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वाराणसी में ₹25 हजार करोड़ के गंगा-वरुणा कॉरिडोर को रफ्तार, बिहार-बंगाल तक कनेक्टिविटी होगी आसान

Ganga Varuna Corridor:

Ganga Varuna Corridor: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ट्रैफिक जाम की समस्या को कम करने और पूर्वांचल की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार की दो बड़ी परियोजनाओं पर काम तेज हो गया है। गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से वाराणसी को गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से शहर में यातायात का दबाव कम करने के साथ बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले वाहनों को भी सुविधा मिल सकती है।

Ganga Varuna Corridor: गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर पर खर्च होंगे ₹14,447 करोड़

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर वाराणसी की प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में शामिल है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, यह 46 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होगा। इस परियोजना पर करीब 14,447 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह कॉरिडोर नेशनल हाईवे-19 (NH-19) से वाराणसी की आउटर रिंग रोड तक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगा। इसके बनने से काशी विश्वनाथ मंदिर, नमो घाट, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), रामनगर किला और शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशनों तक पहुंचना आसान हो सकता है। परियोजना से हाईवे और रिंग रोड के बीच यात्रा का समय लगभग एक घंटे से घटकर 20 मिनट होने का अनुमान है। इसके अलावा, गंगा नदी पर 910 मीटर लंबा केबल ब्रिज और 1.3 किलोमीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाने की भी योजना है।

Ganga Varuna Corridor: वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर पर ₹10,998 करोड़ खर्च होने का अनुमान

वाराणसी में दूसरी बड़ी परियोजना वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर है। यह वरुणा नदी के किनारे बनाया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार, इसकी लंबाई 43 किलोमीटर होगी और इसमें छह लेन होंगी। परियोजना पर लगभग 10,998 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें करीब 935 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण के लिए निर्धारित हैं। यह कॉरिडोर नेशनल हाईवे-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा। इसका मार्ग पश्चिमपुर, काजीसराय, अयोध्यापुर और कोटवा जैसे गांवों से होकर गुजरने का प्रस्ताव है। इसके बनने से वाराणसी सिटी स्टेशन, वाराणसी एयरपोर्ट, कैंट रेलवे स्टेशन, काशी रेलवे स्टेशन और पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन तक पहुंचने में आसानी हो सकती है। परियोजना के अनुसार, NH-31 से काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा का समय लगभग 40 मिनट से घटकर 20 मिनट हो सकता है।

गंगा और वरुणा कॉरिडोर से एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी

दोनों एलिवेटेड कॉरिडोर को वाराणसी के आसपास मौजूद प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे शहर में प्रवेश किए बिना लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है।

गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ाव

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर को वाराणसी की आउटर रिंग रोड के माध्यम से गंगा एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित विस्तार से जोड़ने की योजना है। इससे पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी

वाराणसी रिंग रोड और गाजीपुर-चंदौली लिंक रोड के माध्यम से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे लखनऊ और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आने-जाने वाले वाहनों को फायदा मिलने की संभावना है।

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से जुड़ाव

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे भी इस सड़क नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रस्तावित 610 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सप्रेसवे वाराणसी को बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले मार्गों से जोड़ेगा। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर लंबी दूरी के यातायात को शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। इससे स्थानीय सड़कों पर वाहनों का दबाव घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वरुणा कॉरिडोर के लिए जमीन का सर्वे तेज

वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए जमीन की पैमाइश और सीमांकन का काम तेज किए जाने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती चरण में अयोध्यापुर, कोटवा और पश्चिमपुर जैसे गांवों में सर्वे किया जा रहा है। दोनों कॉरिडोर का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत किए जाने की योजना है। वरुणा कॉरिडोर के लिए 23 अक्टूबर तक टेंडर खुलने की जानकारी भी दी गई है। इन परियोजनाओं के निर्माण से जुड़े अलग-अलग चरणों में भूमि अधिग्रहण, निर्माण और कनेक्टिविटी की तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी।

वाराणसी में ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत-

वाराणसी में धार्मिक और पर्यटन स्थलों के कारण बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव भी यातायात संबंधी समस्याओं की एक प्रमुख वजह है। गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से लंबी दूरी के वाहनों को शहर के व्यस्त हिस्सों से बाहर वैकल्पिक रास्ते मिल सकते हैं। इससे स्थानीय यातायात को सुचारू बनाने और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और जौनपुर जैसे जिलों से आने-जाने वाले वाहनों को भी बेहतर सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। माल ढुलाई और क्षेत्रीय परिवहन को भी इन परियोजनाओं से लाभ हो सकता है।

बिहार और बंगाल तक सफर हो सकता है आसान

गंगा और वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर को वाराणसी के प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना पूर्वांचल की कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाले वाहनों को बेहतर मार्ग मिल सकते हैं। हालांकि, यात्रा समय में वास्तविक कमी और यातायात पर पड़ने वाला प्रभाव परियोजनाओं के निर्माण, कनेक्टिविटी और चालू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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