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TMC में खुली बगावत! कल्याण बनर्जी ने अभिषेक से बनाई दूरी, बोले- ‘अहंकार बर्दाश्त नहीं’

Bengal News: पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के भीतर बढ़ती खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) ने गुरुवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह अब पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) से जुड़े किसी भी कानूनी मामले में पैरवी नहीं करेंगे।

यह विवाद उस समय सामने आया जब अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल सीआईडी द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) में याचिका दाखिल की। मामले की सुनवाई जस्टिस कौशिक चंदा (Kaushik Chanda) की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष हुई, जहां अभिषेक की ओर से अधिवक्ता अयान भट्टाचार्य ने पक्ष रखा।

“अभिषेक का अहंकार लगातार बढ़ रहा है”

मीडिया से बातचीत में कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी का व्यवहार अत्यधिक अहंकारी हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं अदालत में मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी, लेकिन बाद में उन्हें दरकिनार कर दूसरे वकील को नियुक्त कर दिया गया। कल्याण बनर्जी ने कहा, “मैं 45 वर्षों से वकालत कर रहा हूं। मैं किसी का अहंकार बर्दाश्त नहीं करूंगा। अब मैं अभिषेक बनर्जी से जुड़े किसी भी कानूनी मामले से खुद को अलग रखूंगा।”

Bengal News: बेटे और जूनियर वकीलों को भी दूर रहने का निर्देश

उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे, जो स्वयं एक प्रैक्टिसिंग वकील हैं, और उनके जूनियर अधिवक्ता भी अब अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामलों में शामिल नहीं होंगे।

ममता बनर्जी के सामने रखेंगे विकल्प

कल्याण बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के लिए अभिषेक बनर्जी जिम्मेदार हैं। उन्होंने संकेत दिया कि वह पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से स्पष्ट निर्णय लेने की मांग करेंगे। उन्होंने कहा, “मैं ममता बनर्जी से कहूंगा कि उन्हें अभिषेक बनर्जी और पार्टी के पुराने वफादार कार्यकर्ताओं में से किसी एक को चुनना होगा।”

Bengal News: बढ़ सकती है टीएमसी की मुश्किल

हाल के दिनों में टीएमसी के भीतर असंतोष और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कुछ सांसदों और नेताओं द्वारा नेतृत्व पर सवाल उठाए जाने के बीच कल्याण बनर्जी का यह बयान पार्टी के अंदरूनी संकट को और गहरा कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व जल्द स्थिति संभालने में सफल नहीं हुआ, तो पार्टी के भीतर गुटबाजी और अधिक खुलकर सामने आ सकती है।

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