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NEET पेपर लीक: कोचिंग सेंटर के बाहर चायवाला बिछाता था जाल, 4.5 लाख में बेचता था पेपर

NEET paper leak:

NEET paper leak: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुणे में एक मशहूर कोचिंग सेंटर के बाहर चाय की दुकान चलाने वाला शख्स कथित तौर पर छात्रों को परीक्षा का पेपर दिलाने का झांसा देकर उनसे लाखों रुपये वसूल रहा था। जांच के मुताबिक, आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी ने प्रत्येक छात्र से 4.5 लाख रुपये में पेपर उपलब्ध कराने का वादा किया था। इस मामले की कड़ियां नासिक में पकड़े गए करियर काउंसलर शुभम खैरनार और नांदेड़ की एक एजुकेशनल कंसल्टेंसी से भी जुड़ी मिली हैं।

NEET paper leak: सीबीआई की चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे

सीबीआई ने शेषराव सूर्यवंशी को इस मामले में 14वें आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया था। अब उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच में सामने आया कि पुणे में ‘मलाक चहा’ नाम की दुकान चलाने वाला सूर्यवंशी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को निशाना बनाता था। आरोप है कि वह छात्रों की परीक्षा को लेकर होने वाली बातचीत सुनकर उनसे संपर्क करता और अपने एक डॉक्टर दोस्त के जरिए प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता था। इस तरह छात्रों को अपने जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूलने की साजिश रची गई।

NEET paper leak: ऐसे छात्रों को अपने जाल में फंसाता था चायवाला

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कथित साजिश अप्रैल 2026 में शुरू हुई। पुणे के एक कोचिंग सेंटर के बाहर दो NEET अभ्यर्थी चाय की दुकान पर बैठकर परीक्षा की मुश्किलों पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान सूर्यवंशी ने उनकी बातें सुनीं और उनके पास पहुंच गया। आरोप है कि उसने छात्रों को बताया कि उसका एक दोस्त डॉक्टर है, जो उन्हें सीधे परीक्षा का पेपर उपलब्ध करा सकता है। इसके बदले उसने प्रत्येक छात्र से 4.5 लाख रुपये मांगे। डील तय होने के बाद 28 अप्रैल को सूर्यवंशी दोनों छात्रों समेत कुल 10 अभ्यर्थियों को नासिक के पंचक गांव स्थित एक सुनसान मकान में ले गया। बताया गया कि छात्रों के पैसे दिए बिना भागने की आशंका को देखते हुए सूर्यवंशी ने उनके मूल प्रमाणपत्र और जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए। इन दस्तावेजों को कथित तौर पर सिक्योरिटी के तौर पर जब्त किया गया था।

चार दिन तक मकान में बंद रखे गए छात्र

सीबीआई की जांच में सामने आया कि करियर काउंसलर शुभम खैरनार ने नांदेड़ के कंसल्टेंट नागेश दांडे के माध्यम से पंचक गांव में एक किराने की दुकान के मालिक का खाली मकान चार दिनों के लिए किराए पर लिया था। जांच के मुताबिक, खैरनार ने दांडे को बायोलॉजी और केमिस्ट्री के 550 से अधिक सवालों वाली कई PDF फाइलें भेजीं। इन सवालों के आठ सेट प्रिंट कराए गए थे। इसके बाद दांडे ने छात्रों के सामने खुद को डॉक्टर बताकर उन्हें प्रश्नपत्र सौंपे। आरोप है कि सूर्यवंशी ने प्रश्नपत्र हाथ में लिए छात्रों की तस्वीरें अपने मोबाइल से खींचीं। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इन तस्वीरों का इस्तेमाल बाद में छात्रों पर दबाव बनाने और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किया जा सकता था।

छात्रों को रटवाए गए सवालों के जवाब

जांच के अनुसार, छात्रों को 28 अप्रैल से 2 मई तक उसी मकान में रखा गया। इस दौरान उन्हें प्रश्नों के उत्तर याद करवाए गए। 2 मई को जब छात्रों को वहां से जाने दिया गया, तो उनसे प्रश्नपत्र वापस ले लिए गए। हालांकि, एक छात्र ने कथित तौर पर चुपके से अपने मोबाइल फोन से सभी सवालों को स्कैन कर लिया। यह कदम आगे की जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकता था, क्योंकि इससे प्रश्नों से संबंधित डिजिटल जानकारी सुरक्षित रह गई।

मां ने गहने गिरवी रखकर चुकाए 3 लाख रुपये

NEET परीक्षा 3 मई को समाप्त होने के बाद सूर्यवंशी ने कथित तौर पर छात्रों पर पैसे देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसने एक छात्र से अपनी चाय की दुकान पर तीन लाख रुपये नकद मांगे। छात्र की मां ने घर के सोने के गहने गिरवी रखकर रकम जुटाई और सूर्यवंशी को नकद पैसे सौंप दिए। वहीं, एक अन्य छात्र से भी पैसे वसूलने की कोशिश की गई, लेकिन उसने समय मांगकर भुगतान टाल दिया। इस मामले में छात्रों और उनके परिवारों पर कथित तौर पर आर्थिक दबाव बनाए जाने की बात भी सामने आई है।

मोबाइल फोन से मिला अहम डिजिटल सबूत

सीबीआई ने 2 सितंबर को सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसके मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की गई। जांच के दौरान फोन में 30 अप्रैल की एक छात्रा की तस्वीर मिली, जिसमें वह हाथ में लीक प्रश्नपत्र की फोटोकॉपी लिए दिखाई दे रही थी। इस तस्वीर को मामले में अहम डिजिटल सबूत माना गया। जांच के मुताबिक, इससे छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की कथित साजिश की कड़ियों को जोड़ने में मदद मिली।

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में आगे क्या

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई की चार्जशीट ने कथित नेटवर्क की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। जांच में पुणे के चायवाले से लेकर नासिक के करियर काउंसलर और नांदेड़ के कंसल्टेंट तक की कड़ियां सामने आई हैं। छात्रों को प्रश्नपत्र देने के बदले लाखों रुपये मांगने, उनके दस्तावेज अपने पास रखने और कथित तौर पर एक मकान में चार दिनों तक रोकने जैसे आरोप इस मामले को गंभीर बनाते हैं। सीबीआई की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

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