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तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके रिहा, कोर्ट ने क्या शर्तें रखीं?

Abhijit Dipake: हिरासत में लिए गए अभिजीत दिपके रिहा, कोर्ट ने शर्तें रखीं?

Abhijit Dipake: दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को 17 अक्टूबर 2026 को सशर्त जमानत मिल गई। दिल्ली पुलिस ने उन्हें कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित मार्च को लेकर जारी निषेधात्मक निर्देशों का पालन नहीं करने और शांति भंग की आशंका के आधार पर हिरासत में लिया था। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेशी के बाद उन्हें पीस बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा किया गया। यह मामला प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर चर्चा में है।

16 अक्टूबर को हिरासत में लिए गए थे दिपके

अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने उन्हें पहले ही नोटिस देकर मार्च नहीं निकालने को कहा था। पुलिस का कहना था कि प्रस्तावित गतिविधि से आम नागरिकों, दुकानदारों और आने-जाने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। इसके बाद दिपके को हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की गई।

Abhijit Dipake: किस कानून के तहत हुई कार्रवाई?

दिल्ली पुलिस ने दिपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की। धारा 126 शांति भंग होने की आशंका पर व्यक्ति से शांति बनाए रखने के लिए बंधपत्र लेने की प्रक्रिया से संबंधित है। वहीं, धारा 170 संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए एहतियाती गिरफ्तारी की शक्ति देती है। पुलिस ने इसी कानूनी आधार पर उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया।

कोर्ट ने जमानत के साथ क्या शर्त रखी?

विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिपके को पीस बॉन्ड भरने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, उनसे 50 हजार रुपये का बॉन्ड भरवाया गया और एक साल तक शांति तथा अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त रखी गई। पीस बॉन्ड का उद्देश्य निर्धारित अवधि में शांति भंग करने से रोकना है। यह कार्रवाई एहतियाती कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।

Abhijit Dipake: नेहा बोरा को भी लिया गया था हिरासत में

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को भी 16 अक्टूबर को पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। दोनों की हिरासत तिरंगा मार्च और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई।

तिरंगा मार्च का उद्देश्य क्या था?

CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ अभियान के तहत आयोजित किए जाने वाले मार्च को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़े विरोध-प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा था। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया का बचाव किया है। दिपके की रिहाई के बाद भी इस मामले में पुलिस की एहतियाती कार्रवाई और प्रदर्शन की शर्तें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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