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‘आप जिन्ना को नहीं रोक पाए’… गांधी पर लिखे लेख में सुभाष बोस से लेकर विभाजन तक के सवाल

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GANDHI JAYANTI NEWS: इतिहास पढ़ने वालों को पता होगा कि सुभाष चंद्र बोस के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद महात्मा गांधी और बोस के बीच राजनीतिक मतभेद गहरे हो गए थे। 1939 में बोस दोबारा कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए, लेकिन गांधी के समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया की हार हुई। गांधी ने इस परिणाम को अपनी हार बताया था। बाद में बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसी ऐतिहासिक प्रसंग को आधार बनाते हुए एक लेख में महात्मा गांधी की राजनीतिक भूमिका और उनके निर्णयों पर कई सवाल उठाए गए हैं।

1. सुभाष चंद्र बोस से मतभेद

लेखक चंद्र प्रकाश शर्मा ने वर्ष 2018 में एक लेख के जरिये सवाल उठाया कि सुभाष चंद्र बोस जैसे लोकप्रिय नेता के साथ गांधी के राजनीतिक मतभेद आखिर किस दिशा में गए और इसका कांग्रेस की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ा? लेखक के अनुसार, बोस को अंततः कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा।

GANDHI JAYANTI NEWS: 2. पूना पैक्ट को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण

लेखक ने पूना पैक्ट के संदर्भ में गांधी की भूमिका की सराहना की है और इसके लिए उन्हें साधुवाद दिया है।

3. भगत सिंह को बचाने में गांधी की भूमिका पर सवाल

लेखक ने 1931 के गांधी-इरविन समझौते के दौरान भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी को रोकने में गांधी की भूमिका पर सवाल उठाया है। लेखक का तर्क है कि यदि उस समय उनकी फांसी रुक जाती तो गांधी की स्वीकार्यता और अधिक बढ़ सकती थी।

GANDHI JAYANTI NEWS: 4. देश के विभाजन को रोकने में असफलता का आरोप

लेखक ने गांधी की उस राजनीतिक कोशिश पर भी सवाल उठाया है, जिसके जरिए वे हिंदू-मुस्लिम एकता बनाए रखना चाहते थे। उनका कहना है कि यदि विभाजन रोका जा सकता तो उसके साथ हुई व्यापक हिंसा और जनहानि को भी रोका जा सकता था।

5. आंदोलनों को वापस लेने पर सवाल

लेखक ने गांधी द्वारा विभिन्न आंदोलनों को वापस लेने के फैसलों की आलोचना की है। उनके अनुसार, आंदोलन वापस लेने से स्वतंत्रता आंदोलन की गति कई बार प्रभावित हुई।

GANDHI JAYANTI NEWS: 6. खिलाफत आंदोलन का समर्थन

लेखक को 1920 के खिलाफत आंदोलन के साथ गांधी के जुड़ने पर आपत्ति है। उनका मानना है कि खिलाफत आंदोलन धार्मिक मुद्दे से जुड़ा था और गांधी द्वारा इसका समर्थन करना उचित नहीं था।

7. स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी के योगदान पर असहमति

लेखक ने गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को लेकर भी अपनी असहमति व्यक्त की है। उनका कहना है कि गांधी 1915 में भारत लौटने के बाद सक्रिय राजनीति में आए और इसके बाद उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख सेनानायक माना जाने लगा। लेखक इस राजनीतिक यात्रा और गांधी की भूमिका को लेकर सवाल उठाते हैं। हालांकि, यह लेखक का व्यक्तिगत ऐतिहासिक मूल्यांकन है और इतिहास में गांधी के योगदान को लेकर इसके विपरीत व्यापक मत भी मौजूद हैं।

GANDHI JAYANTI NEWS
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GANDHI JAYANTI NEWS: 8. हिंदू-मुस्लिम एकता की कोशिशों पर सवाल

लेखक के अनुसार गांधी ने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। लेख में मंदिरों में कव्वाली और अजान जैसी धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए लेखक सवाल उठाते हैं कि क्या दोनों समुदायों के बीच वास्तविक स्तर पर समान धार्मिक स्वीकार्यता बन पाई थी। लेखक का तर्क है कि जिस तरह उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए प्रयास किए, उसी तरह दोनों समुदायों की धार्मिक परंपराओं के बीच समान स्वीकार्यता दिखाई नहीं दी।

9. दलित सुधार के प्रयास

लेखक ने दलित समाज के सुधार के लिए गांधी द्वारा किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस दिशा में कई संगठन और अभियान चलाए गए, लेकिन उनके अनुसार ये प्रयास पर्याप्त नहीं थे।

GANDHI JAYANTI NEWS: 10. स्वच्छता के विचारों की प्रशंसा

लेखक ने गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों की स्पष्ट रूप से प्रशंसा की है। उनका कहना है कि गांधी के साफ-सफाई और स्वच्छता से जुड़े विचार उन्हें अच्छे लगते हैं।

गांधी की हत्या को लेकर लेखक का स्पष्ट मत

लेखक ने गांधी की हत्या को किसी भी परिस्थिति में जायज नहीं माना है। हालांकि, इसी के साथ उन्होंने गांधी की अल्पसंख्यक नीति और पाकिस्तान से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख की आलोचना की है। लेखक ने नाथूराम गोडसे और गांधी के बीच पूर्व मुलाकातों का भी उल्लेख किया है और दावा किया है कि गोडसे गांधी से प्रभावित थे। इसके बाद लेखक यह तर्क देते हैं कि कुछ राजनीतिक और वैचारिक मतभेद ऐसे थे, जिनका समाधान हत्या नहीं हो सकता था। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गांधी की हत्या के लिए नाथूराम गोडसे को दोषी ठहराया गया था और हत्या को किसी राजनीतिक असहमति के आधार पर उचित ठहराना लेखक के कथन से अलग एक स्वतंत्र ऐतिहासिक प्रश्न है।

GANDHI JAYANTI NEWS: 11. विभाजन के बाद शरणार्थियों को लेकर सवाल

लेखक ने विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए हिंदू शरणार्थियों की स्थिति का उल्लेख करते हुए गांधी की भूमिका पर सवाल उठाया है। लेख में दिल्ली की जामा मस्जिद से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख है और दावा किया गया है कि कुछ शरणार्थियों को वहां शरण नहीं मिल सकी। लेखक का सवाल है कि ऐसे समय में गांधी द्वारा हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अपील और शरणार्थियों की वास्तविक स्थिति के बीच कितना अंतर था।

चंद्र प्रकाश शर्मा का यह 2018 का लेख महात्मा गांधी की राजनीतिक भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। लेखक ने जहां पूना पैक्ट और गांधी के स्वच्छता संबंधी विचारों की सराहना की है, वहीं सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, खिलाफत आंदोलन, देश विभाजन, हिंदू-मुस्लिम संबंध और विभाजन के बाद शरणार्थियों जैसे मुद्दों पर गांधी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

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