Chattishgharh: नियति का खेल भी कितना अजीब होता है. छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के एक घर में अभी सिर्फ 15 दिन पहले ही बेटे की सगाई के लड्डू बंटे थे. परिवार के लोग जनवरी 2027 में होने वाली शादी के सुनहरे सपने बुन रहे थे और तैयारियां जोरों पर थीं. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. आज वही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौटा. उसकी शहादत की खबर ने न केवल उसके परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे गांव की आंखों में आंसू ला दिए. 2 मई 2026 को कांकेर में नक्सलियों द्वारा छिपाए गए विस्फोटक को नष्ट करते समय हुए एक भीषण हादसे में बस्तर फाइटर्स के चार जवानों ने अपनी जान गंवा दी. इनमें संजय कुमार गढ़पाले की कहानी सबसे ज्यादा भावुक करने वाली है, जिनके सिर पर सेहरा सजने से पहले ही उनके घर का चिराग बुझ गया.
बचपन का सपना और परिवार की उम्मीदें
शहीद संजय कुमार गढ़पाले कांकेर के ग्राम हराडुला के रहने वाले थे. एक साधारण परिवार में जन्मे संजय के पिता साइकिल मरम्मत की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं. संजय के मन में बचपन से ही देश सेवा का जज्बा था. उन्होंने सेना में जाने की बहुत कोशिश की, लेकिन जब वहां बात नहीं बनी तो उन्होंने बस्तर फाइटर्स का रास्ता चुना. साल 2022 में उनकी मेहनत रंग लाई और वे पुलिस बल में शामिल हो गए. परिवार के बड़े बेटे होने के नाते उन पर कई जिम्मेदारियां थीं, जिन्हें वे बखूबी निभा रहे थे.
Chattishgharh: अचानक मिली दुखद खबर से टूटा परिवार
अभी दो हफ्ते पहले ही संजय पांच दिन की छुट्टी पर घर आए थे. इसी दौरान उनकी सगाई हुई थी और शादी के लिए जनवरी 2027 का समय तय किया गया था. सगाई की खुशियां मनाकर वे वापस ड्यूटी पर लौटे ही थे कि अचानक पुलिस की टीम उनके घर पहुंची. जैसे ही परिजनों को संजय के शहीद होने की खबर मिली, पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया. पिता सुरेश गढ़पाले की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. उनका कहना है कि उनका बेटा पूरे परिवार का सहारा था और सबके सपने पूरे करना चाहता था, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो गया है.
Chattishgharh: जंगल में मौत का सामान और वो खौफनाक धमाका
यह हादसा कांकेर के छोटेबेठिया इलाके के जंगलों में हुआ. सुरक्षा बलों को खबर मिली थी कि नक्सलियों ने भारी मात्रा में विस्फोटक छिपा रखा है. सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों को कंप्यूटर उपकरणों के साथ 15-15 किलो की पांच बोरियां मिलीं, जिनमें लगभग 75 किलो बारूद भरा हुआ था. पुलिस अधीक्षक के मुताबिक, जब बम निरोधक दस्ता इस विस्फोटक को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की कोशिश कर रहा था, तभी शायद गर्मी या रासायनिक बदलाव की वजह से उसमें अचानक जोरदार धमाका हो गया.
इन जांबाज जवानों ने देश के लिए दी कुर्बानी
Chattishgharh: इस भयानक विस्फोट की चपेट में आने से चार जवानों की जान चली गई. संजय गढ़पाले के साथ इस हादसे में सुखराम वट्टी और कृष्णा कोमरा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि परमानंद कोर्राम की मौत अस्पताल ले जाते समय रास्ते में हुई. बस्तर आईजी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि इन बहादुर जवानों ने पहले भी कई बार खतरनाक विस्फोटकों को नाकाम किया था. उनकी इस बहादुरी और बलिदान को देश हमेशा याद रखेगा. आज पूरे प्रदेश में इन शहीदों के सम्मान में आंखें नम हैं.
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