EC Rules Change 2026: चुनाव आयोग ने शनिवार को हुई बैठक में अपने कामकाज और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े 9 अहम फैसले लिए। आयोग ने तय किया कि अब हर बैठक से पहले उसका एजेंडा सभी सदस्यों के साथ साझा किया जाएगा और बैठक खत्म होने के बाद लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, नए आईटी सिस्टम, पोर्टल और मॉड्यूल को लागू करने से पहले उनकी जांच और समीक्षा भी की जाएगी।
बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। चुनाव आयोग ने उन रिपोर्ट्स के बीच यह भी कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से 4 आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। आयोग ने शनिवार की बैठक के बाद इन दावों और उससे जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।
कांग्रेस ने आयोग के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि अंदरूनी मतभेद सामने आने के बाद आयोग स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस ने कई राज्यों में चल रहे एसआईआर को तुरंत रोकने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।
EC Rules Change 2026: चुनाव आयोग ने लिए ये 9 फैसले
- बैठक से पहले एजेंडा साझा होगा: अब चुनाव आयोग की हर बैठक से पहले उसका एजेंडा सभी सदस्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।
- बैठक के बाद फैसलों का रिकॉर्ड तैयार होगा: बैठक खत्म होने के बाद उसमें लिए गए फैसलों का रिकॉर्ड यानी मिनट्स तैयार किए जाएंगे।
- विदेश दौरे के लिए आयोग की मंजूरी जरूरी
चुनाव आयोग के अधिकारियों को विदेश यात्रा पर जाने से पहले आयोग से अनुमति लेनी होगी। - नए आईटी सिस्टम की पहले जांच होगी: नए पोर्टल या आईटी मॉड्यूल को आयोग के सामने रखने से पहले अधिकारियों की एक समिति उनकी जांच करेगी।
- ईसीआईनेट की समीक्षा होगी: ईसीआईनेट सिस्टम की समीक्षा वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति करेगी। इसमें आईआईटी या आईआईआईटी का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा।
- फील्ड अधिकारियों को जरूरत के अनुसार पूरा सिस्टम एक्सेस मिलेगा: मैदानी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों को उनके काम की जरूरत के हिसाब से सिस्टम में आवश्यक सुविधाएं और एक्सेस दिया जाएगा।
- चुनाव आयुक्तों के निर्देशों का पालन जरूरी होगा: अधिकारियों को चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।
- वोटर डेटा का स्वतंत्र ऑडिट होगा: मतदाता सूची के डेटा और उससे जुड़े सिस्टम की स्वतंत्र विशेषज्ञों से जांच यानी ऑडिट कराया जाएगा।
- आईटी विभाग की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएंगी: आईटी विभाग से जुड़े काम और जिम्मेदारियों में अगर कोई बदलाव किया जाता है, तो इसकी जानकारी आयोग को दी जाएगी।
EC Rules Change 2026: आयोग ने प्रतिनियुक्त अधिकारी को लेकर दी सफाई
चुनाव आयोग ने शनिवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को जो पत्र भेजे थे, वे प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से जुड़े थे।इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने ऐसे आदेश पर आपत्ति जताई थी, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड में बदलाव करने की प्रक्रिया की शक्ति केंद्रीय स्तर पर केंद्रित होने की आशंका थी।आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी किया गया काम के बंटवारे से जुड़ा आदेश कभी लागू ही नहीं हुआ। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का सावधानी से पालन किया जाएगा।ईसीआईनेट की जांच के लिए वरिष्ठ डिप्टी चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इसमें आईआईटी या आईआईआईटी का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा।
EC Rules Change 2026: फॉर्म-6 को लेकर आयोग ने क्या कहा?
आयोग का दावा- फॉर्म-6 से जुड़ी प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी
फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ जो डिक्लेरेशन जोड़ा गया है, उसे सुप्रीम कोर्ट ने सही माना है। हालांकि, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 27 मई के सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इस ऑनलाइन फॉर्म में जोड़े गए विशेष सवाल को स्पष्ट रूप से सही ठहराने की बात दिखाई नहीं देती।
फॉर्म-6 और नया नियम
फॉर्म-6 नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एसआईआर से जोड़ते हुए ऑनलाइन फॉर्म में एक नया सवाल शामिल किया गया था। इसमें नए मतदाता से उसके माता-पिता या दादा-दादी का पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में नाम होने की जानकारी मांगी जा रही थी। इस सवाल का जवाब दिए बिना आवेदन आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
विवाद की वजह
कई नए युवाओं के पास अपने माता-पिता या दादा-दादी से जुड़े पुराने दस्तावेज या एसआईआर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसी वजह से फॉर्म को लेकर विवाद शुरू हुआ। यह आरोप भी लगाया गया कि संसद और कानून मंत्रालय की मंजूरी के बिना सॉफ्टवेयर में बदलाव किया गया।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने फॉर्म-6 में इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। विवेक जोशी ने कहा था कि चुनाव नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म-6 में इस तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में सुखबीर सिंह संधू ने भी इस पर आपत्ति जताई।

EC Rules Change 2026: एसआईआर में नाम नहीं है तो क्या कर सकते हैं?
चुनाव आयोग के मुताबिक, एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे मतदाता सूची को लगातार अपडेट करने वाली प्रक्रिया के तहत संबंधित ईआरओ के पास नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग भी शामिल हैं। आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को ऐसे लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।एसआईआर के दौरान अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, देश में कुल 96.88 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। इस हिसाब से करीब 14.1 प्रतिशत मतदाताओं के नाम एसआईआर प्रक्रिया में ड्राफ्ट सूची से हटे हैं।
इन सवालों पर अभी भी स्पष्ट जवाब नहीं
नए फैसलों के बावजूद ऑनलाइन फॉर्म-6 में माता-पिता से जुड़ा सवाल क्यों जोड़ा गया था, इस पर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह सवाल किसके निर्देश पर जोड़ा गया और क्या अब इसे हटा दिया गया है, इस बारे में भी आयोग के नए फैसलों में साफ जानकारी नहीं है।पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े करीब 16 लाख नामों के खिलाफ अपील किसके आदेश पर दाखिल की गई, इस सवाल का भी स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।इसके अलावा, गोवा में मतदाता का नाम दोबारा बहाल करने वाला सॉफ्टवेयर फीचर क्यों शुरू नहीं हो पाया और आईटी विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी इन 9 फैसलों में नहीं दी गई है।
EC Rules Change 2026: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में किए गए 6 दावे
1. 10 महीनों में 14 बार लिखित आपत्ति
रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की। इनमें 4 आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं।
2. मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर आपत्ति
दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने, नाम हटाने और दोबारा नाम शामिल करने की प्रक्रिया से संबंधित थीं। पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने से जुड़ी अपीलों पर भी सवाल उठाए गए थे।
3. वोटर डेटाबेस और ऑडिट पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, संधू और जोशी ने मतदाता डेटाबेस तक पहुंच को धीरे-धीरे दिल्ली में केंद्रीय स्तर पर लाए जाने पर सवाल उठाए थे। विवेक जोशी ने मतदाता रिकॉर्ड में किए जाने वाले बदलावों का ऑडिट कराने का सुझाव दिया था, ताकि रिकॉर्ड में बदलाव केवल अधिकृत अधिकारी ही कर सकें।
4. कुछ कदमों को बताया गया अनधिकृत और गैरकानूनी
रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं से जुड़े कुछ कदमों को “अनधिकृत और गैरकानूनी” बताया था। यह शब्द रिपोर्ट में दर्ज अधिकारियों की आपत्तियों के संदर्भ में इस्तेमाल किए गए थे।
5. फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति
दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी। विवेक जोशी ने कहा था कि चुनाव नियमों में बदलाव किए बिना फॉर्म-6 में इस तरह बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बाद संधू ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज की।
6. गोवा में 97 मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके
रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा में 97 ऐसे मतदाता थे, जिन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों ने पात्र माना था, लेकिन सॉफ्टवेयर से जुड़ी समस्या के कारण वे अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके। रिपोर्ट ने इसे डेटा सिस्टम के केंद्रीयकरण को लेकर उठाई गई चिंताओं के एक उदाहरण के रूप में बताया।









