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‘यादव हूं, हिंदू नहीं’ बयान पर सियासी घमासान, संजय निरुपम बोले- जातिवाद से देश को तोड़ने की कोशिश

Controversy news: समाजवादी पार्टी के नेता शिवराज सिंह यादव के “मैं यादव हूं, हिंदू नहीं” वाले बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने इस बयान को हिंदू विरोधी बताते हुए कहा कि इस तरह की बयानबाजी समाज को जातियों में बांटने की साजिश है, जो देश की सामाजिक एकता के लिए घातक साबित हो सकती है।

अखिलेश यादव से मांगा जवाब

मुंबई में मीडिया से बातचीत में संजय निरुपम ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से सीधा सवाल करते हुए कहा कि क्या वे अपने पार्टी नेता के इस बयान से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि यदि अखिलेश यादव इस सोच का समर्थन करते हैं, तो उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे भगवान श्रीकृष्ण को किस रूप में देखते हैं।

Controversy news: भगवान कृष्ण का अपमान बताया

निरुपम ने कहा कि यादव वंश के राजा और विष्णु के अवतार भगवान श्रीकृष्ण हिंदू समाज के आराध्य देव हैं। ऐसे में “यादव हूं लेकिन हिंदू नहीं” कहना केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और हिंदू आस्था का भी अपमान है। उन्होंने इसे अब तक का सबसे खतरनाक हिंदू विरोधी बयान करार दिया।

हिंदू समाज सभी जातियों का समन्वय

शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि हिंदू समाज किसी एक जाति तक सीमित नहीं है। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र और अन्य सभी जातियां हिंदू समाज की संरचना का हिस्सा हैं। यादव भी उसी परंपरा का अंग हैं। जाति को धर्म से अलग दिखाने की कोशिश समाज में विभाजन पैदा करती है।

Controversy news: राजनीतिक लाभ के लिए जातिवाद का आरोप

संजय निरुपम ने आरोप लगाया कि कुछ नेता राजनीतिक स्वार्थ के लिए जानबूझकर जातिगत पहचान को उभार रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को जोड़ने के बजाय समाज को बांटने वाली ऐसी राजनीति खतरनाक है और इसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ सकता है।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार का मुद्दा

निरुपम ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां लगातार हत्याएं और मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आ रही हैं। भारत का हर हिंदू इस स्थिति से आहत और नाराज है।

चेतावनी और अपील

उन्होंने बांग्लादेश सरकार से अपील की कि वह जल्द से जल्द कट्टरपंथी और जिहादी संगठनों पर नियंत्रण करे। निरुपम ने चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो भारत सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है

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