Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी को नाबालिग बच्चे के कनाडा स्थानांतरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित नियमों के तहत वैधानिक दायित्वों को केवल समर्थन पत्र जारी करके नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह मामला अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
याचिका और विवाद का मामला
यह आदेश दत्तक माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने अपनी नाबालिग बेटी के लिए एनओसी जारी करने की मांग की थी, जिसे उन्होंने हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम के तहत गोद लिया था। सीएआरए ने एनओसी देने से इनकार करते हुए केवल समर्थन पत्र जारी किया था, जिसके कारण बच्चे के स्थानांतरण की प्रक्रिया बाधित हो गई थी।
Delhi High Court: अदालत की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सीएआरए का कर्तव्य है कि वह निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करे। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों के तहत पहले से संपन्न दत्तक ग्रहण मामलों को भी नियामक ढांचे में शामिल किया गया है और ऐसे मामलों में एनओसी जारी करना आवश्यक है।
प्रक्रिया और आगे का रास्ता
मामले में नाबालिग बच्चे को वर्ष 2019 में पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत गोद लिया गया था और बाद में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गई थीं। जिला प्रशासन द्वारा सत्यापन रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जा चुकी थी। अदालत ने कहा कि सभी शर्तें पूरी होने के बाद सीएआरए को हेग कन्वेंशन के प्रावधानों के अनुरूप एनओसी जारी करना अनिवार्य है, ताकि बच्चे के कनाडा स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।








