France Student Protest: फ्रांस में इस समय हाई स्कूल के छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। खराब स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों की कमी, भीड़भरी कक्षाओं और शिक्षा पर खर्च को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब कई शहरों तक फैल चुका है। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं और स्कूलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। 3 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक 735 स्कूल किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए और 1,747 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
भारत में भी 2026 में छात्रों से जुड़ा एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम से शुरू हुआ यह अभियान NEET-UG विवाद और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के खिलाफ खड़ा हुआ और बाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तक पहुंचा। 25 जुलाई को प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। दोनों आंदोलनों में छात्रों की नाराजगी एक अहम बिंदु है, लेकिन उनके मुद्दे, परिस्थितियां और सरकार की प्रतिक्रिया अलग हैं।
फ्रांस में आखिर क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत पेरिस के आसपास के उन इलाकों से हुई, जहां सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर लंबे समय से शिकायतें हैं। छात्रों और शिक्षकों की मुख्य शिकायतें जर्जर इमारतें, जरूरत से ज्यादा छात्र, शिक्षकों की कमी और संसाधनों की कमी से जुड़ी हैं। कई छात्रों का कहना है कि अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि के बच्चों को शिक्षा के समान अवसर नहीं मिल रहे हैं। कुछ इलाकों में कक्षाओं में छात्रों की संख्या ज्यादा है और शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। यही नाराजगी धीरे-धीरे स्कूलों के बाहर प्रदर्शन और स्कूलों की नाकेबंदी में बदल गई।
France Student Protest: 735 स्कूल प्रभावित, कई जगह हिंसा
शुक्रवार को फ्रांस के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। रिपोर्टों के मुताबिक 735 स्कूल प्रभावित हुए और करीब 400 स्कूल बंद रहे। कई शहरों में आगजनी, पुलिस पर पटाखे और दूसरी वस्तुएं फेंकने जैसी घटनाएं हुईं। मार्सिले, स्ट्रासबर्ग, रेनेस और पेरिस के आसपास के इलाकों में स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण रही। पुलिस ने कई जगह आंसू गैस का इस्तेमाल किया। सरकार ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं की निंदा की है, वहीं कुछ अधिकार संगठनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। यानी इस आंदोलन में एक तरफ शिक्षा से जुड़े सवाल हैं, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन के हिंसक होने को लेकर भी विवाद है।

France Student Protest: फ्रांस सरकार के सामने क्या चुनौती है?
फ्रांस सरकार ने एक तरफ छात्रों की शिक्षा संबंधी शिकायतों को स्वीकार किया है, वहीं हिंसा और तोड़फोड़ के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार शुक्रवार को 1,747 गिरफ्तारियां हुईं। सरकार की ओर से अगले साल के बजट में शिक्षा के लिए 65.5 अरब यूरो का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इसके बावजूद छात्रों और शिक्षकों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि क्या अतिरिक्त बजट स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए पर्याप्त होगा। आंदोलन का असर राजनीति पर भी पड़ रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 2027 में तीसरा कार्यकाल नहीं लड़ सकते और अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होना है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया है।
France Student Protest: भारत में कैसे शुरू हुआ था CJP आंदोलन?
भारत में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अभियान के तौर पर हुई थी। NEET-UG 2026 में पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों के बीच नाराजगी बढ़ने के बाद यह अभियान सड़क पर उतर आया। CJP से जुड़े छात्र प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, जवाबदेही और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसका बड़ा प्रदर्शन हुआ और बाद में आंदोलन कई राज्यों तक पहुंचा। आखिरकार 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार और NTA में बदलाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।
France Student Protest: अब CJP का मुद्दा शिक्षा से आगे बढ़ चुका है
NEET विवाद के बाद CJP की गतिविधियां केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहीं। संगठन ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभियान चलाया और स्कूलों की कमियों से जुड़े वीडियो सामने रखे। 2 अक्टूबर को CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में प्रदर्शन किया। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर आई, जबकि मुंबई में भी प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में विपक्षी दलों और कई सार्वजनिक हस्तियों की भागीदारी या समर्थन देखने को मिला। यानी भारत में आंदोलन का शुरुआती मुद्दा परीक्षा व्यवस्था था, लेकिन अब इसके मुद्दे का दायरा चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग तक पहुंच गया है।
फ्रांस और भारत के छात्र आंदोलनों में क्या फर्क है?
दोनों देशों में छात्रों की नाराजगी का एक साझा पहलू व्यवस्था से असंतोष है, लेकिन मुद्दे अलग हैं। फ्रांस में मुख्य सवाल स्कूलों की स्थिति, शिक्षक और स्टाफ की कमी, कक्षाओं में भीड़, संसाधन और शिक्षा में असमानता से जुड़े हैं। आंदोलन का बड़ा हिस्सा सीधे स्कूलों की रोजमर्रा की व्यवस्था को लेकर है। भारत में CJP आंदोलन की शुरुआत NEET-UG विवाद, पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग से हुई थी। बाद में इसका एजेंडा दूसरे सार्वजनिक मुद्दों तक बढ़ा। एक और बड़ा फर्क आंदोलन के तरीके में है। फ्रांस में मौजूदा प्रदर्शन के दौरान कई जगह हिंसा, आगजनी और पुलिस से टकराव की घटनाएं हुई हैं। भारत के CJP आंदोलन में भी जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई, लेकिन दोनों घटनाक्रमों को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।

दोनों आंदोलनों से क्या तस्वीर निकलती है?
फ्रांस और भारत की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों घटनाएं दिखाती हैं कि छात्रों से जुड़े मुद्दे लंबे समय तक अनदेखे रहने पर व्यापक आंदोलन का रूप ले सकते हैं। फ्रांस में अभी आंदोलन जारी है और सरकार को शिक्षा से जुड़ी मांगों तथा हिंसा, दोनों मोर्चों पर प्रतिक्रिया देनी पड़ रही है। भारत में CJP का शुरुआती आंदोलन NEET विवाद के बाद अपने प्रमुख राजनीतिक लक्ष्य तक पहुंचा, लेकिन अब संगठन की गतिविधियां दूसरे मुद्दों तक फैल चुकी हैं। इसलिए दोनों आंदोलनों को सिर्फ सरकार बनाम छात्र संघर्ष के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। इनके पीछे शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, परीक्षा प्रणाली, सार्वजनिक संस्थानों पर भरोसा और राजनीतिक भागीदारी जैसे अलग-अलग सवाल भी जुड़े हुए हैं।
यह भी पढे़ : खत्म हो सकता है रूस-यूक्रेन युद्ध 4 देशों ने दिए प्रस्ताव, भारत के प्लान पर यूक्रेन राजी








