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दिल्ली प्रेस क्लब में पत्रकारों से धक्कामुक्की का आरोप, महिला पुलिसकर्मियों पर हमले को लेकर सवाल पूछने पर हुआ विवाद

Delhi Press Club
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Delhi Press Club: दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। खबर इंडिया (Khabar India) के पत्रकार नवीन चौहान और अभिषेक सांडिल ने आरोप लगाया कि प्रेस क्लब के अंदर उनसे धक्कामुक्की की गई, उन्हें सवाल पूछने से रोका गया और बाहर निकालने की धमकी दी गई। पत्रकारों का कहना था कि वे महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई मारपीट और उनकी वर्दी फाड़े जाने की घटना पर जवाब मांग रहे थे। उनका सवाल था कि पुलिसकर्मियों के साथ ऐसा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए या नहीं। पत्रकारों ने इस घटना को प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। वहीं, घटनास्थल पर मौजूद कुछ लोगों के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई।

महिला पुलिसकर्मियों पर हमले को लेकर पूछा सवाल

खबर इंडिया के पत्रकारों ने कहा कि उनका मुख्य सवाल महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई कथित मारपीट को लेकर था। उन्होंने पूछा कि जिन लोगों ने पुलिसकर्मियों को थप्पड़ मारे और उनकी वर्दी फाड़ी, क्या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और क्या उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए? पत्रकारों के मुताबिक, उन्होंने यह सवाल कई बार पूछा, लेकिन उन्हें इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

पत्रकारों ने कहा कि जिस महिला पुलिसकर्मी के साथ मारपीट हुई, वह भी किसी की बेटी, मां और परिवार का हिस्सा है। उसके बच्चे और परिजन भी इस घटना को देख रहे होंगे। ऐसे में इस मामले पर सवाल उठाना जरूरी है। उनका कहना था कि यदि पुलिसकर्मियों के साथ गलत हुआ है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे किसी भी विचारधारा या संगठन से जुड़े हों।

Delhi Press Club: सवाल पूछने से रोकने और धक्कामुक्की का आरोप

पत्रकार नवीन चौहान और अभिषेक सांडिल ने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंदर उन्हें घेर लिया गया। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने उन्हें धक्का दिया, उनकी कुर्सी गिराने की कोशिश की और बाहर निकलने के लिए कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हरी शर्ट पहने एक व्यक्ति ने उन्हें धक्के देते हुए बाहर निकाला और दोबारा अंदर आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

पत्रकारों का कहना था कि वे केवल अपने सवालों का जवाब चाहते थे, लेकिन इसके बजाय उन्हें रोकने और डराने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उनके माइक को नीचे करने की कोशिश कर रहे थे और उनके काम में बाधा डाल रहे थे। पत्रकारों ने यह भी कहा कि वहां मौजूद कुछ लोगों के पास पहचान पत्र नहीं थे, फिर भी वे उन्हें बाहर निकालने और धमकाने में लगे थे।

प्रेस क्लब का सदस्य होने पर भी नहीं मिली जगह

विवाद के दौरान एक पत्रकार ने खुद को प्रेस क्लब का सदस्य बताते हुए सवाल किया कि सदस्य होने के बावजूद क्या उन्हें धक्का देकर बाहर निकाला जा सकता है? उन्होंने कहा कि वह करीब 20 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं और उनका काम सवाल पूछना है। उनके अनुसार, संबंधित संगठन और उसकी प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़े लोगों को सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि पत्रकारों को उनकी पहचान पर सवाल उठाकर चुप कराना चाहिए।पत्रकारों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें पत्रकार मानने से इनकार किया और उनकी पत्रकारिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता करने के लिए किसी से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने वाले पत्रकार को सवाल पूछने का अधिकार है और उसे केवल इसलिए नहीं रोका जाना चाहिए क्योंकि उसका सवाल किसी को पसंद नहीं है।

Delhi Press Club: सौरभ दास और आशुतोष राका से जवाब मांगने का दावा

पत्रकारों ने सौरभ दास और आशुतोष राका का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने दोनों से बार-बार एक ही सवाल पूछा, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका आरोप था कि सवाल का जवाब देने के बजाय कुछ लोग उन्हें रोकने और वहां से हटाने में जुट गए।इसी दौरान पत्रकारों पर भाजपा समर्थक मीडिया होने के आरोप लगाए जाने का भी जिक्र हुआ। इस पर उन्होंने कहा कि यदि वे किसी सवाल का जवाब मांग रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वे किसी राजनीतिक दल के पक्ष में काम कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती दी कि यदि किसी को लगता है कि उन्हें भाजपा से पैसे मिलते हैं, तो उनके बैंक खाते की जांच कराई जा सकती है।पत्रकारों ने कहा कि किसी मीडिया संस्थान या पत्रकार को उसके सवालों के आधार पर किसी राजनीतिक दल का समर्थक करार देना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, पत्रकार का काम सत्ता, संगठन और संबंधित लोगों से सवाल पूछना है, न कि किसी के पक्ष में सवालों को सीमित रखना।

आंदोलन की तुलना पर भी उठाए सवाल

पत्रकारों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन को लेकर किए गए दावों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, वहां कहा गया था कि यह पिछले 80 वर्षों का सबसे बड़ा आंदोलन है। इस पर उन्होंने पूछा कि क्या इस आंदोलन को जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से भी बड़ा माना जा रहा है? क्या इसे अन्ना हजारे के आंदोलन से भी बड़ा बताया जा सकता है?पत्रकारों का कहना था कि किसी आंदोलन के बड़े होने का दावा करने पर सवाल उठाना पत्रकारिता का हिस्सा है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि कोई पत्रकार ऐसे सवाल करता है, तो उसे भाजपा का पत्रकार क्यों कहा जाता है? उनके मुताबिक, सवालों से असहमति होने पर पत्रकार को राजनीतिक पहचान देना उचित नहीं है।

Delhi Press Club: पत्रकारों ने प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का उठाया मुद्दा

पत्रकारों ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और पत्रकार भी इसी देश के नागरिक हैं। उन्होंने अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या कानून और मौलिक अधिकार पुलिसकर्मियों तथा पत्रकारों पर लागू नहीं होते?उनका कहना था कि यदि पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटना पर सवाल पूछने वाले पत्रकारों को ही निशाना बनाया जाएगा, तो स्वतंत्र पत्रकारिता कैसे संभव होगी? उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पत्रकारों को चुनकर सवाल पूछने का मौका देना चाहते हैं और केवल अपने विचारों से सहमत पत्रकारों को ही प्राथमिकता दी जा रही है।पत्रकारों ने यह भी कहा कि किसी को आंदोलन करने या अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन उसकी आजादी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन करने तक नहीं हो सकती। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में असहमति और सवालों के लिए जगह होनी चाहिए।

अंदर डर का माहौल होने का दावा

पत्रकारों ने बताया कि उन्हें और उनके साथी नवीन चौहान को प्रेस क्लब के अंदर घेर लिया गया था। उनके अनुसार, कुछ लोगों ने धक्कामुक्की की और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां मौजूद कुछ लोग खुद को प्रेस क्लब से जुड़ा बता रहे थे और इसी आधार पर उन्हें धमका रहे थे।एक पत्रकार ने कहा कि यदि उन्हें मारना ही किसी के पास एकमात्र विकल्प है, तो वे वहीं खड़े हैं और अपने सवालों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उनके साथ कुछ भी होने पर देश उनके परिवार से जवाब मांगेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि घटना के बाद उन्हें डर लग रहा था।पत्रकारों का कहना था कि वे दिल्ली पुलिस की मौजूदगी के कारण खुद को कुछ हद तक सुरक्षित महसूस कर रहे थे। उन्होंने आशंका जताई कि यदि वहां पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होते, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

Delhi Press Club: मीडिया के दूसरे लोगों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

पत्रकारों ने वहां मौजूद अन्य मीडिया कर्मियों के रवैये पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जब उन्हें सवाल पूछने से रोका जा रहा था और उनके साथ धक्कामुक्की हो रही थी, तब दूसरे पत्रकारों ने खुलकर इसका विरोध नहीं किया। उन्होंने पूछा कि जब प्रेस की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही थी, तो बाकी पत्रकारों ने उन्हें सवाल पूछने देने की मांग क्यों नहीं की।

इस बीच, वहां मौजूद कुछ मीडिया कर्मियों के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। एक महिला मीडिया कर्मी ने कहा कि वह एक पत्रकार हैं और यह तय करना उनका अधिकार है कि उन्हें किससे सवाल पूछना है। उन्होंने सवाल किया कि जब सामने वाला व्यक्ति जवाब देने के लिए तैयार है, तो दूसरे लोगों को उनके सवाल पूछने पर आपत्ति क्यों हो रही है?उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग माइक और फोन सामने लाकर जवाब देने का दबाव बना रहे थे। उनके मुताबिक, पत्रकारों को उनके सवालों के आधार पर जज किया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई पत्रकार किसी पक्ष के समर्थन में सवाल करता है, तो उसे अच्छा पत्रकार कहा जाता है, लेकिन असहज सवाल पूछने पर उसे गोदी मीडिया का हिस्सा बता दिया जाता है।

एसआईआर और प्रदर्शन को लेकर भी हुई बहस

मौके पर मौजूद एक महिला पत्रकार ने एसआईआर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि एसआईआर को गलत क्यों बताया जा रहा है और संबंधित लोग वहां किस उद्देश्य से इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली थी, तो लोग वहां क्यों जमा हुए थे।उनका आरोप था कि प्रदर्शन में शामिल कुछ लोग पुलिसकर्मियों के साथ बदतमीजी कर रहे थे और महिला पुलिसकर्मियों को आगे रखकर ऐसी स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहे थे, जिसमें महिलाओं के बीच टकराव हो। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के दौरान भी कुछ लोग विरोध कर रहे थे और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे।महिला पत्रकार ने कहा कि पत्रकारों को सवाल पूछने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और किसी को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि वे किससे सवाल कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सामने मौजूद व्यक्ति को सवाल से परेशानी नहीं है, तो दूसरे लोगों को पत्रकार के काम में बाधा नहीं डालनी चाहिए।

Delhi Press Club: खबर इंडिया के पत्रकारों ने घटना को बताया गंभीर

खबर इंडिया के पत्रकारों ने पूरी घटना को प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला बताया। उनका कहना था कि पत्रकारों का काम सवाल पूछना और जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगना है। यदि किसी सवाल से कोई असहमत है, तो उसका जवाब दिया जा सकता है, लेकिन पत्रकार को धमकाना, धक्का देना या उसकी आवाज दबाने की कोशिश करना उचित नहीं है।उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों के साथ हुई कथित मारपीट पर कार्रवाई की मांग दोहराई और सवाल किया कि पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ कदम उठाने की मांग करना गलत कैसे हो सकता है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और आम नागरिकों के अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर पत्रकारों ने सवाल पूछने से रोकने, धक्कामुक्की और धमकी देने के आरोप लगाए, वहीं दूसरी ओर मौके पर मौजूद लोगों के बीच राजनीतिक विचारधारा, प्रदर्शन और मीडिया की भूमिका को लेकर बहस होती रही। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब उपलब्ध होने पर ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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