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जुनैद भाई कौन है? जिन्होंने की जंतर-मंतर पर कॉकरोचों के खानें की व्यवस्था, फंडिंग की यूपी पुलिस कर रही जांच

जुनैद भाई जंतर मंतर

CJP Protest: जंतर-मंतर पर 49 दिनों तक चले CJP के छात्र आंदोलन में हर दिन हजारों छात्र जुटे, बड़े नेताओं ने भाषण दिए, सरकार और विपक्ष आमने-सामने आए और आंदोलन राष्ट्रीय बहस का विषय बना रहा। लेकिन इस पूरे आंदोलन में एक ऐसा नाम भी सामने आया, जिसने कभी मंच से भाषण नहीं दिया, न प्रेस कॉन्फ्रेंस की और न ही खुद को आंदोलन का चेहरा बनाया। इसके बावजूद आंदोलन खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उसी शख्स की हो रही है। यह नाम है मोहम्मद जुनैद, जिन्हें प्रदर्शनकारी प्यार से ‘जुनैद भाई’ कहकर बुलाते थे।

कौम है जुनैद भाई?

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के नहाल गांव निवासी मोहम्मद जुनैद किसी बड़े पद पर नहीं थे। वे आंदोलन से एक स्वयंसेवक के रूप में जुड़े थे। उनकी जिम्मेदारी थी कि जंतर-मंतर पर दिन-रात डटे हजारों छात्रों के लिए भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। आंदोलन के दौरान जब छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे थे, तब जुनैद और उनकी टीम पर्दे के पीछे रहकर लगातार व्यवस्थाएं संभाल रही थी। यही वजह रही कि आंदोलन में शामिल लोग उन्हें सम्मान के साथ ‘जुनैद भाई’ कहने लगे।

CJP Protest: आंदोलन के आखिरी दिनों में चर्चा में आए

 कई सप्ताह तक केवल व्यवस्थाएं संभालने वाले जुनैद का नाम आंदोलन के अंतिम चरण में अचानक सुर्खियों में आ गया। जुनैद ने आरोप लगाया कि आंदोलन से जुड़े होने के कारण उत्तर प्रदेश में उनके घर पर पुलिस पहुंची। परिवार का दावा है कि गाजियाबाद स्थित उनके घर की तलाशी ली गई और उनके पिता मुस्तफा को पूछताछ के लिए साथ ले जाया गया। परिवार के मुताबिक, इस दौरान बैंक पासबुक, पैन कार्ड समेत कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए। जुनैद की बहन ने भी आरोप लगाया कि पुलिस उनके पिता पर दबाव बना रही थी ताकि वे जुनैद को दिल्ली से वापस बुलाएं।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मेरठ में रहने वाले उनके रिश्तेदारों को भी परेशान किया गया। हालांकि, मेरठ पुलिस ने इन आरोपों से साफ इनकार करते हुए कहा कि जिले के किसी भी थाने में ऐसे किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने या कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसी के बाद यह मामला सिर्फ एक परिवार के आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया। एक ओर परिवार प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोप लगाता रहा, वहीं दूसरी ओर पुलिस लगातार इन दावों को खारिज करती रही।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

आंदोलन के दौरान जहां छात्र नेता और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि लगातार मंच से अपनी बात रखते रहे, वहीं जुनैद शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से नजर आए। उनकी पूरी भूमिका धरना स्थल की व्यवस्थाओं तक सीमित रही। हालांकि, जैसे-जैसे आंदोलन आगे बढ़ा, सोशल मीडिया पर ‘जुनैद भाई’ की चर्चा तेज होती गई। कई छात्रों ने उन्हें उस व्यक्ति के रूप में याद किया, जिसने लगातार 49 दिनों तक बिना किसी प्रचार के हजारों प्रदर्शनकारियों की जरूरतों का ख्याल रखा। लेकिन अब आंदोलन खत्म होने के बाद जहां कई प्रमुख चेहरे धीरे-धीरे सुर्खियों से दूर हो गए, वहीं ‘जुनैद भाई’ की कहानी लगातार चर्चा में बनी हुई है।

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