India Alliance Delimitation: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसी बीच ऐसी चर्चाएं सामने आईं कि शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) कुछ शर्तों के साथ इन विधेयकों का समर्थन कर सकती है। हालांकि, पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए साफ किया है कि पार्टी ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
सुप्रिया सुले ने खबरों का किया खंडन
मुंबई में मीडिया से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि सुबह से कुछ समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में एनसीपी (एसपी) के समर्थन को लेकर खबरें प्रसारित की जा रही हैं, लेकिन पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जो भी जानकारी सामने आ रही है, वह केवल सूत्रों के हवाले से है। सुले ने स्पष्ट किया कि संविधान संशोधन विधेयक की प्रति मिलने के बाद पार्टी 24 घंटे के भीतर विचार-विमर्श कर अपना आधिकारिक रुख सार्वजनिक करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय पर महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के प्रमुख नेताओं से भी चर्चा की गई है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
India Alliance Delimitation: मानसून सत्र से पहले बढ़ीं राजनीतिक अटकलें
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसी कारण विपक्षी दलों के रुख को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। यह भी कहा जा रहा था कि एनसीपी (एसपी) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हुए बिना इन विधेयकों के समर्थन में मतदान करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, सुप्रिया सुले के ताजा बयान के बाद स्पष्ट हो गया है कि पार्टी ने अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है।
संजय राउत बोले- सामूहिक रूप से होगा अंतिम फैसला
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत ने भी इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि अभी यह भी तय नहीं है कि परिसीमन विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह विधेयक सदन में लाती है, तो इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दल आपसी चर्चा के बाद सामूहिक रूप से अपना रुख तय करेंगे। राउत ने बताया कि पिछले सत्र में सरकार के साथ हुई चर्चा में कुछ संशोधनों की मांग रखी गई थी। उन्होंने यह भी दोहराया कि शरद पवार की पार्टी के भाजपा या एनडीए के साथ जाने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और ऐसी अफवाहें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं।
Written by- Rashmi Sharma
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