Gen Z Protest: चीन के राजनीतिक विश्लेषकों और सरकारी मीडिया (जैसे Global Times) द्वारा भारत में हालिया जेन ज़ी (Gen Z) के छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया अभियानों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाकामी के रूप में प्रस्तुत करने के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं। आइए जानते हैं।
आर्थिक नीति और बिना रोज़गार का विकास (Jobless Growth)
चीनी टिप्पणीकारों का तर्क है कि भारत की तेज़ जीडीपी वृद्धि दर युवाओं के लिए पर्याप्त रोज़गार पैदा करने में विफल रही है। उनकी नज़र में युवाओं का यह गुस्सा सिर्फ प्रशासनिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उच्च बेरोजगारी और युवाओं में भविष्य को लेकर व्याप्त आर्थिक असुरक्षा का नतीजा है।NEET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में धांधली व पेपर लीक की घटनाओं को चीनी मीडिया ने मोदी सरकार की संस्थागत नाकामी के रूप में प्रचारित किया है। उनका मानना है कि भारत की प्रमुख परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी केंद्र सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल उठाती है।
‘अजेय छवि’ पर डिजिटल प्रहार
चीनी टिप्पणीकारों का विश्लेषण है कि पिछले एक दशक में बनी सरकार की अजेय और मजबूत छवि को इस बार किसी पारंपरिक राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि जेन ज़ी के डिजिटल मीम्स, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और व्यंग्य ने चुनौती दी है। उनकी राय में, युवाओं का यह स्वतःस्फूर्त आक्रोश सरकार के नैरेटिव पर नियंत्रण को कमज़ोर करता है।
क्या है भू-राजनीतिक नैरेटिव?
ग्लोबल स्टेज पर भारत के उभार और ‘पश्चिम बनाम चीन’ की होड़ के बीच चीन हमेशा भारत की आंतरिक अस्थिरता को उजागर करने का मौका ढूंढता है। भारत के घरेलू मोर्चे पर असंतोष दिखाकर चीन दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि भारत की लोकतांत्रिक और आर्थिक नीतियाँ अंदरूनी विरोधाभासों से घिरी हुई हैं।
Written By: Anushka
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