CJP Protest: संसद मार्च के दौरान हुए बवाल के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। करीब एक महीने तक आंदोलन का हिस्सा रहे एक पूर्व प्रदर्शनकारी ने संगठन के नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि छात्र हितों से शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक प्रभाव में आ गया है। पत्रकारों से बातचीत में पूर्व CJP आंदोलनकारी वीरू भाई ने कहा कि उन्होंने संगठन से खुद को अलग कर लिया है। उनके अनुसार, जिस उद्देश्य से छात्र आंदोलन से जुड़े थे, वह धीरे-धीरे अपने मूल मुद्दों से भटक गया।
CJP अब AAP की बी-टीम बन गई
वीरू भाई का आरोप है कि शुरुआत में CJP खुद को गैर-राजनीतिक मंच बताता था, लेकिन समय के साथ इसकी दिशा बदल गई। उन्होंने दावा किया कि अब संगठन आम आदमी पार्टी (AAP) की ‘बी-टीम’ की तरह काम कर रहा है। उनका कहना है कि आंदोलन में ऐसे लोग भी शामिल हो गए, जिनका छात्र हितों से कोई संबंध नहीं था और प्रदर्शन के दौरान उपद्रवी तत्व भी भीड़ का हिस्सा बन गए। पूर्व प्रदर्शनकारी ने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों को उम्मीद थी कि आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता खुलकर उनके समर्थन में आएंगे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि हमें लगा था कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया या संजय सिंह हमारे साथ खड़े होंगे। अगर पार्टी के पास इतने सांसदों का समर्थन था तो संसद मार्च के दिन कोई भी बड़ा नेता मौके पर क्यों नहीं पहुंचा?

CJP Protest: नेतृत्व पर लगाए गंभीर सवाल
वीरू भाई ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत अन्य नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पुलिस के साथ टकराव की आशंका के बावजूद संगठन का शीर्ष नेतृत्व आगे नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि महिला प्रदर्शनकारियों को सबसे आगे रखा गया, जबकि प्रमुख नेता पीछे रहे ताकि गिरफ्तारी से बच सकें। उनका कहना है कि पहली बार आंदोलन में शामिल हुए कई छात्र नेतृत्व के अभाव में सीधे पुलिस कार्रवाई का सामना करने को मजबूर हुए।
प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प
पूर्व प्रदर्शनकारी ने यह भी सवाल उठाया कि जब दिल्ली पुलिस पहले ही संसद मार्च की अनुमति देने से इनकार कर चुकी थी और इलाके में कई दिनों से बैरिकेडिंग की गई थी, तब भी प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने के लिए क्यों कहा गया। उन्होंने कहा कि यदि नेतृत्व को हालात की पूरी जानकारी थी, तो उसे सबसे आगे रहकर जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। दरअसल, सोमवार को CJP ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया था। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने का आरोप लगाया है। वहीं CJP का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, झड़प में कुल 178 लोग घायल हुए, जिनमें 118 पुलिसकर्मी और करीब 60 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। दूसरी ओर, CJP का दावा है कि घायल छात्रों और प्रदर्शनकारियों की संख्या इससे अधिक है।
इधर, CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक को आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है। संगठन का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है और बातचीत के लिए बुलाया जाना आंदोलन की पहली बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से मांगों पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
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