IPS Ajay Pal Sharma: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी पारा उस वक्त और चढ़ गया, जब एक प्रशासनिक कार्रवाई ने राजनीतिक टकराव का रूप ले लिया। चुनावी माहौल में निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर उठे सवाल अब सीधे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदलते नजर आ रहे हैं।
अजय पाल शर्मा का वीडियो सुर्खियों में
चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर और यूपी कैडर के चर्चित IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा एक वीडियो को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में वह टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को लेकर सख्त चेतावनी देते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला महज प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। बताया जा रहा है कि फलता विधानसभा सीट से टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर खान पर स्थानीय लोगों को डराने-धमकाने के आरोप लगे थे। शिकायत मिलते ही ऑब्जर्वर अजय पाल शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। हालांकि, स्थानीय स्तर पर सहयोग न मिलने के बावजूद टीम ने जांच जारी रखी और आखिरकार संबंधित स्थान तक पहुंच गई।
प. बंगाल में भाजपा ने ऑब्जवर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किये हुए अपने एजेंट भेजे हैं लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं। दीदी हैं, दीदी रहेंगी!
सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे ‘एजेंडों के एजेंटों’ की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जाँच होगी और बेहद सख़्त… pic.twitter.com/MlQuCiSn3p
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 27, 2026
जब टीम वहां पहुंची, तो सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो गए। मौके पर अपेक्षा से अधिक पुलिस बल की तैनाती देखी गई, जिस पर ऑब्जर्वर ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया। इस कार्रवाई को चुनाव के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है।
IPS Ajay Pal Sharma: अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के नाम पर बाहरी हस्तक्षेप किया जा रहा है और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश बताया। उन्होंने लिखा कि प. बंगाल में भाजपा ने ऑब्जवर के नाम पर रामपुर व संभल में टेस्ट किये हुए अपने एजेंट भेजे हैं लेकिन इनसे कुछ होने वाला नहीं। दीदी हैं, दीदी रहेंगी! सही समय आने पर भाजपा और उनके संगी-साथियों के इन जैसे ‘एजेंडों के एजेंटों’ की सारी आपराधिक करतूतों की गहरी जाँच होगी और बेहद सख़्त दंडात्मक कार्रवाई भी। ये सब अधिकारी के रूप में अनरजिस्टर्ड लोगों के अनरजिस्टर्ड अंडरग्राउंड सदस्य हैं। हम न इन्हें भागने देंगे, न भूमिगत होने देंगे। ये खोज के लाए जाएंगे, खोद के लाए जाएंगे और अपने कुकृत्यों के लिए क़ानूनी सज़ा भी पाएंगे। लोकतंत्र के अपराधी बख़्शे नहीं जाएंगे! फिलहाल, अब यह मामला सिर्फ एक वीडियो या एक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि चुनावी माहौल में निष्पक्षता, प्रशासन की भूमिका और राजनीतिक दखल जैसे बड़े सवालों को जन्म दे रहा है।
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