CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी है। इसके चलते दोनों को अभी कम से कम दो दिन और तिहाड़ जेल में रहना होगा। दोनों को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से प्रवेश करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
CJP Protest: कोर्ट ने दो दिन और बढ़ाई न्यायिक हिरासत-
आशुतोष रांका और सौरव दास को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सोमवार को उनकी हिरासत की अवधि समाप्त हो रही थी। इसके बाद दोनों को दोपहर करीब दो बजे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी। ऐसे में दोनों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
CJP Protest: CJP की लीगल हेड ने की थी रिहाई की मांग-
कोर्ट में पेशी से पहले CJP की लीगल हेड और वकील रत्ना सिंह ने दोनों नेताओं की रिहाई की मांग की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि न्यायिक हिरासत बढ़ाने का कोई उचित कारण नहीं है। उन्होंने आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद CJP ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
CJP बोली- अदालत में चल रहा था मजाक-
आशुतोष रांका और सौरव दास को जमानत नहीं मिलने पर रत्ना सिंह ने नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले छह दिनों से दोनों की रिहाई के मामले में अलग-अलग कारण बताकर अड़चनें पैदा की जा रही हैं। रत्ना सिंह के मुताबिक, कभी जमानत के लिए पेश किए गए श्योरिटी के सत्यापन का मुद्दा उठाया जाता है, तो कभी श्योरिटी के खिलाफ दर्ज FIR का हवाला दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह दोनों की आजादी छीनी जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुनवाई दोपहर दो बजे होनी थी, लेकिन यह करीब तीन से साढ़े तीन बजे के बीच शुरू हुई और लगभग एक घंटे तक चली। उनके अनुसार, बचाव पक्ष के वकीलों ने कानूनी बिंदुओं पर दलीलें दीं, जबकि दूसरी तरफ से ऐसा कोई ठोस तर्क नहीं दिया गया, जिससे न्यायिक हिरासत बढ़ाने की जरूरत साबित हो सके।
फैसले को चुनौती देने की तैयारी-
रत्ना सिंह ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के फैसले को चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों को अस्पष्ट कारणों के आधार पर हिरासत में रखा जा रहा है। उन्होंने इसे मानसिक प्रताड़ना और आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। रत्ना सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में कानूनी कदम उठाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार या प्रशासन हर किसी की आवाज को दबा नहीं सकता।
13 अक्टूबर को हुई थी गिरफ्तारी-
आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से प्रवेश करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, आशुतोष रांका, सौरव दास और CJP के कुछ कार्यकर्ता जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर निजी परिसर के रास्ते पहुंचे थे। पुलिस ने कानून के बार-बार उल्लंघन और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा होने की आशंका का हवाला देते हुए न्यायिक हिरासत की मांग की थी।
CJP के कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को मिली थी राहत-
इस मामले में CJP के कार्यकर्ता अजिंक्य शिंदे को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। उन्हें छह महीने तक शांति और सदाचार बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं, आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने के बाद उनकी रिहाई के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी।
यह भी पढ़े- शुभेंदु अधिकारी ने क्यों कहा कि भारत में बांग्लादेश जैसी अशांति फैलाना चाहते हैं कम्युनिस्ट?








