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CEC की नियुक्ति, अधिकार और हटाने का नियम क्या? Gyanesh Kumar विवाद से समझें पूरा सिस्टम

Gyanesh Kumar: CEC की नियुक्ति, अधिकार और हटाने का नियम क्या?

Gyanesh Kumar: भारत में चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है और इसके प्रमुख पद पर मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC होता है। CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर हाल में राजनीतिक बहस तेज हुई है। उनके कामकाज, चुनाव आयोग की भूमिका और SIR जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसी बीच यह जानना जरूरी है कि CEC की नियुक्ति कौन करता है, उन्हें क्या अधिकार मिले हैं और पद से हटाने की प्रक्रिया क्या है।

CEC की नियुक्ति कैसे होती है?

संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है। CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। हालांकि राष्ट्रपति के पास नाम चुनने की स्वतंत्र शक्ति नहीं होती। इसके लिए कानून में तय चयन प्रक्रिया का पालन किया जाता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत एक चयन समिति CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों के नामों की सिफारिश करती है। इसके बाद राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं।

Gyanesh Kumar: चयन समिति में कौन-कौन शामिल होते हैं?

2023 में बने कानून के बाद CEC और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति का प्रावधान है। इसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद बनी अंतरिम व्यवस्था में चयन समिति में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे। नए कानून में मुख्य न्यायाधीश की जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया।

CEC का कार्यकाल और जिम्मेदारियां क्या हैं?

कानून के मुताबिक CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल अधिकतम छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है, जो पहले हो। CEC की भूमिका केवल चुनाव की तारीख घोषित करने तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग मतदाता सूची, चुनाव कार्यक्रम, चुनाव प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामलों की निगरानी करता है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को चुनावों के संचालन की व्यापक जिम्मेदारी मिली है।

Gyanesh Kumar: CEC के पास कितनी ताकत होती है?

CEC चुनाव आयोग का प्रमुख होता है, लेकिन चुनाव आयोग एक संस्थागत निकाय है। आयोग संसद, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों की निगरानी करता है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान आयोग को चुनाव कार्यक्रम तय करने, चुनावी व्यवस्थाओं की निगरानी करने और निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक प्रशासनिक निर्देश जारी करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। चुनाव आचार संहिता से जुड़े मामलों में भी आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

CEC को हटाना इतना कठिन क्यों है?

CEC को सामान्य सरकारी आदेश से पद से नहीं हटाया जा सकता। संविधान के अनुच्छेद 324(5) में CEC को विशेष सुरक्षा दी गई है। उन्हें उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जिस प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। इसके लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव लाना होता है। जांच के बाद दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत पड़ती है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं। CEC को हटाने के आधार में सिद्ध कदाचार या अक्षमता शामिल है।

Gyanesh Kumar विवाद में क्या समझना जरूरी है?

Gyanesh Kumar को लेकर उठे विवाद के बीच उनके खिलाफ कार्रवाई या हटाने की मांग की चर्चा हुई है। लेकिन किसी CEC के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव या मांग उठना और वास्तव में पद से हट जाना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। CEC को हटाने के लिए केवल राजनीतिक विरोध या सामान्य बहुमत पर्याप्त नहीं है। संविधान में तय संसदीय प्रक्रिया, जांच और विशेष बहुमत की शर्तें पूरी करनी होती हैं। यही व्यवस्था चुनाव आयोग के प्रमुख पद को कार्यपालिका और तत्काल राजनीतिक दबाव से संवैधानिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाई गई है।

 

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