Datia By-election 2026: मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जस्टिस अमित सेठ की पीठ ने चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए विधायक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने चुनावी हलफनामे में कुछ कथित आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी थी। याचिकाकर्ता ने उनके निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की है।
लेकिन क्या हाईकोर्ट का नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता पर तत्काल असर पड़ेगा? 35 साल पुराने कथित मामलों का इस चुनाव से क्या संबंध है? और क्या हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप साबित होने पर निर्वाचन रद्द हो सकता है? आइए, समझते हैं पूरा मामला।
घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती क्यों दी गई?
दतिया निवासी भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई 2026 में हुए दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे में वर्ष 1991 के दो कथित आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, इन मामलों का संबंध तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम से है। दावा किया गया है कि इस दौरान दर्ज प्राथमिकी में करीब 22 लोगों के नाम थे, जिनमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था। याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले में अदालत के सामने चालान पेश किया जा चुका था। हालांकि, ये सभी बातें याचिकाकर्ता के आरोप हैं।
Datia By-election 2026: 2020 के मामले का भी जिक्र, 2023 के हलफनामे पर सवाल
याचिका में वर्ष 2020 में दर्ज एक अन्य कथित आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि घनश्याम सिंह ने 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में इस मामले की जानकारी नहीं दी थी। जुलाई 2026 के उपचुनाव में घनश्याम सिंह ने अपने हलफनामे में दो लंबित आपराधिक मामलों का उल्लेख किया था। ऐसे में विवाद का मुख्य प्रश्न यह है कि जिन मामलों को छिपाने का आरोप लगाया गया है, उनकी स्थिति क्या थी और क्या नियमों के अनुसार उनका खुलासा करना आवश्यक था। इसका उत्तर केवल आरोपों के आधार पर नहीं निकाला जा सकता। संबंधित प्राथमिकी, अदालत में पेश चालान, मुकदमे की स्थिति और चुनाव के समय दाखिल हलफनामों की तुलना जरूरी होगी।
घनश्याम सिंह ने क्या कहा?
सितंबर में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, घनश्याम सिंह ने पुराने मामले की जानकारी होने और उसे हलफनामे में शामिल करने की जरूरत पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला या अदालत में चालान पेश होने की जानकारी नहीं आई थी। इसलिए मामले में विधायक का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। अदालत में उनके जवाब और संबंधित दस्तावेजों से यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित मामलों की जानकारी उन्हें थी या नहीं और हलफनामे में उनका उल्लेख करना अनिवार्य था या नहीं।
Datia By-election 2026: जबलपुर से ग्वालियर हाईकोर्ट कैसे पहुंची याचिका?
घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में दाखिल की गई थी। बाद में इसे सुनवाई के लिए ग्वालियर खंडपीठ में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां दतिया विधायक के निर्वाचन से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। 16 अक्टूबर को जस्टिस अमित सेठ की पीठ ने विधायक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। रिपोर्टों के अनुसार, मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 दिसंबर 2026 की तारीख बताई गई है।
क्या हाईकोर्ट विधायक की सदस्यता रद्द कर सकता है?
यह इस मामले का सबसे अहम सवाल है। चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी देने की जिम्मेदारी और उसके उल्लंघन के संभावित परिणाम कानून तथा मामले के तथ्यों पर निर्भर करते हैं। अदालत को यह देखना होगा कि संबंधित मामले किस स्थिति में थे, उनके खुलासे की कानूनी बाध्यता थी या नहीं और याचिकाकर्ता के आरोप दस्तावेजों से साबित होते हैं या नहीं। इसके बाद ही निर्वाचन की वैधता पर फैसला हो सकता है। सिर्फ नोटिस जारी होने से विधायक की सदस्यता खत्म नहीं होती और न ही उपचुनाव होना तय हो जाता है। फिलहाल हाईकोर्ट ने विधायक से जवाब मांगा है। अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

Datia By-election 2026: 6,016 वोटों से जीते थे घनश्याम सिंह
दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई 2026 को मतदान हुआ था और 3 अगस्त को नतीजे घोषित किए गए थे। चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया था। अब उनके निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर अदालत में आगे सुनवाई होगी। मामले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि याचिका में सीधे विधायक के निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की गई है।
अब विधायक के जवाब पर नजर
दतिया विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को लेकर हाईकोर्ट का नोटिस जारी होना कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इसे सदस्यता रद्द होने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। अदालत के सामने अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित आपराधिक मामलों की जानकारी हलफनामे में देना जरूरी था या नहीं और क्या किसी तरह की कानूनी चूक हुई। आगे की सुनवाई में विधायक का जवाब, पुराने मामलों के दस्तावेज और चुनावी हलफनामे अहम होंगे। फिलहाल, विधायकी पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और याचिका में लगाए गए आरोप साबित होना बाकी हैं।
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