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चीन ने 40 दिनों के लिए बंद किया हवाई क्षेत्र, बिना वजह बढ़ी चिंता

China news: चीन ने अपने समुद्री तट के पास बड़े हिस्से में हवाई क्षेत्र को 40 दिनों के लिए बंद करने का फैसला लिया है। इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक यह प्रतिबंध शंघाई के उत्तर और दक्षिण दोनों इलाकों को कवर करता है और येलो सी से लेकर ईस्ट चाइना सी तक फैला हुआ है। यह बंदी 27 मार्च से शुरू होकर 6 मई तक लागू रहेगी।

सैन्य अभ्यास की कोई घोषणा नहीं

रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने इस क्षेत्र में किसी भी तरह के सैन्य अभ्यास की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, जो इस फैसले को और रहस्यमय बनाता है। इस एयरस्पेस को SFC-UNL नाम दिया गया है और इसकी ऊपरी सीमा तक स्पष्ट नहीं की गई है। खास बात यह है कि यह इलाका ताइवान से काफी दूरी पर स्थित है, फिर भी इसकी टाइमिंग पर सवाल उठ रहे हैं।

China news: विशेषज्ञों ने जताई चिंता

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के SeaLight प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रे पॉवेल के मुताबिक, इस फैसले को खास बनाता है इसकी लंबी अवधि और बिना किसी सैन्य अभ्यास के घोषणा के इसे लागू करना। उनका मानना है कि यह सिर्फ एक बार का कदम नहीं बल्कि लगातार सैन्य तैयारी की ओर इशारा करता है। चीन ने इस पर कोई स्पष्टीकरण देना जरूरी नहीं समझा।

China news: ताइवान ने जताया शक

ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि चीन इस समय क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहा है। उनका मानना है कि जब अमेरिका ईरान के साथ तनाव में उलझा है, तब चीन इस मौके का फायदा उठा सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने तो यहां तक कहा कि यह कदम जापान को ध्यान में रखकर उठाया गया है और इसका मकसद अमेरिकी सैन्य ताकत को सीमित करना हो सकता है।

संभावित सैन्य तैयारी के संकेत

अमेरिका के नेवल वॉर कॉलेज के विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस बंद हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल हवाई युद्ध से जुड़े अभ्यासों के लिए कर सकता है। ऐसे अभ्यास भविष्य में किसी बड़े सैन्य टकराव की तैयारी का हिस्सा हो सकते हैं।

पहले भी बदला था रुख

China news: फरवरी से मार्च की शुरुआत तक चीन ने ताइवान के एयर डिफेंस जोन में अपने विमानों की घुसपैठ अचानक रोक दी थी। तब माना गया था कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित बैठक से पहले शांति का संदेश देने के लिए उठाया गया था।

 

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