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India-NZ FTA: भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील से क्या-क्या बदल जाएगा? जानें आम आदमी को फायदे

India-NZ FTA:

India-NZ FTA: भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके तहत न्यूजीलैंड भारतीय निर्यात पर 100 फीसदी टैरिफ छूट देगा। साथ ही, अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश में मदद करने का वादा किया गया है। इस समझौते से भारतीय कारोबारियों, किसानों और कुशल पेशेवरों को फायदा मिलने की उम्मीद है। वहीं, न्यूजीलैंड से आने वाले सेब और कीवी जैसे उत्पादों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

India-NZ FTA: भारतीय एक्सपोर्ट को मिलेगा 100% ड्यूटी-फ्री बाजार

भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिलने की उम्मीद है। FTA लागू होने के बाद भारत के सभी निर्यात उत्पादों को न्यूजीलैंड में शून्य आयात शुल्क पर बाजार उपलब्ध होगा। इससे भारतीय कंपनियों के लिए न्यूजीलैंड में अपने उत्पाद बेचना आसान हो सकता है। भारतीय सामान वहां दूसरे देशों के उत्पादों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं। इससे निर्यात बढ़ने और भारतीय कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

India-NZ FTA: भारत में आएगा 20 अरब डॉलर का निवेश

भारत-न्यूजीलैंड समझौते के तहत अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश में मदद करने का वादा किया गया है। इस निवेश से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। निवेश बढ़ने से भारत में कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके अलावा, अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। हालांकि, निवेश का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले वर्षों में कितनी परियोजनाएं शुरू होती हैं और उनमें कितना निवेश आता है।

5,000 भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खुलेगा न्यूजीलैंड का रास्ता

इस समझौते में भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए भी खास प्रावधान किया गया है। इसके तहत टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा के लिए 5,000 का कोटा तय किया गया है। इस व्यवस्था के तहत पात्र भारतीय पेशेवर न्यूजीलैंड में तीन साल तक रह सकेंगे। इससे योग्य भारतीयों को विदेश में काम करने के नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, वीजा के लिए संबंधित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। दोनों देशों ने अगले पांच साल में आपसी कारोबार को दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा है। इसके लिए इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (ITPO) न्यूजीलैंड में अपना कार्यालय खोलने की योजना बना रहा है, जिससे व्यापारिक संपर्क और निर्यात को बढ़ावा मिल सके।

डेयरी, प्याज और चीनी जैसे क्षेत्रों को सुरक्षा

भारत ने इस समझौते में अपने कुछ संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को सुरक्षा दी है। डेयरी उत्पादों, प्याज, बादाम और चीनी जैसे उत्पादों पर न्यूजीलैंड को टैरिफ छूट नहीं दी गई है। इसका उद्देश्य घरेलू किसानों और संबंधित उद्योगों के हितों की रक्षा करना है। अगर इन उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी छूट दी जाती, तो विदेशी उत्पादों से प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती थी। ऐसे में इन क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखकर भारत ने घरेलू बाजार के महत्वपूर्ण हिस्सों को सुरक्षा देने की कोशिश की है। इसके अलावा, न्यूजीलैंड ने भारतीय किसानों की मदद के लिए कृषि उत्पादकता बढ़ाने से जुड़ी साझेदारी का भरोसा भी दिया है।

भारत में कितने सस्ते हो सकते हैं न्यूजीलैंड के सेब

भारत-न्यूजीलैंड FTA के तहत न्यूजीलैंड से आने वाले सेबों पर विशेष आयात व्यवस्था लागू होगी। इन सेबों पर 25 फीसदी आयात शुल्क रहेगा और इनके लिए आयात की मात्रा भी निर्धारित की गई है। समझौते के अनुसार, दूसरे साल में सेबों का आयात कोटा 35,000 मीट्रिक टन और छठे साल से 45,000 मीट्रिक टन होगा। सेबों के आयात के लिए हर साल 1 अप्रैल से 31 अगस्त तक की अवधि तय की गई है। इसका मतलब है कि न्यूजीलैंड के सेब भारत में पूरी तरह ड्यूटी-फ्री नहीं होंगे। उनकी कीमतों पर असर आयात शुल्क, परिवहन लागत, मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए आम आदमी को सेब कितने सस्ते मिलेंगे, यह अभी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

कीवी फल पर मिलेगी जीरो ड्यूटी की सुविधा

इस ट्रेड डील के तहत न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी फल के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। 1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम से अधिक कीमत वाले कीवी फल को निर्धारित शर्तों और कोटे के तहत शून्य आयात शुल्क पर लाने की सुविधा मिलेगी। इसके लिए दूसरे साल में आयात कोटा 8,000 मीट्रिक टन और छठे साल से 15,000 मीट्रिक टन होगा। कीवी फल के आयात की अवधि हर साल 1 अप्रैल से 15 अक्टूबर तक रहेगी। इस व्यवस्था से भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड के कीवी की उपलब्धता बढ़ सकती है। हालांकि, ग्राहकों को इसका सीधा फायदा कितना मिलेगा, यह आयात लागत, आपूर्ति और खुदरा विक्रेताओं की कीमतों पर निर्भर करेगा।

मनुका शहद और एल्ब्यूमिन के आयात पर क्या होगा

समझौते में न्यूजीलैंड से आने वाले कुछ अन्य उत्पादों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। एल्ब्यूमिन पर 11 फीसदी आयात शुल्क लागू रहेगा। इसके आयात का कोटा दूसरे साल में 1,500 मीट्रिक टन से बढ़कर पांचवें साल में 3,000 मीट्रिक टन हो जाएगा। वहीं, प्रमाणित मनुका शहद के लिए न्यूनतम आयात कीमत 30 डॉलर प्रति किलोग्राम तय की गई है। इसके लिए पहले साल में 40 मीट्रिक टन और दूसरे साल से 200 मीट्रिक टन का कोटा निर्धारित किया गया है। इन उत्पादों के आयात के लिए पूरे साल की अवधि उपलब्ध होगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत-न्यूजीलैंड कारोबार में पहले ही 49% की बढ़ोतरी

भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंध पहले से मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का कारोबार 1.3 अरब डॉलर रहा। इसमें पिछले साल के मुकाबले 49 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अब नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। भारत के निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को कुछ आयातित उत्पादों की उपलब्धता में बढ़ोतरी का लाभ मिल सकता है।

आम आदमी के लिए क्या है इस डील का मतलब

भारत-न्यूजीलैंड FTA का असर केवल बड़ी कंपनियों और कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रोजगार के अवसरों, भारतीय निर्यात, कृषि क्षेत्र और आयातित उत्पादों के बाजार पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, हर उत्पाद की कीमत में कमी आना जरूरी नहीं है। सेब, कीवी और दूसरे सामानों की कीमतें आयात शुल्क के साथ-साथ परिवहन लागत, आपूर्ति और बाजार की मांग पर भी निर्भर करेंगी। कुल मिलाकर, इस समझौते का उद्देश्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार बढ़ाना, निवेश के नए अवसर पैदा करना और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करना है। आने वाले वर्षों में इसके वास्तविक फायदे इस बात से स्पष्ट होंगे कि व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में कितनी प्रगति होती है।

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