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भागलपुर में विक्रमशिला पुल कैसे टूटा? SSP ने लोगों से वैकल्पिक रूट अपनाने की अपील कर बताई सच्चाई

बिहार के भागलपुर विक्रमशिला सेतु

Bihar News: बिहार के भागलपुर से एक बड़ी खबर सामने आई, जहां गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि पुल के पिलर नंबर 137 के पास एक हाइवा ट्रक के टकराने से नुकसान हुआ। इसके बाद हालात और बिगड़ गए और कुछ ही देर में पुल का एक हिस्सा गंगा नदी में गिर गया। मौके पर भागलपुर के डीएम नवल किशोर चौधरी और एसएसपी प्रमोद यादव कैम्प कर रहे हैं। डीएम नवल किशोर ने पूरी घटना की जानकारी दी है। वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में भी बताया। फिलहाल अगले आदेश तक किसी भी तरह के वाहन के आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

सेतु पूर्वी बिहार का इकलौता पूल

उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु पूर्वी बिहार का इकलौता पूल है। भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने वीडियो बयान जारी करते हुए आम लोगों से अपील किया है कि नौगछिया या सीमांचल से आने जाने वाले मुंगेर में बने गंगा सेतु का इस्तेमाल करें। जो गाड़ियां झारखंड से सीमांचल की तरफ जाती थी, उसे भी मुंगेर होते हुए जाना पड़ेगा। अगले आदेश तक आवाजाही पर पाबंदी रहेगी साथ ही पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, रविवार रात करीब 11:33 बजे पिलर नंबर 133 अचानक धंसने लगा। स्थिति तेजी से गंभीर होती गई और रात 11:55 बजे तक पिलर काफी हद तक झुक गया। पुल पर तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी, जिसके बाद एहतियात के तौर पर लोगों को वहां से हटाना शुरू किया गया। राहत की बात यह रही कि उस समय उस हिस्से पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

बिहार की लाइफलाइन बंद : गंगा में समाया भागलपुर विक्रमशिला सेतु का 133 नंबर  पिलर, वाहनों की आवाजाही पर रोक - vikramshila setu pillar 133 collapses in  ganga bihar lifeline shut

Bihar News: यातायात पूरी तरह बंद

घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पुल को भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ से बैरिकेड कर सील कर दिया है। फिलहाल पुल पर यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बता दें कि विक्रमशिला सेतु बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर बना करीब 4.7 किलोमीटर लंबा एक महत्वपूर्ण पुल है। यह दक्षिण बिहार के भागलपुर को उत्तर बिहार के नवगछिया, पूर्णिया, और कटिहार से जोड़ता है। यह दो लेन का पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 131ए का हिस्सा है और रोजाना करीब 1 लाख लोगों के आवागमन का मुख्य साधन है। इस पुल का उद्घाटन 30 जून 2001 को हुआ था, जबकि इसका निर्माण 1991 में शुरू हुआ था और इसे बनने में करीब 10 साल लगे। यह पुल भागलपुर के बरारी घाट पर स्थित एनएच-80 को नवगछिया के पास एनएच-31 से जोड़ता है। यह न केवल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच जीवनरेखा है, बल्कि झारखंड से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, असम और सिक्किम तक व्यापारिक आवाजाही के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। बिहार में इससे पहले भी पुलों के गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

22 सितंबर 2024 को पटना के बख्तियारपुर-ताजपुर में गंगा पर बन रहा एक पुल का हिस्सा गिर गया था। 8 अगस्त 2024 को कटिहार के बकिया सुखाय में निर्माणाधीन पुल फेल हो गया था। 18 जून 2024 को अररिया में 12 करोड़ रुपए की लागत से बना नया पुल उद्घाटन से पहले ही ढह गया था। 22 मार्च 2024 को सुपौल के बकौर में कोसी नदी पर बने 10.5 किलोमीटर लंबे पुल का एक हिस्सा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं 4 जून 2023 को अगुवानी-सुल्तानगंज के बीच 1,710 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल दो साल में दूसरी बार गिर गया था।

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