Bengal Elections: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव प्रचार अपने चरम पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित समय सीमा से पहले राजनीतिक दलों ने अंतिम क्षणों में रैलियों, रोड शो और जनसभाओं के जरिए पूरी ताकत झोंक दी है। दोनों राज्यों में मतदाताओं को साधने के लिए सभी दल आक्रामक प्रचार अभियान चला रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में जोरदार सियासी मुकाबला
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्यभर में लगातार जनसभाएं कर रही हैं, वहीं भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी व्यापक प्रचार में जुटे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कुल्टी में रैली को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में रोड शो और जनसभाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश तेज कर दी गई है।
Bengal Elections: कांग्रेस और अन्य दलों की सक्रियता
कांग्रेस नेता भी चुनाव प्रचार में पीछे नहीं हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पश्चिम बंगाल के अलग-अलग क्षेत्रों में जनसभाएं कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विपक्ष के नेताओं ने मतदाताओं से बदलाव के लिए समर्थन मांगा। वहीं अन्य दलों के उम्मीदवार भी अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय प्रचार करते नजर आए, जिससे चुनावी माहौल और भी गरमा गया है।
तमिलनाडु में भी तेज हुआ प्रचार अभियान
तमिलनाडु में भी चुनाव प्रचार अंतिम चरण में तेजी से जारी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार अपने क्षेत्रों में रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। सत्तारूढ़ और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य की 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को निर्धारित है। जैसे-जैसे प्रचार समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, चुनावी रणनीतियों की तस्वीर भी साफ होती जा रही है।








