्हें एक साल तक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी गई है। साथ ही, सार्वजनिक सभाओं और अशांति फैलाने से संबंधित प्रतिबंधों का पालन करने को कहा गया है। ऐसे में तीनों नेताओं के लिए किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने से पहले बॉन्ड की वास्तविक शर्तों को समझना जरूरी होगा। केवल पीस बॉन्ड भरने के आधार पर हर तरह के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक मान लेना सही नहीं होगा।

शर्तें टूटीं तो हो सकती है दोबारा गिरफ्तारी-

पीस बॉन्ड भरने के बाद भी तीनों नेताओं को अदालत की ओर से निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। यदि वे इन शर्तों का उल्लंघन करते हैं या उनके किसी कदम से शांति भंग होने की आशंका पैदा होती है, तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन पर गिरफ्तारी अपने आप नहीं हो जाती। पुलिस की कार्रवाई मामले के तथ्यों, लागू कानून और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। इसलिए तीनों नेताओं के लिए यह जरूरी है कि वे अपने बॉन्ड में दर्ज शर्तों का पालन करें।

एसईएम के सामने क्यों भरा गया पीस बॉन्ड-

इस मामले में तीनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पीस बॉन्ड भरा है। दिल्ली जैसे पुलिस कमिश्नरेट वाले क्षेत्रों में शांति बनाए रखने से जुड़ी कुछ मजिस्ट्रेटी शक्तियां विशेष रूप से नियुक्त अधिकारियों को दी जा सकती हैं। सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था में शांति बनाए रखने से जुड़ी ऐसी प्रक्रियाएं सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के माध्यम से भी पूरी की जाती हैं। वहीं, पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में संबंधित कानूनी प्रावधानों और अधिकारों के तहत स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की भूमिका अहम हो सकती है।अब सबकी नजर इस बात पर है कि रिहाई के बाद अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका क्या कदम उठाते हैं और क्या वे आगे होने वाले CJP के विरोध प्रदर्शनों में शामिल होते हैं।

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