Iran crisis: दुनिया की सबसे अहम समुद्री रूट्स में शामिल Hormuz Strait को लेकर ईरान ने बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अब इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर टोल वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए एक नया प्राधिकरण भी बना दिया गया है, जो जहाजों को ट्रांजिट की मंजूरी देगा और उनसे शुल्क वसूलेगा। इस फैसले को सिर्फ समुद्री नियम नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक ताकत के समीकरण बदलने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
जहाजों को लेना होगा ट्रांजिट परमिशन
शिपिंग इंडस्ट्री की प्रतिष्ठित पत्रिका Lloyd’s List की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने “फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण” बनाया है। इसके तहत अब होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को पहले अनुमति लेनी होगी और टोल टैक्स जमा करना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाजों को स्वामित्व, बीमा, चालक दल और तय रूट की पूरी जानकारी देनी होगी। बताया जा रहा है कि ये नियम ईमेल के जरिए जहाज कंपनियों को भेजे जा रहे हैं।
Iran crisis: चीन की मुद्रा युआन में वसूला जा सकता है टैक्स
सबसे बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि ईरान यह शुल्क अमेरिकी डॉलर की बजाय चीन की मुद्रा युआन में लेने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिका की “पेट्रोडॉलर” व्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर खाड़ी के दूसरे देश भी इस मॉडल को अपनाते हैं, तो वैश्विक तेल व्यापार में डॉलर का वर्चस्व धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है। इससे चीन और एशियाई देशों की आर्थिक पकड़ मजबूत होगी।
Iran crisis: क्या है पेट्रोडॉलर सिस्टम?
1970 के दशक में अमेरिका और Saudi Arabia के बीच हुए समझौते के बाद तेल व्यापार लगभग पूरी तरह अमेरिकी डॉलर में होने लगा था। इसके बाद OPEC देशों ने भी इसी मॉडल को अपनाया और डॉलर वैश्विक रिजर्व मुद्रा बन गया। इस व्यवस्था से अमेरिका को बड़ा फायदा मिला। दुनिया भर के देशों ने डॉलर जमा किए और अमेरिकी बॉन्ड में निवेश बढ़ा। इससे अमेरिका की आर्थिक ताकत और राजनीतिक प्रभाव लगातार मजबूत होता गया।
“पेट्रोयुआन” से बदल सकता है खेल
अगर United Arab Emirates, Qatar, Kuwait और Bahrain जैसे देश भी ईरान को युआन में भुगतान करते हैं, तो यह “पेट्रोयुआन” मॉडल की शुरुआत मानी जा सकती है। इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जापान, दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है, जो खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं।
Iran crisis: दुनिया क्यों बढ़ा रही है सोने का भंडार?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अब अमेरिकी बॉन्ड की तुलना में ज्यादा सोना जमा कर रहे हैं। BRICS देशों के भीतर भी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं। बताया जा रहा है कि China, India और Brazil ने 2025 के दौरान अमेरिकी निवेश में कटौती की है। ऐसे में ईरान का यह कदम वैश्विक “डी-डॉलराइजेशन” बहस को और तेज कर सकता है।
युद्धविराम के बाद फिर बढ़ा तनाव
इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव भी बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी केंद्रीय कमान का दावा है कि ईरानी सेना ने अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल, ड्रोन और छोटी नौकाओं से हमला किया, हालांकि सभी हमलों को नाकाम कर दिया गया। वहीं ईरान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी जहाजों ने पहले उसके नागरिक टैंकर को निशाना बनाया था, जिसके बाद स्थिति बिगड़ी।
दुनिया की नजर अब होर्मुज पर
Iran crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्गों में से एक है। यहां किसी भी नए नियम या सैन्य तनाव का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। ऐसे में ईरान का यह नया कदम आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों की दिशा बदल सकता है।
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