Bengal Political Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों के एक साथ अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। अब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर NCPI क्या है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसका राजनीतिक आधार कितना मजबूत है।
तीन साल पहले एक दंपति ने बनाई थी पार्टी
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, NCPI की स्थापना वर्ष 2023 में पश्चिम बंगाल के उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेउली कुंडू ने की थी। पार्टी के दस्तावेजों में शेउली कुंडू का नाम कोषाध्यक्ष के रूप में दर्ज है। शेउली खुद को कलकत्ता हाईकोर्ट की वकील बताती हैं, जबकि उनके पति उत्तिया कुंडू पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।उत्तिया कुंडू ने सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ अपनी तस्वीर भी साझा की थी, जिससे पार्टी की राजनीतिक सक्रियता चर्चा में आई थी।
बंगाल में पंजीकरण, लेकिन चुनावी शुरुआत त्रिपुरा से
NCPI का पंजीकृत कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में स्थित है। हालांकि, पार्टी ने अपनी चुनावी शुरुआत 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से की थी।उस चुनाव में पार्टी ने चार उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, लेकिन कोई भी उम्मीदवार उल्लेखनीय प्रदर्शन नहीं कर सका। कई उम्मीदवारों को NOTA के बराबर या उससे भी कम वोट मिले थे। सभी उम्मीदवारों को मिलाकर पार्टी को करीब 1,198 वोट प्राप्त हुए थे।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को लगभग 1.13 लाख रुपये का चंदा मिला था। उस समय पार्टी का प्रमुख नारा था “अपने अधिकारों को बचाने के लिए दलबदलुओं को नकारें।”

चुनाव के बाद लगभग निष्क्रिय हो गई थी पार्टी
समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिपुरा के चावामानु विधानसभा क्षेत्र से NCPI के उम्मीदवार रहे बरजेडा त्रिपुरा को 536 वोट मिले थे। जब उन्हें TMC सांसदों के पार्टी में विलय की खबर मिली तो वे खुद भी हैरान रह गए।
बरजेडा ने बताया कि वे दिहाड़ी मजदूर हैं और चुनाव खत्म होने के बाद उनका पार्टी से कोई संपर्क नहीं रहा।
वहीं, NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा के कैलाशहर से चुनाव लड़ चुके जहांगीर अली ने बताया कि चुनाव के दौरान शेउली कुंडू कोलकाता से आकर उम्मीदवारों के संपर्क में थीं। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही पार्टी की गतिविधियां लगभग बंद हो गईं और नेताओं से संपर्क भी टूट गया।
TMC के 20 सांसदों ने किया NCPI में विलय
रविवार को TMC के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने NCPI में विलय की घोषणा कर दी। इसके बाद इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की।लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि TMC के दो-तिहाई सांसदों ने अलग समूह के रूप में मान्यता देने के लिए औपचारिक पत्र सौंप दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले NDA के साथ काम करेगा।बताया गया कि स्पीकर से मुलाकात से पहले बागी सांसदों ने पश्चिम बंगाल भाजपा प्रभारी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ भी बैठक की थी।
संसद में अलग पहचान की मांग, जानिए 5 बड़ी बातें
- बागी सांसदों ने लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है।
- काकोली घोष दस्तीदार के अनुसार, NCPI अब NDA को समर्थन देगी।
- बागी गुट का दावा है कि उनके साथ TMC के दो-तिहाई सांसद हैं।
- ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने स्पीकर को पत्र लिखकर इस नए समूह को मान्यता न देने की मांग की है।
- वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय का कहना है कि असली TMC कौन है, इसका फैसला अदालत करेगी। बागी गुट पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जुड़वा फूल’ पर भी दावा कर सकता है।
Bengal Political Crisis: आगे क्या होगा? तीन अहम सवालों के जवाब
सवाल 1: बागी सांसदों ने नई पार्टी में विलय क्यों किया?
बागी सांसदों का कहना है कि उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया है। उनका दावा है कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई सांसद हैं, इसलिए वे कानूनी रूप से अलग गुट बना सकते हैं।सुदीप बंद्योपाध्याय के अनुसार, फिलहाल उन्होंने NCPI में विलय किया है। आने वाले समय में वे तृणमूल कांग्रेस के नाम और संगठन पर दावा भी पेश कर सकते हैं। इस मामले में अंतिम फैसला अदालत करेगी।
सवाल 2: अब बागी सांसदों की भूमिका क्या होगी?
बागी सांसदों ने संसद में अलग बैठने की मांग की है। चूंकि उन्होंने NDA को समर्थन देने का ऐलान किया है, इसलिए संभावना है कि उन्हें सत्तापक्ष के सांसदों के निकट बैठने की व्यवस्था मिल सकती है।
सवाल 3: ममता बनर्जी का गुट क्या करेगा?
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट TMC पर अपना दावा बनाए रखेगा। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता नहीं देने की मांग की है।
Bengal Political Crisis: NCPI में शामिल हुए TMC के 20 सांसद
- काकोली घोष दस्तीदार (बारासात)
- जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
- खलीलुर रहमान (जांगीपुर)
- यूसुफ पठान (बहरामपुर)
- अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद)
- पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
- बापी हलदार (मथुरापुर)
- सायोनी घोष (जादवपुर)
- माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
- मिताली बाग (आरामबाग)
- दीपक अधिकारी ‘देव’ (घाटाल)
- कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
- जून मालिया (मेदिनीपुर)
- अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
- डॉ. शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
- प्रसून बंद्योपाध्याय (हावड़ा)
- असित कुमार माल (बोलपुर)
- शताब्दी रॉय (बीरभूम)
- रचना बनर्जी (हुगली)
- सुदीप बंद्योपाध्याय (कोलकाता उत्तर)
एक ऐसी पार्टी, जिसे 2023 के त्रिपुरा चुनाव के बाद लगभग भुला दिया गया था, वह आज देश की राजनीति में सुर्खियों में है। TMC के 20 सांसदों के NCPI में शामिल होने से पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर लोकसभा अध्यक्ष, चुनाव आयोग और अदालत के आगामी फैसलों पर रहेगी, जो तय करेंगे कि इस राजनीतिक संघर्ष का अगला अध्याय क्या होगा।
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