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राहुल गांधी की याचिका में चुनाव आयोग के खिलाफ क्या मांगें? अखिलेश-तेजस्वी समेत 11 नेता याचिकाकर्ता

Rahul Gandhi Petition:

Rahul Gandhi Petition: कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी INDIA गठबंधन के 11 नेताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची से कथित तौर पर नाम हटाए जाने के मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

Rahul Gandhi Petition: CJI सूर्यकांत से मुलाकात नहीं होने पर दाखिल की याचिका-

इस मामले को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया था। विपक्षी नेताओं की योजना मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को ज्ञापन सौंपने की थी, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत आने को कहा। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने औपचारिक याचिका दाखिल करने का फैसला किया। राहुल गांधी तय समय सीमा शाम 4:30 बजे तक सुप्रीम कोर्ट नहीं पहुंच सके, इसलिए उनके वकील एस प्रसन्ना ने याचिका दाखिल की।

Rahul Gandhi Petition: INDIA गठबंधन की याचिका में क्या मांगें की गई हैं-

INDIA गठबंधन की ओर से दाखिल 124 पन्नों की याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सामने 10 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें SIR से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों की जांच कराने और पूरी प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता परखने की मांग शामिल है।

SIR से जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश करे चुनाव आयोग-

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को SIR से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज, फाइल नोटिंग, बैठक के रिकॉर्ड, समझौते और आपत्तियों का विवरण पेश करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें 24 जून 2025 को SIR शुरू करने के फैसले से संबंधित ECINET और ERONET के एक्सेस लॉग भी शामिल हैं।

SIR के फैसलों की संवैधानिक वैधता की जांच-

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि SIR से जुड़े फैसलों की संवैधानिक और कानूनी वैधता की जांच की जाए। यह भी परखा जाए कि फैसले संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुरूप लिए गए हैं या नहीं। याचिका में कहा गया है कि यदि कोई फैसला उचित कानूनी अधिकार के बिना लिया गया है, तो उसे रद्द किया जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई-

याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की प्रक्रिया में संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की गई है। इसमें आवश्यक होने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत कार्रवाई करने की मांग भी शामिल है।

चुनाव आयोग को शिकायतों पर फैसला लेने का निर्देश-

विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से चुनाव आयोग को याचिका में उठाई गई शिकायतों और संबंधित मामलों पर उचित निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की है। याचिका के मुताबिक, SIR से संबंधित चुनाव आयोग के सभी फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लिए जाने चाहिए और उनका रिकॉर्ड भी रखा जाना चाहिए।

ऑनलाइन फॉर्म-6 को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखने की मांग-

याचिका में ऑनलाइन फॉर्म-6 को निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित प्रारूप के अनुरूप रखने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियमों में विधिवत संशोधन किए बिना निर्धारित प्रारूप से अलग बदलाव नहीं किए जाने चाहिए।

स्वतंत्र समिति से SIR का ऑडिट कराने की मांग-

विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। इस समिति को SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों और उनमें किए गए संशोधनों की जांच करने की जिम्मेदारी देने की मांग की गई है। इसके अलावा, मतदाता सूची के डेटाबेस, ECINET और ERONET में हुए बदलावों का ऑडिट करने की बात भी कही गई है। याचिका में चुनाव आयोग की नीतियों, प्रक्रियाओं और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से संबंधित तकनीकी व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग भी की गई है।

हटाए गए मतदाताओं के नाम और कारण सार्वजनिक हों-

याचिका में चुनाव आयोग को SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए सभी लोगों के नाम बूथवार प्रकाशित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक मतदाता का नाम हटाने का कारण और संबंधित आंकड़ों का आयु एवं लिंग के आधार पर वर्गीकरण सार्वजनिक करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की बात भी कही है।

नोटिस और सुनवाई के बिना नाम नहीं हटाए जाएं-

विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि किसी भी मतदाता का नाम कानून के अनुसार नोटिस दिए बिना और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए। इसके अलावा, पंजाब और अन्य चुनावी राज्यों में पात्र नागरिकों को निर्धारित अंतिम तारीख तक मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की अनुमति देने की मांग की गई है।

SIR की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग-

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि मामले में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम निर्णय होने तक सभी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, इस कदम का उद्देश्य पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

अन्य जरूरी आदेश जारी करने की मांग-

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अन्य आवश्यक आदेश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है। इसका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना है।

याचिका में कौन-कौन से नेता हैं शामिल-

INDIA गठबंधन की ओर से दाखिल याचिका में कुल 11 नेताओं के नाम हैं। इनमें राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत रॉय, अखिलेश यादव, तेजस्वी प्रसाद यादव, संजय राउत, एम.ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद समीर बशीर शामिल हैं। इस मामले में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को प्रतिवादी बनाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हो सकती है सुनवाई-

सुप्रीम कोर्ट ने केस रजिस्ट्री को याचिका की प्रक्रिया सोमवार को ही पूरी करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि याचिका में कोई तकनीकी कमी होने पर उसे समय रहते दूर किया जा सके और मामले को मंगलवार, 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने होनी है। अब सबकी नजरें मंगलवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां SIR की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर अदालत के समक्ष दलीलें रखी जा सकती हैं।

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