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मेरी मार्कशीट जला सकते हो…’ हिमंता बिस्वा सरमा ने ऐसा क्यों कहा? वजह जानकर रह जाएंगे दंग …

Himanta Biswa Sarma Row: असम की राजनीति में इन दिनों चुनावी हलचल तेज है और इसी बीच हिमंता बिस्वा सरमा का एक पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया है। उन्होंने कभी कहा था“आप मेरी मार्कशीट जला सकते हैं, मुझे इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी।” यह बयान अब फिर से सुर्खियों में है।

क्यों कहा था ऐसा?

दरअसल, यह बात उनके छात्र जीवन से जुड़ी है। एक इंटरव्यू में उनके करीबी रहे राहुल महंता ने बताया कि हॉस्टल के दिनों में जब ज्यादातर छात्र अपने भविष्य और नौकरी को लेकर चिंतित रहते थे, तब हिमंता बिस्वा सरमा का नजरिया बिल्कुल अलग था। उन्हें पहले से ही साफ था कि उनका करियर राजनीति में ही बनेगा।

Himanta Biswa Sarma Row: पढ़ाई नहीं, राजनीति था लक्ष्य

हिमंता बिस्वा सरमा के लिए मार्कशीट सिर्फ एक औपचारिक दस्तावेज थी, न कि करियर का आधार। जहां बाकी छात्र अच्छे नंबर लाकर नौकरी पाने की सोचते थे, वहीं उन्होंने शुरू से ही राजनीति को अपना लक्ष्य बना लिया था।

छात्र राजनीति से हुई शुरुआत

उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) से हुई, जहां उन्होंने छात्र नेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। यहीं से उनके नेतृत्व कौशल और राजनीतिक समझ का विकास हुआ।

Himanta Biswa Sarma Row: कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर

शुरुआत में हिमंता बिस्वा सरमा कांग्रेस से जुड़े और धीरे-धीरे एक मजबूत नेता के रूप में उभरे। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा और वित्त जैसे अहम विभाग संभाले। लेकिन बाद में मतभेदों के चलते 2015 में उन्होंने पार्टी छोड़कर भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया।

असम की राजनीति में बड़ा चेहरा

बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका कद तेजी से बढ़ा और वे पूर्वोत्तर की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। आज वे असम के मुख्यमंत्री हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव में फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

Himanta Biswa Sarma Row: क्या है इस बयान का असली मतलब?

“मार्कशीट जला सकते हो” वाला बयान दरअसल उनके आत्मविश्वास और स्पष्ट लक्ष्य को दर्शाता है। यह दिखाता है कि उन्होंने अपने करियर के लिए पारंपरिक रास्ते की बजाय अलग दिशा चुनी और उसी पर डटे रहे। यही वजह है कि उनका यह बयान आज भी चर्चा में रहता है और युवाओं के बीच अलग सोच का उदाहरण माना जाता है।

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