Home » एक्सप्लनेर » कौन थे अशोक सिंघल? राम जन्मभूमि आंदोलन में निभाई बड़ी भूमिका, RSS से VHP तक ऐसा रहा सफर

कौन थे अशोक सिंघल? राम जन्मभूमि आंदोलन में निभाई बड़ी भूमिका, RSS से VHP तक ऐसा रहा सफर

Ashok Singhal: 27 सितंबर 1926 को जन्मे अशोक सिंघल लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख चेहरों में रहे। राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। जानिए उनके जीवन, RSS से जुड़ाव और अयोध्या आंदोलन तक की पूरी कहानी।

अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की कहानी कई संगठनों, नेताओं और संतों से जुड़ी रही है। इनमें विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। लंबे समय तक उन्होंने VHP के संगठन और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को आगरा में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के IIT-BHU से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उनका झुकाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर हुआ और वह पूर्णकालिक प्रचारक बने।

1. इंजीनियरिंग की पढ़ाई से संघ के प्रचारक तक

अशोक सिंघल ने IIT-BHU से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने RSS के साथ काम करना शुरू किया और अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन की जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में उन्हें RSS से विश्व हिंदू परिषद में भेजा गया। 1980 में उन्होंने VHP में काम शुरू किया और संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए आगे बढ़े। यहीं से उनके सार्वजनिक जीवन का बड़ा हिस्सा हिंदू संगठनों और धार्मिक-सामाजिक आंदोलनों से जुड़ गया।

Ashok Singhal: 2. VHP में कैसे बढ़ी भूमिका?

VHP में आने के बाद अशोक सिंघल संगठन के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में हुई धर्म संसद के आयोजन में भी उनकी भूमिका रही। इसी दौर में राम जन्मभूमि से जुड़ा आंदोलन संगठित रूप लेने लगा। अशोक सिंघल इस आंदोलन के प्रमुख आयोजकों में शामिल रहे और बाद के वर्षों में इसकी राष्ट्रीय स्तर पर mobilization से उनका नाम लगातार जुड़ता गया।

3. राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी क्या भूमिका थी?

राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल VHP के प्रमुख चेहरों में थे। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में संतों, धार्मिक संगठनों और कार्यकर्ताओं को आंदोलन से जोड़ने में भूमिका निभाई। 1989 में प्रयागराज में हुई धर्म संसद भी आंदोलन के महत्वपूर्ण पड़ावों में रही। इसी दौर में राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित मंदिर मॉडल और राम शिला पूजन जैसे अभियानों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया गया। हालांकि राम जन्मभूमि आंदोलन किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं था। इसमें VHP, RSS, BJP, संत समाज और कई अन्य संगठनों तथा नेताओं की अलग-अलग भूमिकाएं रहीं।

Ashok Singhal: 4. BJP से उनका क्या संबंध था?

अशोक सिंघल BJP के औपचारिक संगठनात्मक पद पर नहीं थे। उनकी मुख्य भूमिका VHP और व्यापक हिंदू संगठनों के क्षेत्र में रही। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान VHP और BJP की राजनीतिक गतिविधियों के बीच मुद्दों का व्यापक संबंध रहा, लेकिन दोनों संगठनों की भूमिकाएं अलग थीं। इसी वजह से अशोक सिंघल को समझने के लिए उन्हें केवल BJP के संदर्भ में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। उनकी प्रमुख पहचान VHP के संगठनकर्ता और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में रही।

Ashok Singhal
                                                                             Ashok Singhal
5. अयोध्या आंदोलन में उनकी शैली क्या थी?

अशोक सिंघल का जोर बड़े पैमाने पर संगठन और जनसमर्थन जुटाने पर था। उन्होंने संतों और धार्मिक नेताओं के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। राम मंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कई बार केंद्र सरकारों पर भी दबाव बनाया। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते भी मंदिर निर्माण को लेकर उनके और सरकार के बीच मतभेदों की खबरें सामने आती रही थीं। एक समय उन्होंने राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर अनशन भी किया था।

Ashok Singhal: 6. VHP में कितने समय तक रहे?

अशोक सिंघल ने VHP में करीब तीन दशक से ज्यादा समय तक अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। 1980 में संगठन से जुड़ने के बाद वह संयुक्त महासचिव और फिर महासचिव जैसे पदों पर रहे। बाद में वह VHP के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर भी रहे। 2011 के आसपास संगठन में उनकी भूमिका बदली और इसके बाद भी वह राम मंदिर तथा हिंदू संगठनों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे।

7. 2015 में हुआ निधन

अशोक सिंघल का निधन 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हुआ। वह 89 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद भी राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा जारी रही। 2026 में उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘श्री राम भूमि’ को लेकर भी खबरें सामने आईं, जिसमें अभिनेता अनुपम खेर उनके किरदार को निभा रहे हैं।

Ashok Singhal: 8. आज फिर क्यों चर्चा में हैं अशोक सिंघल?

अशोक सिंघल की चर्चा का एक कारण उनकी 100वीं जयंती भी है। इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद राम जन्मभूमि आंदोलन के पुराने प्रमुख चेहरों की भूमिका को नए संदर्भ में देखा जा रहा है। उनका जीवन यह समझने के लिए भी महत्वपूर्ण है कि किस तरह 1980 और 1990 के दशक में धार्मिक-सामाजिक संगठनों ने राम जन्मभूमि के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का रूप दिया।

9. अशोक सिंघल की विरासत को कैसे समझें?

अशोक सिंघल की विरासत पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण रहे हैं। समर्थक उन्हें राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संगठकों में गिनते हैं, जबकि उनके आलोचक उनके राजनीतिक-सामाजिक विचारों और आंदोलनों को अलग नजरिए से देखते रहे हैं। तथ्य यह है कि राम जन्मभूमि आंदोलन के लंबे दौर में वह VHP के सबसे प्रमुख चेहरों में शामिल रहे और संगठनात्मक स्तर पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

यही वजह है कि अशोक सिंघल को समझना सिर्फ एक व्यक्ति की जीवनी समझना नहीं है, बल्कि राम जन्मभूमि आंदोलन के उस दौर को समझना भी है, जिसने आगे चलकर अयोध्या और भारतीय राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला।

ये भी पढ़े… इमरान की पार्टी के प्रोटेस्ट ने बढ़ाई पाकिस्तान की मुश्किलें, कंगाली के बीच सुरक्षा पर खर्च होंगे 1 अरब से ज्यादा