Samajwadi Party: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में समाजवादी पार्टी ने जिला संगठन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत पूरी जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। कन्नौज से सपा प्रमुख अखिलेश यादव सांसद हैं, इसलिए पार्टी के इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि हाल ही में आयोजित पीडीए सम्मेलन में कम भीड़ जुटने और संगठन के भीतर गुटबाजी सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में कार्रवाई की वजह स्पष्ट नहीं की है।
Samajwadi Party: पीडीए सम्मेलन में खाली दिखीं कुर्सियां
मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार को कन्नौज स्थित समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में पीडीए सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान मंच पर नेताओं की अच्छी-खासी भीड़ दिखाई दी, लेकिन पंडाल में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली पड़ी थीं। सम्मेलन में लोगों की कम मौजूदगी को संगठन की कमजोरी से जोड़कर देखा जा रहा है।बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष दो घंटे से अधिक समय तक मौजूद रहे। इस दौरान उन्हें पार्टी के नेताओं के बीच गुटबाजी और मंच पर बैठने को लेकर खींचतान भी देखने को मिली। संगठन के कामकाज में सुस्ती और आपसी मतभेदों का असर सम्मेलन में भी दिखाई दिया। इन परिस्थितियों से प्रदेश अध्यक्ष नाराज बताए जा रहे हैं।

जिलाध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय पदाधिकारियों तक पर कार्रवाई
रविवार शाम प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल का पत्र कन्नौज के पार्टी नेताओं तक पहुंचा, जिसके बाद संगठन में हलचल मच गई। इस पत्र के जरिए जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया।इसके साथ ही जिले के सभी फ्रंटल संगठनों के जिलाध्यक्षों, उनकी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी पद से हटा दिया गया है। कार्रवाई का दायरा केवल जिला संगठन तक सीमित नहीं रहा। कन्नौज से जुड़े समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों के साथ-साथ फ्रंटल संगठनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी इस फैसले में शामिल किया गया है।हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष के पत्र में कार्यकारिणी भंग करने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। इसके बावजूद पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि शनिवार के पीडीए सम्मेलन में खाली कुर्सियों और नेताओं के बीच गुटबाजी ने इस फैसले में अहम भूमिका निभाई।
Samajwadi Party: संगठन में गुटबाजी और निष्क्रियता की शिकायतें
कन्नौज की पहचान इत्र के कारोबार के साथ-साथ अखिलेश यादव के राजनीतिक गढ़ के रूप में भी है। जिले में समाजवादी पार्टी के कई नेता जिला स्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय संगठन तक में पदों पर हैं। इसके बावजूद पिछले कुछ समय से संगठन के भीतर गुटबाजी और पार्टी पदाधिकारियों की निष्क्रियता की शिकायतें सामने आ रही थीं।बताया जा रहा है कि इन समस्याओं की जानकारी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और दूसरे वरिष्ठ नेताओं तक भी पहुंच रही थी। इसी बीच जिला कार्यालय में आयोजित पीडीए सम्मेलन में कम भीड़ और नेताओं के बीच मतभेद सामने आने से संगठन की स्थिति पर सवाल उठने लगे।पार्टी प्रमुख ने विशेष मतदाता सूची के संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं से बूथों पर सक्रिय रहने की अपील भी की थी। ऐसे समय में सम्मेलन में कम लोगों की मौजूदगी को संगठन के लिए एक बड़ी चुनौती के तौर पर देखा गया।

विधानसभा चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए समाजवादी पार्टी अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है। कन्नौज में पूरी कार्यकारिणी भंग करने के फैसले को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी देना चाहता है, जो जनता के बीच सक्रिय रहें, लोगों को पार्टी की नीतियों और एजेंडे के बारे में बताएं और संगठन का जनाधार बढ़ाने में मदद करें।कन्नौज में पीडीए सम्मेलन के दौरान खाली पड़ी कुर्सियों को पार्टी के लिए एक संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक तौर पर यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि संगठन जनता के बीच सक्रिय नहीं रहता है, तो इसका असर पार्टी के वोट बैंक पर पड़ सकता है।अब कन्नौज में नई कार्यकारिणी के गठन की तैयारी की जाएगी। इसमें किन नेताओं को जगह मिलती है और संगठन की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
Samajwadi Party: टिकट के दावेदारों की बढ़ी चिंता
कार्यकारिणी भंग होने के बाद कन्नौज में समाजवादी पार्टी से विधानसभा चुनाव का टिकट पाने की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं की चिंता भी बढ़ गई है। संगठन में हुए इस बड़े बदलाव के बाद दावेदारों के सामने सवाल है कि आगामी चुनाव में पार्टी किसे उम्मीदवार बनाएगी और नए संगठन में किन नेताओं को अहमियत मिलेगी।फिलहाल पार्टी के अगले कदम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। नई कार्यकारिणी के गठन और उसमें शामिल होने वाले नेताओं के नाम सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।
अखिलेश यादव की रणनीति पर भी नजर
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव की रणनीति को लेकर भी चर्चा हो रही है। इससे पहले खबरें सामने आई थीं कि समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक लाल रंग के साथ नीले रंग को भी अपनी राजनीतिक पहचान में जगह दे सकती है।ऐसे में कन्नौज में संगठन को भंग करने के फैसले को पार्टी की चुनावी तैयारियों और संगठनात्मक बदलावों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, इस कार्रवाई के पीछे की आधिकारिक वजह प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में नहीं बताई है।
ये भी पढ़ें… फ्रांस में क्यों भड़का जनता का गुस्सा? सड़कों पर हिंसा, दुकानों में लूटपाट, राष्ट्रपति ने दी सख्त चेतावनी








