Election comission: राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने रहेंगे और उनके खिलाफ फिलहाल कोई कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी। विपक्ष ने उन्हें हटाने की मांग करते हुए यह प्रस्ताव पेश किया था।
193 सांसदों ने लगाए थे आरोप
विपक्षी दलों के 193 सांसदों ने मिलकर 12 मार्च को यह प्रस्ताव पेश किया था। इसमें ज्ञानेश कुमार पर कुल 7 गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपों में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने, भेदभाव करने, दुर्व्यवहार, चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और मतदाताओं के अधिकारों का हनन जैसे मुद्दे शामिल थे।
Election comission: SIR प्रक्रिया पर उठे सवाल
विपक्ष ने खासतौर पर बिहार और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस प्रक्रिया के कारण कई लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हट गया, जिससे उनका वोट देने का अधिकार प्रभावित हुआ।
Election comission: निष्पक्षता पर भी उठे सवाल
विपक्ष का आरोप था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में काम किया और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का भी हवाला दिया गया था। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया कि इन कदमों से सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
क्या है आगे की स्थिति
Election comission: महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने के बाद अब यह मामला यहीं खत्म होता नजर आ रहा है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने रहेंगे और चुनाव आयोग की जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
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