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मैदान की जरूरत और तकनीकी सुधार; जर्सी बदलाव पर हॉकी इंडिया का रुख

भारतीय हॉकी की नई जर्सी पर विवाद

Hockey Jersey Change: हॉकी इंडिया ने भारतीय हॉकी टीम की नई ट्रेनिंग और मैच किट में बदलाव को लेकर हो रही राजनीति पर विराम लगाने की अपील की है। महासंघ का कहना है कि यह फैसला विशुद्ध रूप से खेल के तकनीकी पहलुओं और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

हॉकी इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, आधुनिक हॉकी अब ज्यादातर नीले रंग की सिंथेटिक टर्फ (Astroturf) पर खेली जाती है। नीली टर्फ पर नीले रंग की जर्सी पहनने से खिलाड़ियों को एक-दूसरे की स्थिति (Visibility) को तुरंत पहचानने में कठिनाई होती थी, जिससे पासिंग और गेम-प्ले की गति प्रभावित हो रही थी। कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों से मिले फीडबैक के बाद हाई-विजिबिलिटी वाले भगवा (केसरिया) रंग को चुना गया, जो भारत के तिरंगे का मुख्य हिस्सा है। महासंघ का स्पष्ट कहना है कि खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।

विपक्ष का केंद्र सरकार पर निशाना

भारतीय हॉकी टीम की पारंपरिक ‘ब्लू’ जर्सी को भगवा रंग में बदलने के फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे देश के इतिहास, विरासत और खेल की स्थापित संस्कृति को बदलने का सुनियोजित प्रयास करार दिया।

प्रियंका गांधी ने कहा कि दशकों से भारतीय खेल टीमों की पहचान ‘मेन इन ब्लू’ के रूप में रही है। प्रशंसकों के मन में टीम इंडिया की यह तस्वीर गहराई से बसी हुई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार हर क्षेत्र और संस्था में अपने राजनीतिक एजेंडे और एक खास रंग को थोप रही है। प्रियंका गांधी के मुताबिक, जिस तरह से शिक्षा नीति के जरिए इतिहास को बदलने की कोशिश हो रही है, ठीक उसी तरह खेलों के जरिए भी देश की पुरानी पहचान और भाईचारे के प्रतीक रंगों को मिटाया जा रहा है।

जर्सी विवाद पर क्या सोचते हैं खेल प्रेमी?

भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी पर छिड़ा विवाद अब प्रशंसकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। खेल जगत के जानकारों और फैंस के बीच इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

एक तरफ, जहां पुराने फैंस और कुछ पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि ‘ब्लू’ जर्सी के साथ भारत ने हॉकी का सुनहरा दौर और कई ऐतिहासिक जीतें देखी हैं, इसलिए इस भावनात्मक पहचान को अचानक बदलना सही नहीं है। वहीं, दूसरी ओर नए दौर के विश्लेषकों और आधुनिक खेल प्रेमियों का कहना है कि अगर जर्सी का रंग बदलने से नीले टर्फ पर खिलाड़ियों को विजिबिलिटी का फायदा मिलता है और टीम का प्रदर्शन सुधरता है, तो ऐसे फैसलों का स्वागत होना चाहिए। फुटबॉल और क्रिकेट जैसी वैश्विक टीमों में भी ‘अवे किट’ और टर्फ के हिसाब से रंगों का चयन आम बात है।

Written by: Anushka