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उन्नाव साधु हत्याकांड: मुख्य आरोपी इसराइल पुलिस मुठभेड़ में ढेर, एक लाख का था इनामी

उन्नाव साधु हत्याकांड का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर

Unnao Bangarmau Sant Murder:  उन्नाव में संत राममिलन दास उर्फ बाबा मिलन दास सिंह की हत्या के मामले में फरार चल रहा मुख्य आरोपी इसराइल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के अनुसार, वह इस हत्याकांड का प्रमुख आरोपी था और उसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।पुलिस अधीक्षक जयप्रकाश सिंह ने बताया कि 9 जून को इसराइल ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर बाबा मिलन दास की हत्या की थी। घटना के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।

तड़के मिली सूचना, पुलिस ने की घेराबंदी

पुलिस को सोमवार सुबह करीब 3:40 बजे सूचना मिली कि एक लाख का इनामी इसराइल ताजपुर अंडरपास के पास मौजूद है और किसी व्यक्ति का इंतजार कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस और एसओजी टीम मौके पर पहुंच गई और इलाके की घेराबंदी कर दी।पुलिस ने आरोपी को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान एसओजी के सिपाही विकास भदौरिया गोली लगने से घायल हो गए। वहीं दरोगा न्यूटन कुमार सिंह की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोली लगी, जिससे उनकी जान बच गई।इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें इसराइल को गोली लगी। घायल हालत में उसे बांगरमऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

Unnao Bangarmau Sant Murder: उन्नाव साधु हत्याकांड का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर
उन्नाव साधु हत्याकांड का मुख्य आरोपी एनकाउंटर में ढेर

हथियार और हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने आरोपी के पास से 315 बोर का तमंचा, दो खोखा कारतूस और एक चाकू बरामद किया। पुलिस का दावा है कि यही चाकू संत राममिलन दास की हत्या में इस्तेमाल किया गया था।इसराइल पर दो दिन पहले ही एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। घटना के एक दिन पहले उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज ने भी कहा था कि यदि आरोपी आत्मसमर्पण नहीं करेगा तो पुलिस कार्रवाई करेगी।

Unnao Bangarmau Sant Murder: आरोपी के घर पर लगा ताला

इसराइल मूल रूप से बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के ततियापुर गांव का निवासी था। हालांकि पिछले करीब 20 वर्षों से वह बांगरमऊ के पुरबिया टोला मोहल्ले में रह रहा था और मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करता था।उसके परिवार में पत्नी सईदा, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। घटना के बाद उसके घर पर ताला लगा हुआ मिला।इसराइल आठ भाइयों में पांचवें नंबर का था। उसके दो भाइयों की पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। उसके भाई पप्पू का भी लगभग सात महीने पहले बीमारी के कारण निधन हो गया था।

परिवार ने बताया साजिश का हिस्सा थी हत्या

बाबा मिलन दास के भाई राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि यह हत्या एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी। उनका कहना है कि बाबा मंदिर का निर्माण करा रहे थे और वहां नियमित रूप से भजन-कीर्तन का आयोजन करते थे। कुछ लोग मंदिर की गतिविधियों से नाराज थे और इसी वजह से उनकी हत्या कर दी गई।उन्होंने कहा कि बाकी आरोपियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार का दावा है कि मंदिर निर्माण के दौरान बाबा को कई बार धमकियां भी मिली थीं, लेकिन उन्होंने परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी थी।

वहीं दूसरे भाई वीरेंद्र सिंह ने पुलिस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इस हत्याकांड में शामिल बाकी लोगों और इसके पीछे के कथित मास्टरमाइंड को भी सामने लाया जाना चाहिए।

कैसे हुई थी संत राममिलन दास की हत्या?

बाबा मिलन दास बांगरमऊ थाना क्षेत्र के रामनगर के रहने वाले थे और अपने पांच भाइयों में सबसे छोटे थे। उनका वास्तविक नाम मिलन सिंह रघुवंशी था। उन्होंने साधु जीवन अपना लिया था और लोग उन्हें बाबा मिलन दास के नाम से जानते थे।वह अपने घर से करीब 500 मीटर दूर स्थित अपनी जमीन पर भगवान शिव का मंदिर बनवा रहे थे। मंदिर का निर्माण कार्य पिछले पांच महीनों से चल रहा था और वह वहां नियमित पूजा-पाठ करते थे।

परिजनों के अनुसार, मंदिर के कुछ दूरी पर एक मस्जिद भी स्थित है। आरोप है कि बाबा मंदिर में लाउडस्पीकर के जरिए भजन बजाते थे, जिससे कुछ लोग नाराज रहते थे।

अहाते में बुलाकर किया गया हमला

आरोप है कि 9 जून की दोपहर संत राममिलन दास को सभासद अतीक खां के अहाते में बुलाया गया। वहां इसराइल और उसके साथियों ने उन पर चाकुओं से हमला कर दिया।हमलावरों ने उनकी पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर कई वार किए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घायल संत जान बचाने के लिए मुख्य गेट की ओर भागे, लेकिन हमलावर उनका पीछा करते रहे और लगातार हमला करते रहे।गंभीर रूप से घायल होने के बाद वह कुछ दूरी पर गिर पड़े। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। उन्हें तत्काल बांगरमऊ स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

हत्या के बाद सड़कों पर उतरे लोग

संत की हत्या की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। अधिकारियों ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत कराया। बाद में पुलिस की निगरानी में संत के शव को मंदिर के पास ही दफनाया गया।

अब तक चार आरोपियों पर कार्रवाई

संत के भाई वीरेंद्र सिंह की शिकायत पर पुलिस ने पांच नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था।एफआईआर में इसराइल, लल्ली उर्फ अजय गौतम, यामीन, शानू और मोहम्मद शफी के नाम शामिल थे।

पुलिस ने 11 जून को मोहम्मद शफी, लल्ली उर्फ अजय गौतम और यामीन को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस के मुताबिक, ये सभी आरोपी भागने की तैयारी में थे और उन्हें कल्याणी नदी पुल के पास से पकड़ा गया था। मुख्य आरोपी इसराइल फरार था, जिसे अब मुठभेड़ में मार गिराया गया है।

पहले भी हुई हैं साधुओं की हत्याएं

स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्नाव में इससे पहले भी साधुओं पर हमले और हत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।वर्ष 2013 में नगर के प्रसिद्ध बोधेश्वर मंदिर के सेवादार कल्लू पंडित की हत्या कर दी गई थी। उस घटना में संत राममिलन दास भी घायल हुए थे।इसके अलावा कई वर्ष पहले माढ़ापुर मार्ग पर भी एक संत की हत्या का मामला सामने आया था। स्थानीय लोग इन घटनाओं को लेकर चिंता जताते रहे हैं।

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