Tiranga March: भारत में नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि, इस अधिकार का इस्तेमाल किसी भी स्थान पर, किसी भी समय और किसी भी शर्त के बिना नहीं किया जा सकता। तिरंगा मार्च, रैली या सार्वजनिक सभा आयोजित करने के लिए स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करना पड़ सकता है। दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च को लेकर विवाद के बीच पुलिस की शक्तियों और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों पर चर्चा हो रही है।
संविधान में प्रदर्शन करने का अधिकार क्या है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों के तहत लोग अपनी मांगों, असहमति और शिकायतों को सार्वजनिक रूप से रख सकते हैं। हालांकि, अनुच्छेद 19(2) और 19(3) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था सहित निर्धारित आधारों पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
Tiranga March: तिरंगा मार्च के लिए अनुमति कब जरूरी होती है?
सार्वजनिक सड़क, पार्क या संवेदनशील स्थान पर मार्च अथवा सभा आयोजित करने के लिए संबंधित पुलिस या प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ सकती है। इसकी प्रक्रिया राज्य और स्थानीय नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। आवेदन में आयोजन का स्थान, तारीख, समय, प्रतिभागियों की अनुमानित संख्या और आयोजकों की जानकारी मांगी जा सकती है। अनुमति देते समय यातायात, सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं और कानून-व्यवस्था पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है।
पुलिस मार्च पर रोक कब लगा सकती है?
यदि किसी सभा से हिंसा, सार्वजनिक शांति भंग होने, यातायात बाधित होने या लोगों की सुरक्षा को तत्काल खतरा होने की आशंका हो, तो सक्षम अधिकारी कानून के तहत प्रतिबंध लगा सकते हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट, उपखंड मजिस्ट्रेट या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट लिखित आदेश जारी कर सकते हैं। यह शक्ति किसी संभावित खतरे को रोकने के लिए है और इसका इस्तेमाल कानून में निर्धारित शर्तों के अनुसार होना चाहिए।
Tiranga March: धारा 163 क्या है और कितने समय तक लागू रहती है?
BNSS की धारा 163 तत्काल उपद्रव या संभावित खतरे की स्थिति में एहतियाती आदेश जारी करने का प्रावधान है। इसके तहत किसी क्षेत्र में लोगों के एकत्र होने या कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। सामान्य रूप से ऐसा आदेश जारी होने की तारीख से अधिकतम दो महीने तक प्रभावी रहता है। राज्य सरकार कानून में निर्धारित परिस्थितियों में इसे अधिकतम छह महीने की अतिरिक्त अवधि के लिए बढ़ा सकती है। आदेश की वैधता परिस्थितियों और कानूनी शर्तों पर निर्भर करती है।
क्या शांतिपूर्ण प्रदर्शन को भी रोका जा सकता है?
प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने के बावजूद उसके स्थान, समय, मार्ग और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं। लेकिन केवल असहमति व्यक्त करने के कारण हर प्रदर्शन पर मनमाने ढंग से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ (2018) मामले में कहा था कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने की व्यवस्था होनी चाहिए और प्रतिबंध पूर्ण निषेध में नहीं बदलना चाहिए। अमित साहनी बनाम पुलिस आयुक्त (2020) मामले में भी सार्वजनिक सड़कों के अनिश्चितकालीन अवरोध और प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन पर जोर दिया गया।
Tiranga March: अनुमति नहीं मिले तो आयोजक क्या कर सकते हैं?
यदि प्रशासन मार्च की अनुमति देने से इनकार करता है, तो आयोजक लिखित आदेश और उसमें बताए गए कारणों की जानकारी मांग सकते हैं। वे वैकल्पिक स्थान या मार्ग का प्रस्ताव देकर दोबारा आवेदन कर सकते हैं। आदेश से प्रभावित व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार सक्षम प्रशासनिक अधिकारी या न्यायालय का रुख भी कर सकता है। दूसरी ओर, यदि निषेधाज्ञा लागू है, तो उसके निर्देशों का पालन करना जरूरी है। तिरंगा लेकर प्रदर्शन करने से सामान्य कानूनी प्रतिबंध समाप्त नहीं हो जाते और पुलिस की कार्रवाई भी संबंधित कानून के दायरे में होनी चाहिए।








