Muskan Case: मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। यह मामला मार्च 2025 में मर्चेंट नेवी से जुड़े सौरभ राजपूत की हत्या से संबंधित है। हत्या के बाद शव के टुकड़े करके नीले ड्रम में सीमेंट भरकर छिपाने का मामला सामने आया था। करीब 13 महीने चली न्यायिक प्रक्रिया में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद अदालत ने सजा पर फैसला सुनाया।
मार्च 2025 में सामने आया था हत्याकांड
सौरभ राजपूत की हत्या का मामला मार्च 2025 में सामने आया था। सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर उनकी हत्या करने का आरोप लगा। पुलिस जांच के अनुसार, हत्या के बाद शव के टुकड़े करके उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखा गया और सीमेंट से बंद कर दिया गया। ड्रम से शव बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।
Muskan Case: हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार हुए थे मुस्कान और साहिल
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान और साहिल की भूमिका की पड़ताल की। दोनों को 18-19 मार्च 2025 के दौरान हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने हत्या और सबूत मिटाने से जुड़े पहलुओं की जांच की। जांच में चाकू, ड्रम और सीमेंट की खरीद से संबंधित जानकारी के साथ अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी जुटाए गए। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
एक हजार से ज्यादा पन्नों का आरोपपत्र
पुलिस ने मामले में एक हजार से अधिक पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसमें घटना से जुड़े सामान की खरीद, आरोपियों की गतिविधियों और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया गया। अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान भी दर्ज कराए। अदालत में इन साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
Muskan Case: 126 सुनवाइयों के बाद दोषी करार
मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत में मुकदमे की सुनवाई करीब 13 महीने चली। इस दौरान कुल 126 सुनवाइयां हुईं। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या और सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया। इसके बाद अदालत ने सजा की मात्रा पर फैसला सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
अदालत ने सुनाई मृत्युदंड की सजा
14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने मामले को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध बताते हुए अधिकतम सजा देने की मांग की थी। अदालत के फैसले के साथ इस मामले की सुनवाई का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। हालांकि, मृत्युदंड के फैसले के बाद भी कानून के तहत आगे की न्यायिक प्रक्रिया का विकल्प उपलब्ध रहता है। दोनों दोषियों को उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार है और मृत्युदंड के क्रियान्वयन से पहले संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।
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