Home » एक्सप्लनेर » छात्रों का आंदोलन या भाजपा-विरोधी अभियान? दिल्ली में प्रदर्शन, वामपंथी संगठनों और सियासी एजेंडे का विश्लेषण

छात्रों का आंदोलन या भाजपा-विरोधी अभियान? दिल्ली में प्रदर्शन, वामपंथी संगठनों और सियासी एजेंडे का विश्लेषण

Delhi Protest: दिल्ली प्रदर्शन छात्रों का आंदोलन या भाजपा-विरोधी अभियान?

Delhi Protest: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छात्र संगठनों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। प्रदर्शन के जरिए चुनाव आयोग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भाजपा की राजनीति को निशाना बनाया जा रहा है। लेकिन आंदोलन में सीमित भीड़, व्यापक सामाजिक समर्थन की कमी और वामपंथी संगठनों की सक्रियता ने इसके राजनीतिक उद्देश्य पर सवाल खड़े किए हैं। नेहा बोरा और CJP जैसे नामों की सक्रियता के बीच यह बहस तेज है कि आंदोलन का मकसद चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना है या भाजपा-विरोधी अभियान को आगे बढ़ाना।

ज्ञानेश कुमार के नाम पर आंदोलन, निशाने पर भाजपा

दिल्ली में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मुद्दे को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक हमले के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन चुनाव आयोग के विरोध से आगे बढ़कर भाजपा-विरोधी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

Delhi Protest: वामपंथी संगठनों के हाथ में आंदोलन की कमान

प्रदर्शन में AISA, SFI और अन्य वामपंथी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की सक्रियता प्रमुखता से सामने आई है। इन संगठनों की विचारधारा लंबे समय से भाजपा और उसकी नीतियों के विरोध के इर्द-गिर्द रही है। दिल्ली के इस आंदोलन में भी वामपंथी समूहों की भागीदारी इसे वैचारिक और राजनीतिक रंग दे रही है। छात्र मुद्दे के साथ भाजपा-विरोध इस प्रदर्शन का प्रमुख राजनीतिक पहलू बन गया है।

नेहा बोरा और CJP की सक्रियता

नेहा बोरा और CJP का नाम भी इस आंदोलन से जुड़कर चर्चा में है। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने और प्रदर्शन के समर्थन में लामबंदी करने की कोशिश की जा रही है। CJP की सक्रियता ने आंदोलन को ऑनलाइन चर्चा में जगह दी है, लेकिन डिजिटल प्रचार के बावजूद सड़क पर व्यापक भीड़ जुटाना चुनौती बना हुआ है। इससे आंदोलन की वास्तविक जनपहुंच को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Delhi Protest: लगातार प्रदर्शन, लेकिन सीमित भीड़

दिल्ली में हाल के दिनों में प्रदर्शन हुए, लेकिन आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी दिखाई नहीं दी। छात्र संगठनों और वैचारिक रूप से जुड़े कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के बावजूद आंदोलन व्यापक जनसमर्थन हासिल करने में संघर्ष करता नजर आ रहा है। अलग-अलग सामाजिक वर्गों की बड़ी भागीदारी नहीं जुट पाना इसकी प्रमुख कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है।

क्या भाजपा-विरोध ही आंदोलन का बड़ा एजेंडा है?

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ भाजपा को राजनीतिक रूप से घेरने की कोशिश इस आंदोलन को एक व्यापक विपक्षी विमर्श से जोड़ती है। वामपंथी संगठनों की सक्रियता और भाजपा-विरोधी नारों के बीच आंदोलन का राजनीतिक पक्ष प्रमुख होता जा रहा है। यही वजह है कि इसे केवल छात्रों की मांगों तक सीमित न मानकर भाजपा-विरोधी अभियान के नजरिये से भी देखा जा रहा है।

Delhi Protest: आंदोलन की सबसे बड़ी चुनौती जनसमर्थन

दिल्ली के इस आंदोलन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सीमित भागीदारी से आगे निकलकर आम लोगों और विभिन्न सामाजिक वर्गों को जोड़ने की है। फिलहाल वामपंथी संगठनों और सक्रिय राजनीतिक समूहों की मौजूदगी के मुकाबले व्यापक जनसमर्थन का अभाव इसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चा जरूर है, लेकिन चर्चा और बड़े जनआंदोलन में अंतर होता है।

ये भी पढ़ें…‘संत रविदास नगर कहलाएगा भदोही’, CM योगी का ऐलान, 1994 से अब तक 4 बार बदला नाम