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Opinion: कॉकरोच की ओछी हरकत और केजरीवाल, तिरंगे की आड़ में अराजकता क्यों? 

Opinion: कॉकरोच की ओछी हरकत और केजरीवाल, तिरंगे की आड़ में अराजकता क्यों? 
Opinion: कॉकरोच की ओछी हरकत और केजरीवाल, तिरंगे की आड़ में अराजकता क्यों? 
Opinion: देश के कुछ विपक्षी नेता बेचैन हैं कि जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने वाले कॉकरोच को हिरासत में क्यों लिया गया।दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो यहां तक दलील दी है कि उन्हें तिरंगा फहराने पर जेल भेजा जाना गलत है।ठीक है कि राष्ट्र ध्वज को फहराने का अधिकार सबको है, लेकिन क्या राष्ट्र ध्वज की आड़ में अराजकता की इजाजत दे दी जानी चाहिए? केजरीवाल देश की जनता को गुमराह न करें। राजनीति के लिए इस हद तक नीचे गिर जाना उचित नहीं है। केजरीवाल अच्छी तरह जान लें कि इस देश की जनता आसानी से गुमराह होने वाली नहीं है। पुलिस ने कॉकरोच को तिरंगा फहराने के लिए नहीं, बल्कि तिरंगे की आड़ में कानून तोड़ने पर गिरफ्तार किया है। कितनी दुखद बात है कि तिरंगे की आड़ में कानून तोड़ा जा रहा है और विपक्ष के बड़े नेता जो कि तीन बार मुख्यमंत्री रहे, बड़ी शान से उसे तिरंगे के सम्मान से जोड़ रहे हैं। 

केजरीवाल को स्मरण रहना चाहिए

केजरीवाल को स्मरण रहना चाहिए कि तिरंगा फहराने के कुछ खास नियम हैं।आखिर जिन लोगों ने तिरंगे की आड़ लेकर चोरी-छिपे जंतर-मंतर में प्रवेश किया, उनसे कैसे तिरंगे को सम्मानपूर्वक फहराने और फहराने के बाद सुरक्षित रखने की उम्मीद की जा सकती है? शंका का कारण उन्होंने खुद ही बनाया है। इससे पहले भी कॉकरोच जनता में अपनी विश्वसनीयता खो चुके हैं। जो लोग अपनी राजनीति चमकाने की नीति और नीयत से पुलिस के सिर पर जबरन दोष मढ़ दें, उसे अमानवीय और हिंसक ठहराने का कुत्सित प्रयास कर दें,  उन पर भला कौन यकीन कर लेगा?  इन लोगों के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वीडियो तक जारी करना पड़ा। आश्चर्यजनक है कि इतना होने के बाद भी ये लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऊपर से कुछ विपक्षी नेता इन्हें सही ठहरा रहे हैं। 

Opinion: इससे ज्यादा खतरनाक और क्या हो सकता है?

भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सहारा लेकर कानून- व्यवस्था, अदालती आदेशों या पुलिस के नियमों का उल्लंघन करना अनुचित है।तिरंगे का सहारा लेकर जबरन प्रतिबंधित जगह में घुसने जैसे  कृत्य को छिपाना वास्तव में राष्ट्र ध्वज की गरिमा के विरुद्ध है।यदि को कोई व्यक्ति कानून या पीस बॉन्ड तोड़ता है और फिर पुलिस की कानूनी कार्रवाई को ‘तिरंगा फहराने की सजा’ बताता है, तो इससे ज्यादा खतरनाक और क्या हो सकता है? कानून तोड़ने वालों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया लागू होगी ही, भले ही उनके हाथ में राष्ट्रीय ध्वज क्यों न हो।