Delhi Protest: विजयदशमी (दशहरे) के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन की परंपरा चली आ रही है।असत्य पर सत्य की विजय का उल्लास मनाते हुए लोग बुराइयों को जलाते हैं। राजधानी दिल्ली में कुछ रामलीला कमेटियां इस अवसर पर समाज में व्याप्त समसामयिक बुराइयों, आतंकवाद या कुख्यात अपराधियों के प्रति आक्रोश व्यक्त करते हुए उनके पुतले भी जलाती आ रही हैं। उनका सीधा संदेश होता है कि बुराई किसी भी रूप में आए, समाज उसका विरोध करेगा। यह एक अच्छी परंपरा है।यह हमें समरण कराती है कि रात कितनी भी अँधेरी क्यों न हो, सवेरा अवश्य होगा। अंधकार कभी यह अहंकार न करे कि वह प्रकाश को निगल सकता है।एक छोटा सा दीपक भी भयंकर अंधेरे का अस्तित्व मिटा देता है।
जलाए जाते रहे बुराइयों के पुतले
एक बार दिल्ली में “बुराई और आतंक के प्रतीक” कुख्यात चन्दन तस्कर वीरप्पन का पुतला भी फूँका गया था।दिल्ली की कुछ रामलीला समितियों द्वारा रावण के पुतले के साथ आतंकवाद जैसी बुराइयों के पुतले भी जलाए जाते रहे हैं।इसका यह संदेश होता है कि समाज से बुराइयों का समूल नाश हो। इस बार दिल्ली की श्री केशव रामलीला समिति पीतमपुरा ने गंदगी के प्रतीक के रूप में 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी रावण के साथ फूंकने का निर्णय लिया है। आयोजक इसे पूरी तरह गैर-राजनीतिक और केवल सफाई से जुड़ा बता रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक कॉकरोच को गंदगी, मैल और अस्वच्छता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इसका पुतला जलाया जा रहा है, लेकिन चूँकि इस बार संयोग से पुतला दहन का समय ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध- प्रदर्शनों के साथ पड़ रहा है, इसलिए सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं। आम जनता के बीच भी यही चर्चाएं हो रही हैं कि ‘कॉकरोच’ के पुतले के तौर पर CJP की उन अराजक गतिविधियों के प्रति आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है, जिनके कारण दिल्ली का वातावरण अशांत हुआ है।
Delhi Protest: बुराई पर अच्छाई की विजय
हालांकि कॉकरोच का पुतला जलाये जाने को लेकर आयोजकों और इसे राजनीतिक नजरिये से देखने वाले लोगों के अपने-अपने विचार हैं, अपनी-अपनी भावनाएं हैं, लेकिन फिर भी आम लोगों के बीच यही संदेश जाता दिखाई दे रहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने दिल्ली में अपने प्रदर्शनों के जरिये अराजकता का जो माहौल बनाया, उसी के चलते इस बार कॉकरोच का पुतला जलाया जा रहा है।यदि वाकई ऐसा है, तो कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं को इसे गंभीरता से लेना होगा। सवाल सिर्फ सीजेपी का नहीं है, बल्कि किसी भी संगठन की यही कोशिश रहनी चाहिए कि जनता के बीच उसकी छवि रावण की नहीं, बल्कि राम की बनी रहे।यही बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक ‘विजयदशमी’ का संदेश है।
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